- पंजाब सरकार ने गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी रोकने के लिए संशोधित कानून पारित कर इसे पूरी तरह प्रभावी बनाया है
- नए कानून में बेअदबी के दोषियों को उम्रकैद और पच्चीस लाख रुपए तक जुर्माने की सजा का प्रावधान किया गया है
- यह कानून बेअदबी को गैर-जमानती अपराध घोषित करता है और दोषियों को बचना लगभग असंभव बना देता है
पंजाब में बेअदबी के मामलों को लेकर दशकों से चले आ रहे जनआक्रोश के बीच मान सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. विधानसभा से पारित होने के बाद अब राज्यपाल ने भी ‘जागत जोति श्री गुरु ग्रंथ साहिब सतिकार (संशोधन)–2026' बिल को मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही यह बिल पूरी तरह कानून बन गया है. पंजाब के लोगों के लिए यह एक ऐसा फैसला है, जिसका इंतजार लंबे समय से किया जा रहा था.
बेअदबी के मामले में नहीं बख्शे जाएंगे दोषी
पंजाब की सियासत और सामाजिक भावनाओं के लिहाज से यह दिन बेहद अहम माना जा रहा है. मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार द्वारा विधानसभा में यह बिल पेश किया गया था. लंबे समय से यह आरोप लगते रहे कि पिछले 10–15 वर्षों में अकाली और कांग्रेस सरकारें बेअदबी के मामलों में सिर्फ जांचों और कमेटियों तक ही सीमित रहीं. लेकिन मान सरकार ने अब ऐसा कानून लाया है, जो बेअदबी के दोषियों को सख्त सजा दिलाने का रास्ता खोलता है.
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नए कानून में उम्रकैद और 25 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान
सरकार का कहना है कि पहले के कानूनों में जानबूझकर ऐसी खामियां छोड़ी गई थीं, जिनका फायदा उठाकर आरोपी सजा से बच निकलते थे. बेअदबी के मामलों में सजा कम होने के कारण अपराधी जल्दी बाहर आ जाते थे. नए कानून में जहां उम्रकैद और 25 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है, वहीं इसे गैर‑जमानती अपराध भी घोषित किया गया है. इस कानून को बरगाड़ी जैसे मामलों की पृष्ठभूमि में भी अहम माना जा रहा है. क्या इससे उन मामलों के पीछे छिपे बड़े चेहरे सामने आएंगे, यह आने वाला वक्त बताएगा, लेकिन इस कानून ने आम लोगों के मन में नया भरोसा जरूर पैदा किया है.
नए कानून से दोषियों का बचना नामुमकिन
पिछले कई दशकों में पंजाब ने बेअदबी की ऐसी घटनाएं देखी हैं, जिन्होंने सूबे की शांति और भाईचारे को गहराई से प्रभावित किया. मान सरकार का दावा है कि नए कानून के जरिए उन सभी कानूनी रास्तों को बंद किया गया है, जिनका इस्तेमाल पहले दोषी बचने के लिए करते थे. सरकार का उद्देश्य सिर्फ सजा देना नहीं, बल्कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की मर्यादा और सम्मान को कानूनी तौर पर पूरी तरह सुरक्षित करना है. अब बेअदबी को एक सामान्य अपराध नहीं, बल्कि समाज के खिलाफ गंभीर साजिश के रूप में देखा जाएगा.
बिल के मुख्य प्रावधान और सख्ती
- पूरे एक्ट में अब “बीड़” की जगह “स्वरूप” शब्द का इस्तेमाल किया जाएगा
- सांप्रदायिक शांति भंग करने की साजिश में 10 साल से उम्रकैद तक की सजा
- 5 लाख से 25 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान
- स्वरूप को नुकसान पहुंचाने, जलाने, फाड़ने या चोरी करने पर 7 से 20 साल की जेल
- अपराध की कोशिश पर भी 3 से 5 साल की सजा
- उकसाने वालों को भी मुख्य आरोपी के बराबर सजा
- हर स्वरूप के लिए यूनीक ID के साथ SGPC द्वारा सेंट्रल रजिस्टर
- अपराध को गैर‑जमानती घोषित किया गया
- जांच केवल DSP या उससे ऊपर के अधिकारी करेंगे
यह कानून न सिर्फ वर्तमान के लिए, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक सख्त संदेश है कि पंजाब की सर्वोच्च धार्मिक मर्यादा से खिलवाड़ करने वालों के लिए अब कोई माफी और कोई समझौता नहीं होगा.
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