- एल्फिंस्टन ब्रिज, जो मुंबई के दक्षिण और मध्य हिस्से को जोड़ता था, इस सप्ताह के अंत में गिरा दिया जाएगा
- यह पुल जॉन एल्फिंस्टन के नाम पर था, जो 1853 से 1860 तक बॉम्बे प्रेसीडेंसी के गवर्नर रहे थे
- पुराने पुल की संकीर्णता और जर्जर हालत के कारण ट्रैफिक जाम की समस्या बनी रही
मुंबई की धड़कन कही जाने वाली लोकल ट्रेनों और रेंगती ट्रैफिक के बीच एक और ऐतिहासिक अध्याय का अंत होने जा रहा है. 113 साल पुराना एल्फिंस्टन ब्रिज, जो दक्षिण मुंबई और मध्य मुंबई के बीच एक मजबूत कड़ी बनकर खड़ा था, अब इतिहास के पन्नों में दर्ज होने जा रहा है. आज इसके अंतिम हिस्से को ढहा दिया जाएगा ताकि एक भव्य और आधुनिक 'डबल-डेकर' ब्रिज के लिए रास्ता साफ हो सके.यह महज एक पुल को गिराना नहीं है, बल्कि पुराने मुंबई की यादों को समेटकर नए 'स्मार्ट मुंबई' की ओर कदम बढ़ाना है.
आखिर क्यों रखा था नाम Elphinstone?
इस पुल का इतिहास ब्रिटिश काल के उस दौर से जुड़ा है जब बॉम्बे (अब मुंबई) अपनी पहचान बना रहा था.इस ब्रिज का नाम जॉन एल्फिंस्टन के सम्मान में रखा गया था, जो 1853 से 1860 के बीच बॉम्बे प्रेसीडेंसी के गवर्नर रहे थे.उनके कार्यकाल के दौरान शहर के बुनियादी ढांचे और शिक्षा में क्रांतिकारी बदलाव आए थे, इसीलिए परेल और प्रभादेवी के इस महत्वपूर्ण जंक्शन को जोड़ने वाले पुल को उनका नाम दिया गया. सालों तक यह ब्रिज मुंबई की लाइफलाइन रही 'परब' (परेल-प्रभादेवी) कनेक्टिविटी का मुख्य हिस्सा बना रहा. इसे उस समय की इंजीनियरिंग का मास्टरपीस माना जाता था, जिसने दशकों तक भारी ट्रकों, बसों और लाखों पैदल यात्रियों का बोझ अपने सीने पर झेला.

क्यों था यह मुंबई का 'लाइफलाइन' लिंक?
एल्फिंस्टन ब्रिज केवल एक सड़क नहीं थी, बल्कि यह ईस्टर्न और वेस्टर्न मुंबई के बीच का सबसे छोटा और सुलभ रास्ता था. दादर, परेल और वर्ली के बीच आवाजाही करने वालों के लिए यह संजीवनी की तरह था. जैसे-जैसे मुंबई की आबादी बढ़ी और परेल-लोअर परेल का इलाका 'मिल्स से मॉल्स' की ओर बढ़ा, इस पुराने लोहे और कंक्रीट के पुल पर दबाव बढ़ता गया. इसकी जर्जर हालत और संकीर्ण बनावट की वजह से यहां अक्सर 'ट्रैफिक का समंदर' उमड़ पड़ता था. अंततः सुरक्षा और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए प्रशासन ने इसे विदा करने का फैसला लिया.
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कैसा बनेगा नया 'डबल-डेकर' ब्रिज?
अब सवाल है कि इसकी जगह क्या आएगा? मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (MMRDA) इस जगह पर एक आधुनिक इंजीनियरिंग का चमत्कार खड़ा करने जा रहा है. यह एक 'डबल-डेकर' फ्लाईओवर होगा, जो ट्रैफिक की समस्या को जड़ से खत्म करने का दम रखता है. इस प्रोजेक्ट के तहत एक स्तर पर गाड़ियां दौड़ेंगी, जबकि दूसरे स्तर पर मेट्रो या अन्य परिवहन सेवाओं के लिए प्रावधान होगा, जिससे सड़क पर लगने वाले जाम से मुक्ति मिलेगी. इस ब्रिज की चौड़ाई पुराने पुल से कहीं ज्यादा होगी और इसे 'भूकंपरोधी' तकनीक से लैस किया जाएगा. यह प्रोजेक्ट मुंबई के उन चुनिंदा इंफ्रास्ट्रक्चर में शामिल होगा जो शहर की वर्टिकल ग्रोथ को सपोर्ट करते हैं.
मुंबईकरों के लिए सफलता का नया सफर
इस नए ब्रिज का निर्माण न केवल ट्रैफिक को रफ्तार देगा, बल्कि ईंधन और समय की भी भारी बचत करेगा. MMRDA का लक्ष्य है कि इस आधुनिक कॉरिडोर के जरिए परेल और दादर के बीच के 'बॉटलनेक' को हमेशा के लिए खत्म कर दिया जाए. जब यह डबल-डेकर ब्रिज बनकर तैयार होगा, तो यह मुंबई के विकास की एक नई तस्वीर पेश करेगा, जहां पुरानी विरासत को सम्मान देते हुए आधुनिकता का स्वागत किया गया है.आने वाले कुछ महीनों में मुंबईकरों को थोड़ी परेशानी जरूर होगी, लेकिन 'जाम-मुक्त' सफर का जो सपना वो बरसों से देख रहे थे, वह अब हकीकत बनने के बेहद करीब है. एल्फिंस्टन ब्रिज का जाना एक युग का अंत है, तो नए डबल-डेकर का आना एक नए स्वर्णिम युग की शुरुआत.
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