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किसान के बेटे सचिन सिवाच का ग्लासगो में पंच, फटे हुए ग्लव्स से शुरू हुआ सफर आज मेडल की दहलीज पर

सचिन सिवाच ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक पक्का कर लिया है. अब उनकी नजर गोल्ड पर टिकी हुई है.

किसान के बेटे सचिन सिवाच का ग्लासगो में पंच, फटे हुए ग्लव्स से शुरू हुआ सफर आज मेडल की दहलीज पर
सचिन सिवाच

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का रोमांच देशवासियों के सिर चढ़कर बोल रहा है. ग्लासगो में भारतीय मुक्केबाज लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं. इसी कड़ी में हरियाणा के लाल सचिन सिवाच (Sachin Siwach) ने भी बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए एक और पदक की पुष्टि कर दी है. 60 किलोग्राम भारवर्ग का क्वार्टर-फाइनल मुकाबला आज (29 जुलाई 2026) सचिन सिवाच और बोत्सवाना के बॉक्सर ट्रेजर मोरेमी के बीच खेला गया. जहां सचिन विपक्षी बॉक्सर को 5-0 से मात देते हुए सेमी-फाइनल का टिकट हासिल करने में कामयाब रहे. मोरेमी के खिलाफ मिली जीत के साथ ही कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में उनका कांस्य पदक भी पक्का हो गया है. सचिन के साथ-साथ देशवासियों को अब उनसे गोल्ड मेडल की उम्मीद जगने लगी है. उम्मीद है वह लोगों की उन उम्मीदों पर खरे उतरेंगे. 

साधारण परिवार में हुआ था सचिन का जन्म 

सचिन सिवाच का जन्म एक बेहद ही साधारण परिवार में हुआ था. मगर उन्होंने आर्थिक मजबूरियों को कभी भी अपने जीवन में रोड़ा बनने नहीं दिया. जब वह महज 10 साल के थे. उसी समय से उन्होंने प्रैक्टिस करनी शुरू कर दी थी. शुरूआत में उनके पास प्रैक्टिस के लिए अच्छे ग्लव्स नहीं हुआ करते थे. मगर इसके बावजूद वह अपनी फटी पुरानी ग्लव्स से घंटों धान के खेतों में बनी देसी रिंग में प्रैक्टिस किया करते थे. 

सचिन को पिता का मिला साथ 

वैसे तो सचिन के पिता किशन कुमार एक छोटे किसान हैं. मगर सचिन सिवाच को सचिन सिवाच बनाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान है. घर की स्थिति सही नहीं होने के बावजूद उन्होंने सचिन के प्रोटीन और स्पेशल डाइट में कोई कोताही नहीं बरती. उन्होंने खेतों में कठिन परिश्रम और कर्ज लेकर भी उनके खान-पान का पूरी तरह से ध्यान दिया. शुरुआती दौर में वह स्वयं सचिन को साइकिल पर बिठाकर ट्रेनिंग सेंटर तक ले जाया करते थे. 

सचिन के करियर का टर्निंग प्वाइंट

सचिन के करियर का टर्निंग प्वाइंट वर्ल्ड यूथ बॉक्सिंग चैंपियनशिप माना जाता है. जहां उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया था. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा और लगातार सफलता की सीढ़ियां चढ़ते रहे. मौजूदा समय में वह कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में देश का झंडा बुलंद कर रहे हैं. 

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