Commonwealth Games 2026: उम्र सिर्फ एक संख्या होती है, अगर इरादे मजबूत हों तो बड़ी से बड़ी चुनौती भी छोटी पड़ जाती है. भारतीय लॉन बॉल्स खिलाड़ी पुतुल सोनोवाल ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कुछ ऐसा ही कर दिखाया. 43 साल की उम्र में पहली बार राष्ट्रमंडल खेलों में उतरे सोनोवाल ने अपने पहले ही मुकाबले में कनाडा के वर्ल्ड चैंपियन रयान बेस्टर को हराकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. स्कॉटिश इवेंट कैंपस में खेले गए पुरुष सिंगल्स सेक्शनल मुकाबले में दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली. सोनोवाल ने पहला सेट 5-4 से अपने नाम किया, लेकिन बेस्टर ने दूसरे सेट में 7-3 से वापसी कर मुकाबला बराबरी पर ला दिया. इसके बाद फैसला टाई-ब्रेक में हुआ, जहां भारतीय खिलाड़ी ने दबाव को बखूबी संभालते हुए यादगार जीत दर्ज की.
'वर्ल्ड चैंपियन को हराना आसान नहीं था'
मैच के बाद सोनोवाल ने कहा कि यह जीत उनके करियर की सबसे खास उपलब्धियों में से एक है. उनके मुताबिक, वर्ल्ड चैंपियन जैसे अनुभवी खिलाड़ी के खिलाफ जीत हासिल करना आसान नहीं था, इसलिए उन्होंने पूरे मुकाबले के दौरान अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की.
बर्मिंघम के बाद बदली लॉन बॉल्स की तस्वीर
सोनोवाल का मानना है कि भारत में लॉन बॉल्स की पहचान बनाने में कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 की बड़ी भूमिका रही. बर्मिंघम में भारतीय महिला फोर्स टीम ने ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीता था, जबकि पुरुष फोर्स टीम ने रजत पदक अपने नाम किया था. उसी प्रदर्शन के बाद देश में इस खेल को नई पहचान मिली.
उन्होंने कहा कि पहले बहुत कम लोग जानते थे कि लॉन बॉल्स क्या होता है, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है और खिलाड़ियों को भी बेहतर समर्थन मिलने लगा है.
महिला टीम की भी तारीफ
सोनोवाल ने भारतीय महिला टीम के प्रदर्शन की भी तारीफ की. उन्होंने कहा कि माल्टा को हराकर अगले दौर में पहुंचना टीम के आत्मविश्वास को और मजबूत करेगा. उनके मुताबिक, अगर यही लय बरकरार रही तो भारत इस बार भी लॉन बॉल्स में पदक जीत सकता है.
अब मेडल पर नजर
मौजूदा एशियाई चैंपियन पुतुल सोनोवाल को भरोसा है कि भारत का प्रदर्शन इस बार भी शानदार रहेगा. उनका कहना है कि अगर लगातार अच्छे नतीजे मिलते रहे तो लॉन बॉल्स देश में और लोकप्रिय होगा और आने वाले वर्षों में ज्यादा युवा खिलाड़ी इस खेल को अपनाएंगे. 43 साल की उम्र में कॉमनवेल्थ गेम्स का पहला मुकाबला खेलते हुए वर्ल्ड चैंपियन को हराना सिर्फ एक जीत नहीं, बल्कि भारतीय लॉन बॉल्स के लिए बड़ा संदेश भी है अब यह खेल भी देश में अपनी अलग पहचान बना रहा है.
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