शतरंज की दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित नॉर्वे चेस प्रतियोगिता में तलिमनाडु के ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानंद (Rameshbabu Praggnanandhaa) ने भारत का परचम लहरा दिया है. प्रज्ञानंद ने टूर्नामेंट के अपने आखिरी मैच में जर्मनी के विंसेंट केइमर को हराकर 3 अंक हासिल किये और 18 अंकों के साथ नॉर्वे चेस चैंपियन बन गए. टूर्नामेंट के 10वें यानी फाइनल राउंड से पहले 20 साल के ग्रैंडमास्टर प्रज्ञा 15 अंक लेकर टूर्नामेंट में फिलिपिनो-अमेरिकन ग्रैंडमास्टर वेसेलि सो (15.5) से आधा अंक पीछे चल रहे थे. लेकिन दसवें राउंड में वेसेलि सो और अलीरेजा फिरोउजा का मुकाबला ड्रॉ रहा. इससे वेसेलि सो के 17 अंक हो गए और आखिरकार वो भारत के प्रज्ञानंद से पिछड़ गए.
जीत के फौरन बाद नॉर्वे चेस @NorwayChess से बात करते हए ग्रैंडमास्टर प्रज्ञानंद ने कहा, 'जीतने लगा तो मुझे बहुत टेंशन होने लगी. मैं अभी भी उसी जोन में हूं.' प्रज्ञा ने ये भी कहा, 'चार क्लासिकल गेम को जीतना इस टूर्नामेट को जीतने से भी ज्यादा अहम है.'
वर्ल्ड नंबर-1 मैग्नस कार्लसन को भी दो बार हराया
दुनिया के सिर्फ़ 6 पुरुष और 6 महिलाओं के इस सबसे इलीट टूर्नामेंट में प्रज्ञानंद ने मैग्नस कार्लसन को पहले सफेद और फिर काले मोहरों से खेलते हुए दो बार हराकर सबको दंग कर दिया था.
Pragg couldn't realize that he won Norway Chess 2026! 🤯🏆
— Norway Chess (@NorwayChess) June 5, 2026
Congratulations, Pragg! 🥳🔥 #NorwayChess pic.twitter.com/B7un878N6h
ओस्लो से NDTV से EXCLUSIVE फोन पर बात करते हुए प्रज्ञा के कोच वैभव सूरी ने कहा, 'मैग्नस को हराना वाकई बहुत बड़ी बात है. वो दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी और जीनियस हैं. उन्हें हराने से प्रग्गानंद का कॉन्फ़िडेंस भी ऊपर गया. लेकिन हमने टूर्नामेंट के लिए या मैग्नस के लिए कुछ अलग तैयारी नहीं की. मैचों के डिटेल्स पर ज़रूर काम किया. लेकिन अपने प्रोसेस पर भरोसा रखा और उसपर ही टिके रहे.'
Congratulations to Praggnanandhaa on becoming the first Indian to win the Norway Chess tournament - one of the ultimate tests of endurance, intellect and temperament in the world of chess.
— Gautam Adani (@gautam_adani) June 6, 2026
To defeat the world's absolute best on one of chess's grandest stages is a remarkable… pic.twitter.com/Cm8hncebV5
प्रग्गा की जीत का सफर
प्रज्ञा ने टूर्नामेंट में जबरदस्त कमबैक करते हुए लगातार चार जीत हासिल कर टूर्नामेंट का खिताब अपने नाम किया. उनके 10 राउंड का सफर कुछ इस प्रकार रहा:
पहला राउंड- वेसेलि सो से ड्रॉ - 1.5 अंक
दूसरा राउंड - अलीरेजा फिरोउजा से हारे - 0 अंक
तीसरा राउंड - मैग्नस कार्लसन से जीते - 3 अंक
चौथा राउंड - विंसेंट केइमर से ड्रॉ - 1.5 अंक
पांचवां राउंड - डी गुकेश से हारे - 0 अंक
छठा राउंड - वेसेलि सो से हारे - 0 अंक
सातवां राउंड - अलीरेजा फिरोउजा से जीते - 3 अंक
आठवां राउंड - मैग्नस कार्लसन से जीते - 3 अंक
नौवां राउंड - डी गुकेश से जीते - 3 अंक
दसवां राउंड - विंसेंट केइमर से जीते - 3 अंक
इस तरह प्रज्ञा ने टूर्नामेंट में चार लगातार जीत के साथ कुल 5 मैच जीते और दो ड्रॉ किये. इस तरह 18 अंक लेकर वो सबसे आगे रहे और चैंपियन बन गए.
वैभव सूर्यवंशी के नाम के सहारे स्ट्रेस दूर किया
25 मई से 5 जून तक चलने वाले इस बेहद तनावपूर्ण टूर्नामेंट में कोच वैभव सूरी, ग्रैंडमास्टर प्रज्ञा के लिए कबोन (आधार) बने रहे. उनके लिए शानदार होमवर्क कर रणनीति बनाते रहे. विपक्षी खिलाड़ियों की कमियों और उनके मैच डिटेल्स पर काम करते रहे. इस दौरान GM प्रज्ञानंद का स्ट्रेस दूर करने के लिए वो उनके साथ टहलने निकल जाते, हल्की-फुल्की पॉलिटिक्स और कई बार दूसरे खेलों के बारे में भी बात करते.
प्रज्ञा की नजर आईपीएल पर और खासकर वैभव सूर्यवंशी पर भी रही. वो अपने कोच वैभव ‘सूरी' के टाइटल और वैभव सूर्यवंशी का टाइटल मिलाते और कोच को छेड़ते भी रहे.
प्रज्ञा की शरारत और छेड़छाड़ ने उनपर दबाव नहीं बनने दिया. कोच वैभव सूरी पूर्व वर्ल्ड कप उपविजेता, पूर्व एशियाड उपविजेता, ओलिंपियाड गोल्ड मेडल विजेता प्रज्ञा के लिए ये बहुत बड़ी कामयाबी है.
दुनिया के सबसे युवा इंटरनेशनल मास्टर (10 साल, 10 महीने, 19 दिन में बने) का रिकॉर्ड बनाने वाले रमेशबाबू प्रज्ञानंद ने अपने नाम एक बेहद इलीट और सम्मानित नॉर्वे चेस का खिताब अपने नाम कर भारतीय चेस का दबदबा एक बार फिर दुनिया को साबित कर दिया है.
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