मुंबई:
मुंबई पुलिस ने 3 महीने के बच्चे के अपहरण की हैरान कर देने वाली गुत्थी सुलझाई है. बिलकुल किसी फिल्म की तरह ये कहानी ड्रामा, इमोशन और सस्पेंस से भरी है. मुंबई में फ़ैशन स्ट्रीट के पास झोपड़े में रहने वाली संजना बोबडे के पास 5 दिन पहले उसकी सहेली के साथ सनी वाघेला नाम का शख्स आया. उसने बताया कि वो एक फिल्म बना रहा है जिसमें नवजात शिशु की जरूरत है.
15 हजार रुपये और सिनेमा में बच्चे की झलक दिखने के लालच में संजना ने उस अनजान शख्स को अपना बच्चा 3 घंटे के लिए सौंप दिया. शक ना हो इसलिए सनी वाघेला ने अपने एक साथी पंकज को महिला के पास ही रखा था. लेकिन खाने के लिए 2 हजार रुपये पकड़ाकर वो अभी आता हूं कहकर जो गया तो वापस ही नहीं आया. संजना के मुताबिक उसने जब उससे पूछा कि कहां जा रहे हो तो उसने बताया कि हगीज लेने जा रहा है. 'जब कई घंटे बाद भी वो नहीं आया तो मैं समझ गई कि मेरे बच्चे का अपहरण हो गया है.'
संजना ने उसी दिन आजाद मैदान पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. शिकायत मिलते ही पुलिस के साथ क्राइम ब्रांच यूनिट-1 ने भी जांच शुरू की. सबसे पहले आसपास के सीसीटीवी खंगाले गये लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. फिर शुरू हुई उस दिन और उस समय वहां के फोन कॉल खंगालने की प्रक्रिया. तक़रीबन डेढ़ लाख फोन नंबरों की पड़ताल के बाद 4 से 5 फ़ोन नंबरों पर जांच केंद्रित हुई और फिर उन नंबरों में से एक के व्हाट्सऐप डीपी पर लगी तस्वीर से आरोपी की शिनाख्त हो गई.
मुंबई पुलिस के प्रवक्ता डीसीपी अशोक दुधे के मुताबिक सनी तो पकड़ा गया लेकिन वो 3 महीने का मासूम उसके पास नहीं मिला. पता चला कि उसने तो उसे एक अस्पताल में काम करने वाली महिला को 40 हजार रुपये में बेच दिया है.
मासूम बच्चे के अपहरण की इस कहानी में अभी और एक बड़ा खुलासा होना बाकी था. पुलिस जब उस महिला के घर पहुंची तो उसके पति ने बताया कि वो तो उसका अपना बेटा है. दरसअल 2 बेटियों की मां पर एक बेटा जनने का दबाव था. उसके लिए उसने गर्भवती होने का स्वांग रच 40 हजार रुपये में बेटा खरीदने की साजिश रची थी.
15 हजार रुपये और सिनेमा में बच्चे की झलक दिखने के लालच में संजना ने उस अनजान शख्स को अपना बच्चा 3 घंटे के लिए सौंप दिया. शक ना हो इसलिए सनी वाघेला ने अपने एक साथी पंकज को महिला के पास ही रखा था. लेकिन खाने के लिए 2 हजार रुपये पकड़ाकर वो अभी आता हूं कहकर जो गया तो वापस ही नहीं आया. संजना के मुताबिक उसने जब उससे पूछा कि कहां जा रहे हो तो उसने बताया कि हगीज लेने जा रहा है. 'जब कई घंटे बाद भी वो नहीं आया तो मैं समझ गई कि मेरे बच्चे का अपहरण हो गया है.'
संजना ने उसी दिन आजाद मैदान पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. शिकायत मिलते ही पुलिस के साथ क्राइम ब्रांच यूनिट-1 ने भी जांच शुरू की. सबसे पहले आसपास के सीसीटीवी खंगाले गये लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. फिर शुरू हुई उस दिन और उस समय वहां के फोन कॉल खंगालने की प्रक्रिया. तक़रीबन डेढ़ लाख फोन नंबरों की पड़ताल के बाद 4 से 5 फ़ोन नंबरों पर जांच केंद्रित हुई और फिर उन नंबरों में से एक के व्हाट्सऐप डीपी पर लगी तस्वीर से आरोपी की शिनाख्त हो गई.
मुंबई पुलिस के प्रवक्ता डीसीपी अशोक दुधे के मुताबिक सनी तो पकड़ा गया लेकिन वो 3 महीने का मासूम उसके पास नहीं मिला. पता चला कि उसने तो उसे एक अस्पताल में काम करने वाली महिला को 40 हजार रुपये में बेच दिया है.
मासूम बच्चे के अपहरण की इस कहानी में अभी और एक बड़ा खुलासा होना बाकी था. पुलिस जब उस महिला के घर पहुंची तो उसके पति ने बताया कि वो तो उसका अपना बेटा है. दरसअल 2 बेटियों की मां पर एक बेटा जनने का दबाव था. उसके लिए उसने गर्भवती होने का स्वांग रच 40 हजार रुपये में बेटा खरीदने की साजिश रची थी.
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