महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने बच्चों की सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे करने वाले प्री-स्कूलों की पोल खोलकर रख दी है. यहां के सिडको इलाके में स्थित एक नामी प्री-स्कूल और डेकेयर सेंटर की घोर लापरवाही के चलते 23 महीने के एक मासूम बच्चे को बेहद दर्दनाक दौर से गुजरना पड़ा. दरअसल हुआ ये कि बच्चे डेकेयर सेंटर के एक कमरे में मौजूद थे और केयर टेकर कमरे को बाहर से बंद कर चला गया. इसी दौरान एक ढाई साल के बच्चे ने एक दूसरे 23 महीने के मासूम के शरीर पर 25 से ज्यादा जगहों पर दांतों से काट लिया. इस खौफनाक मंजर का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आ चुका है, जिसे देखकर कोई भी विचलित हो सकता है. फिलहाल इस लापरवाही को लेकर पुलिस ने स्कूल के मालिक और सीईओ सहित छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है.

बंद कमरे में 45 मिनट तक तड़पता रहा मासूम
यह पूरी घटना सोमवार सुबह की है, जब पेशे से वकील एक पिता ने अपने 23 महीने के मासूम बच्चे को सिडको (एन-1) स्थित 'फर्स्टक्राय इंटेलिटॉट्स प्री-स्कूल' में छोड़ा था. सुबह करीब 11 बजे कक्षा की केयर टेकर महिला एक बच्चे को बाहर ले गई, लेकिन वह जाते-जाते क्लासरूम के दरवाजे को बाहर से लॉक कर गई. कमरे के अंदर कोई भी शिक्षक या केयर गिवर मौजूद नहीं था. बाहर से कमरा बंद होने और अकेले रह जाने के कारण अंदर मौजूद छोटे बच्चे डर के मारे जोर-जोर से रोने लगे और दरवाजा खोलने की कोशिश करने लगे.
मामला दबाने के लिए 10 लाख के ऑफर का आरोप
इस खौफनाक वारदात के बाद भी स्कूल प्रशासन की संवेदनहीनता खत्म नहीं हुई. उन्होंने दोपहर 2 बजे तक इस पूरी घटना को माता-पिता से छिपाकर रखा. जब परिजन अपने बच्चे को लेने स्कूल पहुंचे, तो प्रिंसिपल ने 'बच्चे को सिर्फ मामूली खरोंचें आई हैं' कहकर उन्हें गुमराह करने की कोशिश की. लेकिन जब माता-पिता ने बच्चे के कपड़े हटाकर देखे, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. बच्चे के पूरे चेहरे, नाक, होंठ, छाती, पीठ और पैरों पर गहरे घाव और काटने के निशान थे, जिसके बाद उसे तुरंत शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया. पीड़ित माता-पिता ने स्कूल प्रबंधन पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि मामला दबाने और एफआईआर न कराने के लिए उन्हें 10 लाख रुपये और बच्चे को तीन साल तक मुफ्त शिक्षा देने का लालच दिया गया. इतना ही नहीं, परिजनों का यह भी आरोप है कि उन्हें यह कहकर धमकाया भी गया कि "तुम हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकते."
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बिना मान्यता के चल रहा था स्कूल, प्रबंधन पर केस दर्ज
इस घटना के बाद जब पीड़ित माता-पिता ने प्रशासन से स्कूल की कानूनी वैधता और अधिकृत अनुमति के दस्तावेज मांगे, तो पता चला कि स्कूल प्रबंधन के पास कोई भी लीगल डॉक्यूमेंट उपलब्ध नहीं था. जानकारी के अनुसार, इस स्कूल के पास महानगरपालिका की आवश्यक परमिशन ही नहीं है और यह अवैध रूप से सुरक्षा के झूठे दावे करके अन्य माता-पिता से भी भारी फीस वसूल रहा था. अब इस मामले में शिक्षा विभाग ने भी स्कूल के खिलाफ जांच शुरू कर दी है.परिजनों की शिकायत के बाद एमआईडीसी सिडको पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 125, 318 और जेजे एक्ट (JJ Act) की धारा 75 के तहत मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने इस मामले में स्कूल के मालिक हैदराबाद निवासी विजय रेड्डी, सीईओ और पुणे में रहने वाले शुभम महेश्वरी , राज्य प्रमुख अनुराधा सिंह, प्रबंधक मंगेश मुसले, वैभव सावड़े और प्रिंसिपल कांचन येवले समेत केयर टेकर महिला सहित कुल 6 लोगों को आरोपी बनाया है. फिलहाल पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है, हालांकि अभी तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है.
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