Vinesh Phogat: रेसलर विनेश फोगाट को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने एशियन गेम्स के सिलेक्शन ट्रायल में रेसलर विनेश फोगाट को हिस्सा लेने की इजाज़त दे दी है. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है और कुश्ती संघ (WFI) की याचिका पर नोटिस जारी किया है. अब 1 जून को आगे की सुनवाई की जाएगी. बता दें कि भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था. WFI ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें ओलंपियन पहलवान विनेश फोगाट को 2026 के एशियाई खेलों के लिए होने वाले चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति दी गई थी. ये ट्रायल शनिवार को नई दिल्ली में होने हैं. अपनी स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) में, WFI ने 22 मई के दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीज़न बेंच के आदेश को "प्रथम दृष्टया अवैध" बताया था. WFI ने दलील दी थी कि विनेश के पक्ष में निर्देश जारी करने से पहले, महासंघ को विस्तृत जवाब दाखिल करने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया.
महासंघ ने संकेत दिया था कि अगर फोगाट ट्रायल्स के जरिए क्वालीफाई भी कर लेती हैं, तो भी लॉजिस्टिक्स से जुड़ी दिक्कतें आ सकती हैं, क्योंकि इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों की सूची इस महीने की शुरुआत में ही जापान भेजी जा चुकी है.संघ की तरफ से यह भी कहा गया था कि अगर किसी तरह हम उन्हें एक 'आइकॉनिक खिलाड़ी' के तौर पर टीम में शामिल कर भी लेते हैं, तो उन्हें 50 किलोग्राम वर्ग में ही मुकाबला करना होगा.
दूसरी ओर एशियन गेम्स का सिलेक्शन का ट्रायल 30 और 31 मई को होना है.
बता दें कि विनेश ने 2023 में डब्ल्यूएफआई के तत्कालीन अध्यक्ष और भाजपा नेता बृज भूषण शरण सिंह के खिलाफ कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर महिला पहलवानों के धरने में भाग लिया था. उन्हें पेरिस ओलंपिक 2024 में 50 किलो वर्ग के फाइनल के दिन निर्धारित भारवर्ग से सौ ग्राम वजन अधिक पाये जाने के कारण अयोग्य करार दिया गया था जिसके बाद उन्होंने कुश्ती से संन्यास का ऐलान किया था.
सुनवाई के दौरान जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा ने कहा हमारे हाईकोर्ट के फैसले पर कुछ सवाल है. दिसंबर 2024 में फोगाट ने खेल से अस्थायी ब्रेक लिया था और कहा था कि वह अगस्त 2025 में वापसी करेंगी. जुलाई 2025 में मां बनने के बाद उन्होंने WFI को सूचित किया कि वह 1 जनवरी 2026 से ही चयन के लिए पात्र होंगी. जनवरी 2026 में वह डोपिंग टेस्ट के लिए उपस्थित नहीं हुईं. इंटरनेशनल टेस्टिंग एजेंसी (ITA) ने उनका यह स्पष्टीकरण स्वीकार नहीं किया कि वह उस समय हरियाणा विधानसभा में MLA के रूप में मौजूद थीं. वहीं WFI ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने चयन नीति में हस्तक्षेप करते हुए गलत राहत दी. वहीं, हाईकोर्ट ने पहले कहा था कि मातृत्व अवकाश के बाद लौटने वाली खिलाड़ियों के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए.
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