Mirabai Chanu Instagram Post Viral, CWG 2026: भारत की भारोत्तोलन क्वीन मीराबाई चानू ने ग्लासगो में आयोजित 2026 राष्ट्रमंडल खेलों में देश के लिए पहला स्वर्ण पदक जीतने के बाद अपनी खुशी जाहिर की है. उन्होंने कहा कि मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और जो कुछ भी कर सकती थी, वह सब किया. मुझे खुशी है कि मैंने इन खेलों में भारत के लिए पहला गोल्ड मेडल जीता है. मीराबाई चानू ने ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में स्नैच में 85 किलोग्राम वजन उठाकर नया रिकॉर्ड बनाया. साथ ही, उन्होंने भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता.
इंस्टाग्राम पर मीराबाई चानू का भावुक पोस्ट
मैं अपने प्रदर्शन से खुश हूं और लगातार तीसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर बहुत गर्व और विनम्रता महसूस कर रही हूं. यह मेरा चौथा कॉमनवेल्थ गेम्स है, इसलिए यह उपलब्धि और भी खास हो जाती है.
मुझे याद है कि जब एरिना में राष्ट्रगान के साथ हमारा तिरंगा फहराया गया, तो वह पल बहुत भावुक कर देने वाला था. उस समय मुझे एहसास हुआ कि मैंने अपनी मां और कोच विजय सर से किया हुआ वादा पूरा कर दिया है कि मैं फिर से गोल्ड मेडल जीतूंगी.
मैं अपने कोच विजय सर, पूरी सपोर्ट टीम, वेटलिफ्टिंग फेडरेशन ऑफ़ इंडिया, युवा मामले और खेल मंत्रालय, स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI), OGQ, इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन, IOS, स्पॉन्सर्स और उन सभी भारतीयों का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं जो इस सफर में मेरे साथ खड़े रहे. उनके अटूट समर्थन और भरोसे ने मुझे देश के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए हमेशा प्रेरित किया है.
मेरी मां और पूरे परिवार का भी खास शुक्रिया, जो कॉम्पिटिशन के दौरान मेरे लिए लगातार प्रार्थना करते रहते हैं.
इससे पहले आईएएनएस से बात करते हुए मीराबाई चानू ने कहा, "हर खिलाड़ी का सपना कॉमनवेल्थ गेम्स में जाने का रहता है. ये गेम्स हमारे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं, ताकि हम देश के लिए कुछ करके दिखाएं. हर प्रतियोगिता में दबाव होता है, लेकिन हमें उसे संभालना होता है. यह मेरे लिए खास तौर पर अहम था क्योंकि मैं वेटलिफ्टिंग में अच्छा प्रदर्शन करना चाहती थी और भारत के लिए मेडल जीतना चाहती थी. मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और जो कुछ भी कर सकती थी, वह सब किया. मुझे खुशी है कि मैंने इन खेलों में भारत के लिए पहला गोल्ड मेडल जीता है."
उन्होंने आगे कहा, "मैं असल में कोई रिकॉर्ड तोड़ने के बारे में नहीं सोच रही थी क्योंकि 48 किलोग्राम वर्ग अब कॉमनवेल्थ गेम्स का हिस्सा नहीं रहेगी. मेरा ध्यान अपने प्रदर्शन पर था और यह समझने पर कि एशियाई खेलों से पहले मुझे किन सुधारों की जरूरत है."
मीराबाई चानू ने यह भी बताया कि उनके कोच ने बोला कि ये करना है, तो मैंने बोला कि ठीक है मैं कर लूंगी, लेकिन रिकॉर्ड के लिए मैंने इतना नहीं सोचा था. यह खुशी की बात है कि रिकॉर्ड बना और इस तरह रिकॉर्ड बनना खिलाड़ियों के लिए खुशी की बात होती है.
उन्होंने कहा, "मैं खुशी से भर गई थी. ट्रेनिंग के दौरान मुझे कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिनमें चोटें और कई मुश्किल दौर शामिल थे. पोडियम पर खड़े होकर मुझे वे सभी त्याग याद आ गए. जब हमारी मेहनत रंग लाती है और राष्ट्रगान बजता है, तो स्वाभाविक रूप से आंखों में आंसू आ जाते हैं. आज जो आंसू मेरी आंखों से निकले, वे खुशी के आंसू थे."
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