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जयपुर की वायरल पिंक हथिनी की कैसे हुई मौत? पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आ गई सारी सच्चाई

शूट में दिख रही हथिनी का नाम चंचल है. उसके बारे में बताया जा रहा है कि चंचल की फरवरी में ही मौत हो गई है. मौत की खबर ने वन्यजीव प्रेमियों के विरोध की आग में घी का काम किया. वे हथिनी की मौत के लिए इस शूट को ही जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. 

जयपुर की वायरल पिंक हथिनी की कैसे हुई मौत? पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आ गई सारी सच्चाई
जयपुर में पिंक हाथी पर बवाल
Rajasthan:

जयपुर में एक विदेशी फोटोग्राफर के फोटोशूट को लेकर लगातार विवाद गहराता जा रहा है. उनके इस शूट में एक हाथी को चमकीले गुलाबी रंग से रंगा गया था. हाल ही में आर्ट फोटोग्राफर जूलिया बुरुलेवा ने 20 मार्च को शूट के फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किए. ये वीडियो तेजी से वायरल हो गए.  इसके बाद लोग इसकी जमकर आलोचना कर रहे हैं. यहां तक कि अभिनेत्री और वन्यजीव प्रेमी रूपाली गांगुली ने प्रधानमंत्री से पत्र लिखकर हाथी सवारी को बंद करने की मांग की है. वहीं, लगातार वन्यजीव प्रेमी इस शूट को क्रूरता बताते हुए हाथी मालिक, फोटोग्राफर और वन विभाग को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. 

शूट में दिख रही हथिनी का नाम चंचल है. उसके बारे में बताया जा रहा है कि चंचल की फरवरी में ही मौत हो गई है. मौत की खबर ने वन्यजीव प्रेमियों के विरोध की आग में घी का काम किया. वे हथिनी की मौत के लिए इस शूट को ही जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. 

1 साल पहले हुआ था शूट

एनडीटीवी की टीम ने इसकी पड़ताल की. हाथी गांव समिति के अध्यक्ष बल्लू खान ने इन बातों को बेबुनियाद बताया. उन्होंने बताया कि यह शूट करीब 1 साल पहले हुआ था. जब हथिनी की मौत हुई वह करीब 65 - 70 साल की थी. शूट के समय उसे गुलाल से रंगा गया था, जिससे सामान्यतः हम लोग होली खेलते हैं. करीब आधा घंटे बाद ही उस कलर को धो दिया गया था. 

हथिनी के मालिक सदीक खान ने बताया कि शूट बहुत पहले हुआ था. उनके पिता मन्ने खान की भी मौत हो चुकी है. वहीं, हथिनी के साथ रहते थे. उसके आधे हिस्से पर गुलाल लगाया गया था, जिसे तुरंत हटा लिया गया था. 

पोस्टमार्टम रिपोर्ट मौत का खुलासा

वहीं, हमनें मामले में आगे पड़ताल की तो हथिनी चंचल की पोस्टमार्टम रिपोर्ट पढ़ी. रिपोर्ट के मुताबिक हथिनी की मौत 4 फरवरी 2026 को दोपहर 3 बजकर 30 मिनट पर हुई. हथिनी की उम्र 67 वर्ष थी. रिपोर्ट के मुताबिक हथिनी की मौत सामान्य थी. बढ़ती उम्र के कारण उनकी मौत हृदय गति रुकने से हुई.

पोस्टमार्टम करने वाले पैनल के डॉक्टर अरविंद माथुर ने बताया कि हथिनी की उम्र 67 साल थी. उसकी मौत कार्डियोपल्मोनरी फेलियर के कारण हुई. उनकी मौत पूरी तरीके से प्राकृतिक थी, जिसका गुलाल लगाने वाली घटना से कोई संबंध नहीं है.

हालांकि सोशल मीडिया पर बढ़ते विवाद के बाद अब मामले में वन विभाग की ओर से जांच करवाई जा रही है.

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