प्रतीकात्मक फोटो
- कुल 1008 करोड़ रुपये की लागत से 20 माह में पूरा हुआ प्रोजेक्ट
- शहर में 1510 स्थानों पर 4717 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए
- मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, शहर को तीसरी आंख मिली
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मुंबई:
मुंबई शहर अब सीसीटीवी की निगरानी में आ गया है. शहर की सवा करोड़ आबादी की सुरक्षा मजबूत करने के लिए कुल 1008 करोड़ रुपये की लागत से लगभग 20 महीनों में इस प्रोजेक्ट को पूरा किया गया है. सरकार का दावा है कि कैमरे के जाल से कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अपराध रोकने में मदद मिलेगी.
वर्ष 2006 के ट्रेन बम धमाकों में मुंबई लहूलुहान हो गई थी. 209 लोगों की मौत हुई, लेकिन शुरू में आतंकियों का कुछ पता नहीं लगा क्योंकि शहर के पास सीसीटीवी नेटवर्क नहीं था. 26/11 हमले में कसाब और उसके साथियों ने एक बार फिर शहर को गहरे जख्म दिए लेकिन पांच सितारा होटल में लगे सीसीटीवी के अलावा उनके आतंक की तस्वीरें सड़क पर लगे कैमरों में कैद नहीं हुईं. अब शायद ऐसा न हो क्योंकि मुंबई शहर की निगरानी के लिए सीसीटीवी का बड़ा प्रोजेक्ट पूरा हो गया है.
अब मुंबई शहर में 1510 स्थानों पर दिन-रात 4717 कैमरे नजर रखेंगे. यानी शहर का कुल 80 फीसदी हिस्सा निगरानी में रहेगा. शहर में 3727 फिक्स्ड कैमरे, 970 पीटीजेड कैमरे और 20 थर्मल कैमरे लगाए गए हैं. इसके अलावा पांच मोबाइल वीडियो सर्विलेंस वैन की भी तैनाती की गई है. इस योजना को लागू करने के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा "आज शहर को तीसरी आंख मिली है जो कभी रुकती नहीं, थकती नहीं, सोती नहीं ... जिसे कभी छुट्टी नहीं चाहिए ... उम्मीद है तकनीक के बूते हम अपराध को कम कर पाएंगे.''
इस सिस्टम में लगे सभी कैमरे कमांड कंट्रोल सेंटर और मोबाइल वैन के जरिए फाइबर वायरलैस और वीसैट से जोड़े गए हैं. सीसीटीवी सिस्टम से जानकारी जुटाने के लिए दो स्थानों पर डेटा सेंटर और निगरानी कक्ष भी बनाए गए हैं.
गौरतलब है कि 26/11 हमलों के बाद रामप्रधान कमेटी ने शहर को सीसीटीवी में कैद करने की सिफारिश की थी. इसके लिए सालों के इंतजार के बाद पिछले 20 महीनों में काम ने रफ्तार पकड़ी. पहले बात 6000 कैमरे लगाने की थी, बाद में संख्या थोड़ी घटा दी गई. फिर भी इस निगरानी व्यवस्था से उम्मीद है कि कानून तोड़ने वालों के मन में डर बना रहेगा कि कोई देख रहा है.
वर्ष 2006 के ट्रेन बम धमाकों में मुंबई लहूलुहान हो गई थी. 209 लोगों की मौत हुई, लेकिन शुरू में आतंकियों का कुछ पता नहीं लगा क्योंकि शहर के पास सीसीटीवी नेटवर्क नहीं था. 26/11 हमले में कसाब और उसके साथियों ने एक बार फिर शहर को गहरे जख्म दिए लेकिन पांच सितारा होटल में लगे सीसीटीवी के अलावा उनके आतंक की तस्वीरें सड़क पर लगे कैमरों में कैद नहीं हुईं. अब शायद ऐसा न हो क्योंकि मुंबई शहर की निगरानी के लिए सीसीटीवी का बड़ा प्रोजेक्ट पूरा हो गया है.
अब मुंबई शहर में 1510 स्थानों पर दिन-रात 4717 कैमरे नजर रखेंगे. यानी शहर का कुल 80 फीसदी हिस्सा निगरानी में रहेगा. शहर में 3727 फिक्स्ड कैमरे, 970 पीटीजेड कैमरे और 20 थर्मल कैमरे लगाए गए हैं. इसके अलावा पांच मोबाइल वीडियो सर्विलेंस वैन की भी तैनाती की गई है. इस योजना को लागू करने के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा "आज शहर को तीसरी आंख मिली है जो कभी रुकती नहीं, थकती नहीं, सोती नहीं ... जिसे कभी छुट्टी नहीं चाहिए ... उम्मीद है तकनीक के बूते हम अपराध को कम कर पाएंगे.''
इस सिस्टम में लगे सभी कैमरे कमांड कंट्रोल सेंटर और मोबाइल वैन के जरिए फाइबर वायरलैस और वीसैट से जोड़े गए हैं. सीसीटीवी सिस्टम से जानकारी जुटाने के लिए दो स्थानों पर डेटा सेंटर और निगरानी कक्ष भी बनाए गए हैं.
गौरतलब है कि 26/11 हमलों के बाद रामप्रधान कमेटी ने शहर को सीसीटीवी में कैद करने की सिफारिश की थी. इसके लिए सालों के इंतजार के बाद पिछले 20 महीनों में काम ने रफ्तार पकड़ी. पहले बात 6000 कैमरे लगाने की थी, बाद में संख्या थोड़ी घटा दी गई. फिर भी इस निगरानी व्यवस्था से उम्मीद है कि कानून तोड़ने वालों के मन में डर बना रहेगा कि कोई देख रहा है.
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