भारतीय टीमों की जर्सी का रंग बदले जाने के बाद हॉकी इंडिया में चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा और अध्यक्ष दिलीप टिर्की द्वारा दी गई समय सीमा के भीतर कार्यकारी निदेशक कमांडर आर के श्रीवास्तव ने जवाब नहीं भेजा है जबकि हॉकी इंडिया महासचिव ने कार्यकारी बोर्ड की आपात बैठक बुलाने की मांग की है. टिर्की ने मंगलवार को लगातार दूसरे दिन भेजे गए ईमेल में श्रीवास्तव से शाम पांच बजे तक यह संबंधित दस्तावेज देने के लिये कहा था. उन्होंने दोपहर में भेजे गए ईमेल में कहा था,"इस मामले में कमांडर द्वारा कार्यकारी बोर्ड के समक्ष रखे गए स्पष्टीकरण के संदर्भ में यह स्पष्ट किया जाता है कि दस्तावेजी सबूतों के साथ जवाब देने का निर्देश लागू है और इसे वापिस नहीं लिया गया है."
इसमें कहा गया,"कमांडर को आज शाम तक सभी सहायक दस्तावेज जमा करने होंगे. हॉकी इंडिया की प्रतिष्ठा और इसकी प्रशासनिक प्रक्रियाओं की ईमानदारी से कोई समझौता नहीं किया जा सकता. कार्यकारी बोर्ड के समक्ष रखे गए मसलों का सत्यापन सबूतों के साथ करना जरूरी है लिहाजा निर्धारित समय सीमा के भीतर यह सुनिश्चित करें."
इससे पहले कल भेजे गए ईमेल में उन्होंने स्पष्टीकरण मांगा था कि जर्सी का रंग बदलने के लिये प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं और इसके बारे में कार्यकारी बोर्ड या अध्यक्ष से मशविरे की जरूरत क्यो नहीं समझी गई. सूत्रों के अनुसार शाम पांच बजे तक की समय सीमा तक श्रीवास्तव की ओर से कोई जवाब नहीं भेजा गया. हॉकी इंडिया के कार्यकारी बोर्ड के कुछ सदस्यों ने भी इस मसले पर त्वरित कार्रवाई की मांग की थी.
सूत्र ने बताया,"शाम पांच बजे तक की समय सीमा तक हॉकी इंडिया अध्यक्ष को कोई स्पष्टीकरण कमांडर श्रीवास्तव की तरफ से नहीं दिया गया है. वहीं महासचिव भोलानाथ सिंह ने समय सीमा बीत जाने के बाद दिलीप टिर्की को पत्र लिखकर कार्यकारी बोर्ड की आपात बैठक तुरंत बुलाने के लिये कहा है." सूत्र ने कहा,"भोलानाथ सिंह ने अध्यक्ष को ईमेल भेजकर कहा है कि अलग अलग मसलों पर पिछले कई दिनों से आपकी ओर से कई ईमेल आये हैं. सभी मसलों को एक साथ कार्यकारी बोर्ड में रखने की जरूरत है और इसलिये कार्यकारी बोर्ड की आपात बैठक बुलाई जानी चाहिये."
नीदरलैंड और बेल्जियम में 15 अगस्त से शुरू हो रहे विश्व कप से पहले यह विवाद खड़ा हुआ जब भारतीय टीम की जर्सी का रंग नीले से केसरिया कर दिया गया. पूर्व कप्तान वीरेन रासकिन्हा, विश्व कप विजेता पूर्व कप्तान अजित पाल सिंह, धनराज पिल्लै, परगट सिंह ने इस पर आपत्ति जताई थी. हॉकी इंडिया ने तकनीकी कारणों का हवाला देकर कहा था कि नीली टर्फ पर खेलते समय दृश्यता की समस्या से निपटने के लिये यह फैसला लिया गया. वहीं टिर्की ने कहा कि उनकी और कार्यकारी बोर्ड की पूर्व जानकारी के बिना यह फैसला लिया गया था.
टिर्की ने एक अन्य ईमेल में कल हॉकी इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ उत्पीड़न और दुर्व्यवहार की शिकायतों पर हॉकी इंडिया की अंतरिम शिकायत समिति (आईसीसी) से चार अगस्त को सुबह 11 बजे तक जांच रिपोर्ट का ब्यौरा मांगा था. इसमें संबंधित अधिकारी के खिलाफ जांच समिति की कार्रवाई का पूरा रिकॉर्ड, बैठकों का हस्ताक्षर सहित विवरण और प्रक्रिया का ब्यौरा मांगा गया था.
सूत्रों के अनुसार सोमवार तक तीन रिमाइंडर भेजे जाने के बावजूद यह ब्यौरा भी नहीं दिया गया जबकि अधिकारी के खिलाफ भारतीय हॉकी के इकोसिस्टम में शामिल महिलाओं ने गंभीर आरोप लगाये हैं. अप्रैल में इस अधिकारी के खिलाफ गुमनाम शिकायतें मिली थी और अगले दो सप्ताह में कई महिलाओं ने इन शिकायतों की पुष्टि की थी. मई में टिर्की ने कार्यकारी बोर्ड को पत्र लिखकर उत्पीड़न के बढते मामलों पर चिंता जताई थी. जून में मामले की जांच के लिये समिति के गठन की बात हुई लेकिन अभी तक समिति का गठन नहीं हुआ है.
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