राजस्थान के दौसा जिले के बांदीकुई थाना क्षेत्र में बीते 16 अगस्त 2020 को ऊनबड़ा गांव की रामदेवा ढाणी में प्रिंस उर्फ टिल्लू अपने घर के बाहर आंगन में खेलते समय अचानक रहस्य में तरीके से लापता हो गया था. उसके लापता होने के बाद 6 साल से पुलिस जांच कर रही है. इस जांच में अब 6 साल बाद मासूम की मौत का खुलासा हुआ कि पड़ोसियों ने ही प्रिंस की हत्या की, इसके बाद उसकी बॉडी को उस वक्त निर्माणधीन दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के पास गाड़ दिया था. जहां आज पूरा एक्सप्रेसवे बन कर तैयार हो चुका है. वहीं पुलिस ने 19 फरवरी 2026 को मामले की जांच में GPR मशीन से चिह्नित करवाया. फिर आरोपितो की निशानदेही पर दो जेसीबी से खुदाई कराना शुरू किया. करीब 6 घंटे खुदाई के बाद हाथ खाली रही. जांच अधिकारी जहीर अब्बास ने 23 फरवरी को एक बार फिर जेसीबी से करीब 180 मीटर लंबाई और 15 फीट गहराई खुदाई करवाई. लेकिन फिर भी पुलिस के हाथ खाली रहे.
इतना ही नहीं फिर 25 फरवरी 2026 को पुलिस ने एक बार जगह चिह्नित कर खुदाई शुरू की, करीब 5 घंटे जेसीबी चलने के बाद भी पुलिस को सफलता नहीं लगी. अब गुरुवार यानी 26 फरवरी 2026 को एक बार फिर से जेसीबी करीब डेढ़ घंटे तक खुदाई करवाई गई. लेकिन फिर भी आज पुलिस को सफलता नहीं मिली. वहीं पुलिस ने आरोपियों को गुरुवार को न्यायालय के अंदर पेश किया, जहां पर कोर्ट ने सगे भाई-बहन को पुलिस रिमांड पर 1 मार्च 2026 तक के लिए भेज दिया है.

पड़ोसी निकला आरोपी
इस मामले में 6 साल बाद सच्चाई सामने आई है कि 6 साल तक इस राज को अपने सीने में दबाकर रखने वाले पड़ोसी ने आखिरकार अपना जुर्म कबूल कर लिया है. उसने बताया कि रंजिश के चलते उसने मासूम प्रिंस की हत्या कर उसे निर्माणाधीन एक्सप्रेसवे के पास दफना दिया था. लेकिन चुनौती यह है कि 6 सालों में एक्सप्रेसवे का भूगोल बदल चुका है, जिससे आरोपी सटीक जगह नहीं बता पा रहा है. यही वजह है कि पुलिस को व्यापक स्तर पर खुदाई अभियान चलाना पड़ रहा है.

दुबई से पिता लौट आए भारत
बेटे की तलाश की खबर मिलते ही प्रिंस के पिता जगमोहन बैरवा 21 फरवरी को दुबई से भारत लौट आए. एक्सप्रेसवे की मिट्टी को हटते देख जगमोहन का धैर्य जवाब दे रहा है, लेकिन न्याय की उम्मीद अब भी जिंदा है. NDTV राजस्थान से एक्सक्लूसिव बातचीत में उन्होंने रुंधे गले से कहा, 'मेरा बेटा जिस भी कंडीशन में मिलेगा, मुझे खुशी होगी. मुझे पुलिस और न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है कि अब मेरे साथ न्याय होगा.' एक पिता की यह बेबसी वहां मौजूद हर अधिकारी और ग्रामीण की आंखें नम कर रही है.

कोर्ट की सख्ती के बाद जांच की बदली दिशा
यह मामला तब सुर्खियों में आया जब परिवार ने हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की. 7 जांच अधिकारियों के बदलने के बाद भी जब कुछ नहीं मिला, तो कोर्ट की सख्ती ने जांच की दिशा बदल दी. अब वैज्ञानिक साक्ष्यों और दिल्ली से आई मशीन के संकेतों के भरोसे पुलिस की टीम मौके पर डटी हुई है. लंबा समय बीत जाने के बावजूद, जगमोहन और उनके परिवार को आज भी उस इंसाफ की आस है जो मिट्टी के नीचे कहीं दबा हुआ है.
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