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50 साल पुरानी रसायनशाला में बनेंगी 31 प्रतिशत सस्ती दवाएं, 4000 अस्पतालों में होगी सप्लाई

अजमेर आयुर्वेदिक दवाओं के उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है जहां से अब 4 हजार अस्पतालों तक एक जैसी दवाएं पहुंचेंगी.

50 साल पुरानी रसायनशाला में बनेंगी 31 प्रतिशत सस्ती दवाएं, 4000 अस्पतालों में होगी सप्लाई
दीनदयाल इंडस्ट्रीज
राज्य सरकार को हर वर्ष लगभग 20 करोड़ रुपये की बचत होगी

अजमेर की लगभग 50 वर्ष पुरानी आयुर्वेदिक रसायनशाला अब आधुनिक तकनीक से लैस होकर राजस्थान की सबसे महत्वपूर्ण औषधि निर्माण इकाई बन गई है. राज्य सरकार ने इसे प्रदेश की नोडल आयुर्वेदिक रसायनशाला घोषित किया है, जहां तैयार होने वाली दवाओं की आपूर्ति अब राजस्थान के चार हजार से अधिक आयुर्वेद अस्पतालों और औषधालयों तक की जाएगी. पहले जहां दवाओं का निर्माण पारंपरिक और मैनुअल तरीके से किया जाता था, वहीं अब अत्याधुनिक तकनीक और ऑटोमेटिक मशीनों के जरिए बड़े स्तर पर उत्पादन संभव होगा. 

रसायनशाला में 75 से अधिक आधुनिक मशीनें स्थापित की गई हैं, जिनकी सहायता से 191 प्रकार की आयुर्वेदिक औषधियों का निर्माण किया जाएगा. नई टैबलेट मशीन प्रति सेकंड 54 टैबलेट तैयार करने में सक्षम है, जबकि ऑटोमेटिक बॉटलिंग प्लांट आठ घंटे में करीब 20 हजार बोतलों की पैकिंग करेगा. इससे उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ दवाओं की गुणवत्ता और एकरूपता भी सुनिश्चित होगी. विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि यह बदलाव केवल तकनीकी उन्नयन नहीं, बल्कि प्रदेश में आयुर्वेद सेवाओं को नई दिशा देने वाला कदम है.

स्पीकर वासुदेव देवनानी और उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा

स्पीकर वासुदेव देवनानी और उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा
Photo Credit: NDTV

31 प्रतिशत सस्ती दवाएं

इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ प्रदेश सरकार और मरीजों दोनों को मिलेगा. उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने बताया कि अजमेर और भरतपुर में पीपीपी मॉडल के तहत शुरू की गई व्यवस्था के अंतर्गत दीनदयाल इंडस्ट्रीज बाजार दर से 31 प्रतिशत कम कीमत पर आयुर्वेदिक दवाओं की आपूर्ति करेगी. इससे राज्य सरकार को हर वर्ष लगभग 20 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है. साथ ही प्रदेशभर के सरकारी आयुर्वेद अस्पतालों में एक समान गुणवत्ता की दवाएं समय पर उपलब्ध कराई जा सकेंगी. 

स्थानीय स्तर पर अलग-अलग दवाएं खरीदने की आवश्यकता भी कम होगी, जिससे आपूर्ति व्यवस्था अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी. सरकार का मानना है कि यह मॉडल आयुर्वेद विभाग को आर्थिक रूप से मजबूत करेगा और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. अजमेर की यह अत्याधुनिक रसायनशाला अब केवल एक उत्पादन इकाई नहीं, बल्कि राजस्थान की आयुर्वेदिक स्वास्थ्य व्यवस्था का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगी.

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