
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान.
भोपाल:
मध्य प्रदेश में देश का पहला आनंद मंत्रालय है. सरकार के राज्य आनंदम संस्थान की वेबसाइट का दावा है कि 2005 से 2014 के दौरान प्रदेश ने सकल राज्य घरेलू उत्पाद में प्रचलित दरों के आधार पर 16.09 प्रतिशत की वृद्धि की. ये विकास प्रदेश की भौतिकी विकास को दर्शाता है इससे नागरिकों की खुशहाली मालूम नहीं होती. इसी को दिखाने मध्यप्रदेश में देश का पहला आनंद मंत्रालय बना, मंत्रीजी को विभाग मिला, लेकिन साल भर से भी कम वक्त में मंत्रालय से आनंद गायब होने लगा.
प्रदेश के 51 जिलो में 172 आनंद स्थल बनाए गए थे जिनमें नेकी की दीवार के अलावा आनंद उत्सव, आनंद सभा और आनंद क्लब के गठन होना था जिनमें खेल कूद, गीत संगीत, जैसे कार्यक्रम होना था, योजना के अंतर्गत प्रदेशभर में 33557 आनन्दकों का पंजीयन किया गया, उम्मीद थी वो फ्री में काम करें. आगर मालवा-शाजापुर जैसे कई ज़िलों में सरकारी नाकारेपन की वजह से आनंद की दीवार में केवल दीवार रह गई, नेकियां कबाड़ में दिखती है. हालांकि संचालक कहते हैं सब ठीक है, कर्मचारी मानते हैं कि प्रचार प्रसार ठीक से नहीं हुआ. आगर मालवा के प्रभारी रामचंद्र सिंदल ने कहा यहां लोग आते हैं, बाकायदा फायदा लेते हैं, संपर्क में भी रहते हैं सारा सामान नगरपालिका के टाउन हॉल में है. जबकि आनंदक अजय मालवीय ने साफ बताया कि पहले यहां लोगों की पहले रुचि थी बाद में घटती गई, पैच प्रचार प्रसार भी ठीक से नहीं हुआ.
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आनंद विभाग मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खुद अपने पास रखा, राज्य आनंदम संस्थान की सारी शक्तियां संस्थान की सामान्य सभा मे निहित की गई जिसके अध्यक्ष खुद शिवराज हैं. बचाव में सरकार के प्रवक्ता डॉ हितेष बाजपेयी ने कहा जब संयुक्त राष्ट्र संघ 2011 में इसे हैप्पीनेस इंडेक्स कहता है तो इसमें कुछ तो होगा अगर विचार अच्छा है तो मंज़िल मिलेगी. सरकारें भौतिक उन्नयन के लिये होती हैं,नैतिक उन्नयन के लिये समाज को जुड़ना पड़ता है. आनंद मंत्रालय इस बात पर मुहर लगाता है.
हातिमताई की कहानियों में आपने पढ़ा होगा कि नेकी कर और दरिया में डाल मध्यप्रदेश में नेकी करने के लिये करोड़ों की लागत से सरकारी दीवार बनाई गई जो अब कबाड़ में मिल चुकी है. मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान का आनंद विभाग अपने वजूद को तलाशता हुआ दिखाई दे रहा है, जिसका बजट 6 करोड़ रुपये से ज्यादा का है. मंत्रालय से ना कर्मचारी खुश हैं, ना प्रदेश की जनता.
प्रदेश के 51 जिलो में 172 आनंद स्थल बनाए गए थे जिनमें नेकी की दीवार के अलावा आनंद उत्सव, आनंद सभा और आनंद क्लब के गठन होना था जिनमें खेल कूद, गीत संगीत, जैसे कार्यक्रम होना था, योजना के अंतर्गत प्रदेशभर में 33557 आनन्दकों का पंजीयन किया गया, उम्मीद थी वो फ्री में काम करें. आगर मालवा-शाजापुर जैसे कई ज़िलों में सरकारी नाकारेपन की वजह से आनंद की दीवार में केवल दीवार रह गई, नेकियां कबाड़ में दिखती है. हालांकि संचालक कहते हैं सब ठीक है, कर्मचारी मानते हैं कि प्रचार प्रसार ठीक से नहीं हुआ. आगर मालवा के प्रभारी रामचंद्र सिंदल ने कहा यहां लोग आते हैं, बाकायदा फायदा लेते हैं, संपर्क में भी रहते हैं सारा सामान नगरपालिका के टाउन हॉल में है. जबकि आनंदक अजय मालवीय ने साफ बताया कि पहले यहां लोगों की पहले रुचि थी बाद में घटती गई, पैच प्रचार प्रसार भी ठीक से नहीं हुआ.
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आनंद विभाग मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खुद अपने पास रखा, राज्य आनंदम संस्थान की सारी शक्तियां संस्थान की सामान्य सभा मे निहित की गई जिसके अध्यक्ष खुद शिवराज हैं. बचाव में सरकार के प्रवक्ता डॉ हितेष बाजपेयी ने कहा जब संयुक्त राष्ट्र संघ 2011 में इसे हैप्पीनेस इंडेक्स कहता है तो इसमें कुछ तो होगा अगर विचार अच्छा है तो मंज़िल मिलेगी. सरकारें भौतिक उन्नयन के लिये होती हैं,नैतिक उन्नयन के लिये समाज को जुड़ना पड़ता है. आनंद मंत्रालय इस बात पर मुहर लगाता है.
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