मालदीव में स्कूबा डाइविंग के दौरान दिनेश सौंदप्पा को समुद्री के अंदज का जीवन इतना हैरान कर गया कि उन्होंने फ्रीडाइविंग को पेशेवर तौर पर करना शुरू किया. अब वह ना सिर्फ फ्रीडाइविंग कोच है बल्कि इस स्पोर्ट्स में भारत के नेशनल रिकॉर्ड होल्डर भी. दिनेश सौंदप्पा के नाम वेरिएबल वेट कैटेगरी में 34.5 मीटर का रिकॉर्ड है. जब उन्होंने यह रिकॉर्ड बनाया तो उन्हें इसका अंदाजा भी नहीं थी. एनडीटीवी से बात करते हुए दिनेश कहते हैं कि वह काफी खुश हैं. दिनेश ने अपना यह रिकॉर्ड अपनी मां को समर्पित किया है. एनडीटीवी से बात करते हुए दिनेश ने कहा कि फ्रीडाइविंग उनके लिए दवा की तरह काम करती है.
क्या है फ्रीडाइविंग
फ्रीडाइविंग समुद्र की गहराइयों को बहुत ही प्राकृतिक और शांत तरीके से देखने का तरीका है. यह आपको आज़ादी का अहसास करवाता है और समुद्र की खूबसूरती व शांति का मज़ा लेने के लिए ज़्यादा समय देता है. जिस किसी ने भी पानी के अंदर सांस रोककर रखी है, उसने फ्रीडाइविंग की है. हालांकि, यह सिर्फ इतनी भर नहीं है.
फ्रीडाइविंग सिर्फ़ यह नहीं है कि आप कितनी देर तक सांस रोक सकते हैं या एक सांस में कितना गहरा जा सकते हैं. इसके लिए सही मानसिकता बनानी पड़ती है और अपने शरीर व दिमाग की सीमाओं का ध्यान रखना पड़ता है. फ्रीडाइविंग की असली खूबसूरती उस शांति और सुकून में है, जो यह लोगों की व्यस्त ज़िंदगी में लाती है. शरीर और दिमाग दोनों को शांत रखना पड़ता है.
दुनिया भर में होती है प्रतियोगिता
कुछ लोग फ्रीडाइविंग रिलैक्स होने या मनोरंजन के लिए करते हैं, लेकिन यह एक खेल भी है और इसमें कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं भी होंती है. पेशेवर फ्रीडाइवर एक ही सांस में 50 मीटर से अधिक की गहराई तक जा सकते हैं. 1992 से AIDA दुनिया भर में फ्रीडाइविंग प्रतियोगिताओं का आयोजन कर रहा है, जिससे यह खेल सुरक्षित होने के साथ-साथ पहले की तरह ही प्रतिस्पर्धी बना हुआ है. फ्रीडाइविंग में कई कैटेगरी होती है. वेरिएबल वेट, नो लिमिट्स, कॉन्स्टेंट वेट, डायनेमिक अप्निया, स्टैटिक अप्निया,
कोच की होती है अहम भूमिका
दिनेश सौंदप्पा ने बताया कि कोच की इसमें काफी भूमिका होती है और यह जरूरी है कि आपका अपने कोच के साथ तालमेल अच्छा हो. क्योंकि पानी के अंदर जाने के बाद आप सिर्फ और सिर्फ कोच पर भरोसा करते हैं. दिनेश अपने कोच का शुक्रिया अदा करते हैं.
मेडिटेशन से मिलती है मदद
दिनेश बताते हैं कि अगर आप आंखे खोलकर देखते हैं तो आपका शरीर उसमें भी ऑक्सीजन इस्तेमाल करता है. वहीं पानी के जितना अंदज आप जाते हैं प्रेशर बढ़ता है और आपके लंग्स में ऑक्सीजन की मात्रा हर 10 मीटर पर कम होने लगती है, जिससे आपको ऑक्सीजन को जरूरी अंगों के लिए बचाकर रखना होता है. ऐसे में आपके दिमाग को पूरी तरह से शाांत रखता पड़ता है और ट्रेनिंग के दौरान मेडिटेशन इसमें अहम भूमिका निभाता है.
दिनेश जानकारी देते हैं कि आम व्यक्ति की हार्टबीट 75/80 होती है लेकिन फ्रीडाइविंग के दौरान डाइवर की हार्टबीट 40/50 हो जाती है. दिनेश बिना किसी उपकरण के और कम से कम उपकरणों के साथ समुद्र के अंदर के जीवन को करीब से देखना चाहते हैं.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं