F1 to return to India: ज़िप, ज़ैप, ज़ूम... भारत में 2011 से 2014 तक तक दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा के बुध इंटरनेशनल सर्किट पर फ़र्राटा भागती फ़ॉर्मूला वन या F1 की रफ़्तार ने करोड़ों भारतीयों को ज़रूर रोमांचित किया था. इस खेल को जानने-समझने वालों के लिए इसका अचानक थम जाना एक बहुत बड़े झटके जैसा था. मगर रेसिंग कार के दीवानों के लिए अंतज़ार अब लंबा नहीं होने वाला है. एक बार फिर रेसिंग कारों की रफ़्तार फ़ैन्स को रोमांचित करनेवाली हैं.
F1 के लिए टास्क फ़ोर्स बनाएगा प्लान
खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने आज पत्रकारों को एक अनौपचारिक बातचीत में बताया कि वो फिर से कैसे भारत में फॉर्मूला वन लाने की योजना पर काम कर रहे हैं. 4-5 स्टेकहोल्डर्स के साथ एक डेडिकेटेड टास्क फ़ोर्स बनाया जा रहा है जो तकरीबन तीन-चार महीने में इसका प्लान भी तैयार कर देगा. ये टास्क फ़ोर्स भारत में मोटरस्पोर्ट इवेंट आयोजित करने और उससे जुड़ी चुनौतियों के सभी पहलुओं का अध्ययन करेगा.
भारत में F1 के फ़ायदे
खेलमंत्री मनसुख मांडविया ने कहा भारत में F1 लाने के कई फ़ायदे हैं. साल में F1 की 24 अंतर्राष्ट्रीय रेस और इसके अलावा इसकी अलग-अलग स्तर पर देश में होने वाली छोटी-बड़े रेस साल भर भारतीय मोटरस्पोर्ट फ़ैन्स को व्यस्त रख सकते हैं. खेलमंत्री ने ये भी कहा कि इसके विभिन्न पहुलों पर शुरुआती बातचीत के लिए एक बड़ी बेठक की जा चुकी है जिसमें अदाणी ग्रुप, फ़ेडरेशन, खेल से जुड़े लोग और कुछ खिलाड़ी भी शामिल रहे. खेल मंत्री का मानना है कि इस खेल के इको सिस्टम और इस खेल की आर्थिकी से देश को बड़ा फायदा पहुंचेगा. उनका मानना है कि इससे भारत में टूरिज़्म को भी फ़ायदा होगा.
क्या है भारत में F1 को लेकर प्लान?
खेलमंत्री ने बताया कि ये टास्क फ़ोर्स मोटरस्पोर्ट् इवेंट की मेजबानी से होने वाले अंतर्राष्ट्रीय, आर्थिक और टूरिज़्म के फ़ायदों का आकलन भी करेगा. डेडिकेटेड टास्क फ़ोर्स मोटरस्पोर्ट् के विकास के लिए आवश्यक प्राथमिक जरूरतें, इंफ़्रास्ट्रक्चर की ज़रूरतें और ऑपरेशनल ज़रूरतों की पहचान कर अपनी रिपोर्ट खेल मंत्रालय को सौपेगी. इस रिपोर्ट के आधार पर भारत में मोटरस्पोर्ट्स के प्रोमोशन और विकास के लिए एक विस्तृत पॉलिसी फ़्रेमवर्क तैयार किया जाएगा. भारत के बड़े मोटरस्पोर्ट्स फ़ैन बेस को ध्यान में रखते हुए इस खेल के विस्तार और विकास को बढ़ावा दिया जाएगा.
देश भर में छोटे और क्षेत्रीय मोटरस्पोर्ट सेंटर को प्रोत्साहन और सहायता दी जाएगी. पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप- PPP मॉडल के माध्यम से इसे लागू करने के लिए एक स्ट्रक्चर्ड फ्रेमवर्क विकसित किया जाएगा. मोटरस्पोर्ट्स ‘प्ले इन इंडिया' पहल का एक अहम हिस्सा बनाया जाएगा. इस पूरी प्रक्रिया को अलग-अलग फ़ेज में स्टेप-बाई-स्टेप लागू किया जाएगा. मोटरस्पोर्ट के विकास के लिए भारत सरकार का पूरा सहयोग प्रदान किया जाएगा.
भारत में F1 का अनुभव
भारत में ग्रेटर नोएडा के बुध इंटरनेश्नल सर्किट पर 2011 से लेकर 2014 तक तीन F1 रेसें आयोजित की गईं. इसके दीवानों की संख्या लगातार बढ़ती दिखी. भारतीय फ़ैन्स ने यहां हुए F1 में सेबैस्टियन वेटल जैसे सुपरस्टार का जलवा भी देखा. हरेक फ़ॉर्मूला वन रेस को आयोजित करने में 70 मिलियन डॉलर से लेकर 150 मिलियन डॉलर यानी 650 करोड़ से लेकर तकरीबन 1500 करोड़ रुपये तक की रकम खर्च होती है. लेकिन इसके कामयाब आयोजन से अर्थव्यवस्था समेत कई स्तर पर फ़ायदे हो सकते हैं. यही वजह है कि खेलमंत्री फ़ास्ट ट्रैक तरीके से भारत में F1 का ट्रैक दुरुस्त करने की योजना बना रहे हैं.
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