- मुंबई तटीय सड़क पर देश की पहली म्यूजिकल रोड का उद्घाटन महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किया.
- सड़क पर बने विशेष खांचों से 70-80 किमी प्रति घंटे की गति पर ऑस्कर-विजेता गीत ‘जय हो’ की धुन उत्पन्न होती है.
- यह म्यूजिकल रोड जापान, हंगरी, दक्षिण कोरिया और यूएई के बाद विश्व में पांचवीं और भारत की पहली है.
भारत ने शहरी ढांचे और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर छू लिया है. मुंबई तटीय सड़क (Coastal Road) पर बुधवार को देश की पहली ‘म्यूजिकल रोड' का शुभारंभ किया गया, जो निर्धारित गति से गुजरने पर ऑस्कर-विजेता गीत ‘जय हो' की धुन बजाती है. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस अनोखे प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया. कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और शिवसेना के पूर्व सांसद राहुल शेवाले भी उपस्थित रहे.
कैसे बजती है सड़क पर ‘जय हो' की धुन?
नरीमन प्वाइंट से वर्ली की ओर जाते हुए, तटीय सड़क पर बने भूमिगत सुरंग (टनेल) से बाहर निकलने के बाद सड़क की पहली लेन में करीब 500 मीटर का विशेष खंड बनाया गया है. यहां सड़क पर बेहद सटीक माप में बने विशेष खांचे (Rumble Strips) पर जब वाहन 70-80 किमी/घंटा की रफ़्तार से गुजरते हैं, तो टायरों और इन खांचों के घर्षण से उत्पन्न कंपन ‘जय हो' की धुन में बदल जाते हैं. अधिकारी बताते हैं कि यह संगीत बंद खिड़कियों के अंदर भी स्पष्ट सुनाई देता है.
BMC ने लगाए साइन बोर्ड
बीएमसी ने सुरंग के भीतर और उसके आगे 500 मीटर, 100 मीटर और 60 मीटर पहले साइनबोर्ड लगाए हैं, ताकि ड्राइवर गति को सुरक्षित रूप से समायोजित कर सकें और संगीत का अनुभव बिना अचानक ब्रेक लगाए ले सकें.
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विश्व में पांचवीं, भारत में पहली म्यूज़िकल रोड
मुंबई की यह म्यूजिकल रोड दुनिया की केवल पांचवीं ऐसी सड़क है. इससे पहले यह टेक्नोलॉजी जापान, हंगरी, दक्षिण कोरिया और यूएई में इस्तेमाल की जा चुकी है. मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि यह परियोजना हंगेरियन तकनीक पर आधारित है और यदि यह सफल रहती है तो इसे शहर व राज्य के अन्य हिस्सों में भी दोहराया जाएगा.
कहां से आया यह कॉन्सेप्ट?
म्यूजिकल रोड की अवधारणा सबसे पहले 2007 में जापान में उभरी. इंजीनियर शिज़ुओ शिनोडा ने पाया कि सड़क पर बने ग्रूव्स से गाड़ी के पहिए गुजरते समय एक विशेष धुन उत्पन्न होती है. बाद में इस तकनीक को और विकसित कर कई देशों में लागू किया गया.
भारत में कौन लाया ये आइडिया
मुंबई की इस परियोजना को पूर्व सांसद राहुल शेवाले ने प्रस्तावित किया था, जिसे बीएमसी ने हंगेरियन विशेषज्ञों की तकनीकी मदद से करीब ₹6.21 करोड़ की लागत में क्रियान्वित किया है. बीएमसी अधिकारियों ने ‘जय हो' को राष्ट्रभावना और उत्साह जगाने वाला गीत बताते हुए इसे चुनने का कारण बताया.
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क्या है इस सड़क का महत्व?
10.5 किमी लंबी मुंबई कोस्टल रोड पहले ही दक्षिण मुंबई और पश्चिमी उपनगरों के बीच यात्रा समय को काफी कम कर चुकी है. संगीत वाला यह खंड इस महत्वपूर्ण मार्ग में एंटरटेनमेंट और इंजीनियरिंग का दुर्लभ संगम जोड़ता है.
BMC अधिकारियों के अनुसार, यह सुविधा न सिर्फ यात्रियों को नया अनुभव देगी, बल्कि सड़क पर गति स्थिर रखने में भी सहायक हो सकती है, जिससे अचानक ब्रेक लगाने की घटनाएं कम होंगी और ट्रैफिक का प्रवाह बेहतर रहेगा.
'सरप्राइज मिल गया'
सोशल मीडिया पर इस अनोखी तकनीक को लेकर उत्सुकता और खुशी दिख रही है. नरीमन प्वाइंट से वर्ली की ओर यात्रा करने वाली मोटर चालक निवेदिता गुप्ता ने अपने अनुभव को सुरीला और रोमांचक बताया. उन्होंने कहा, 'सुरंग से बाहर निकलते ही जब ‘जय हो' सुनाई दिया, तो लगा जैसे रोज की ड्राइव में एक दिलचस्प सरप्राइज़ मिल गया.'
यह इनोवेशन जल्द ही अन्य भारतीय शहरों में भी लागू किया जा सकता है, यदि इसका परिणाम सकारात्मक रहा.
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं