महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार के सामने सरकारी कर्मचारियों ने नई चुनौती खड़ी कर दी है.
- देवेंद्र फडणवीस सरकार के सामने नई चुनौती
- वेतन आयोग से 11 हजार करोड़ रुपये का बोझ
- शराब बिक्री में सात हजार करोड़ रुपये की हानि
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मुंबई:
किसान आंदोलन से पार पा चुकी फडणवीस सरकार के सामने नई चुनौती खड़ी हो चुकी है. अब राज्य के 16 लाख सरकारी कर्मचारी 12 से 14 जुलाई तक हड़ताल की धमकी दे चुके हैं. उनकी मांग है कि सरकारी कर्मचारियों को सातवां वेतन आयोग लागू होना चाहिए. किसानों की कर्ज़माफ़ी के ऐलान के बाद सरकारी कर्मचारी आंदोलन का बिगुल फूंक चुके हैं.
महाराष्ट्र सरकारी कर्मचारी संगठन के महासचिव अविनाश दौंड ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सांतवें वेतन आयोग के लागू करने पर जो भी बोझ राजस्व पर आएगा उसमें से छुटकारे का रास्ता हम बहुत पहले दे चुके हैं. अगर उस पर अमल होगा तो सरकार को बिना टैक्स बढ़ाए 25 हजार करोड़ रुपये की सालाना आमदनी होगी.
ज्ञात हो कि, फडणवीस सरकार का राजस्व शराब बिक्री से जुड़े फैसले के बाद सात हजार करोड़ रुपये से घटा है. उन्हें कर्ज़माफ़ी के लिए 30 हजार करोड़ रुपये जुगाड़ करने हैं. इस बीच 7 वें पे कमीशन के लागू होने से 11 हजार करोड़ रुपये का बोझ पड़ सकता है. राज्य पर पहले से साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये का कर्ज है.
इस बीच अच्छी खबर यही है कि सरकार की अपील को मानकर धनी किसान कर्ज़माफ़ी से खुद को अलग कर रहे हैं. विधायक राहुल कुल ने अपने परिवार पर चढ़े 20 लाख रुपये के कर्ज को माफ़ करवाने के बजाए अपने दम पर चुकाने का फैसला लिया है. राहुल कुल बीजेपी समर्थित राष्ट्रीय समाज पक्ष के विधायक हैं. उन्होंने राजस्व मंत्री चंद्रकांत पाटिल को खत लिखकर यह गुजारिश की है कि उन्हें और उनके परिवार पर चढ़े कर्ज़ को वे खुद चुकाएंगे. ऐसे में कर्ज़माफ़ी के दायरे से उन्हें दूर रखा जाए. कुल परिवार पर 20 लाख रुपये के आसपास का कर्ज़ चढ़ा है.
ऐसे में महाराष्ट्र की बीजेपी सरकार परेशानियों से उबरने के लिए संवाद के दरवाजे खोल चुकी है. आंदोलनकारी कर्मचारियों को मनाने की पहल वह करेगी.
महाराष्ट्र सरकारी कर्मचारी संगठन के महासचिव अविनाश दौंड ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सांतवें वेतन आयोग के लागू करने पर जो भी बोझ राजस्व पर आएगा उसमें से छुटकारे का रास्ता हम बहुत पहले दे चुके हैं. अगर उस पर अमल होगा तो सरकार को बिना टैक्स बढ़ाए 25 हजार करोड़ रुपये की सालाना आमदनी होगी.
ज्ञात हो कि, फडणवीस सरकार का राजस्व शराब बिक्री से जुड़े फैसले के बाद सात हजार करोड़ रुपये से घटा है. उन्हें कर्ज़माफ़ी के लिए 30 हजार करोड़ रुपये जुगाड़ करने हैं. इस बीच 7 वें पे कमीशन के लागू होने से 11 हजार करोड़ रुपये का बोझ पड़ सकता है. राज्य पर पहले से साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये का कर्ज है.
इस बीच अच्छी खबर यही है कि सरकार की अपील को मानकर धनी किसान कर्ज़माफ़ी से खुद को अलग कर रहे हैं. विधायक राहुल कुल ने अपने परिवार पर चढ़े 20 लाख रुपये के कर्ज को माफ़ करवाने के बजाए अपने दम पर चुकाने का फैसला लिया है. राहुल कुल बीजेपी समर्थित राष्ट्रीय समाज पक्ष के विधायक हैं. उन्होंने राजस्व मंत्री चंद्रकांत पाटिल को खत लिखकर यह गुजारिश की है कि उन्हें और उनके परिवार पर चढ़े कर्ज़ को वे खुद चुकाएंगे. ऐसे में कर्ज़माफ़ी के दायरे से उन्हें दूर रखा जाए. कुल परिवार पर 20 लाख रुपये के आसपास का कर्ज़ चढ़ा है.
ऐसे में महाराष्ट्र की बीजेपी सरकार परेशानियों से उबरने के लिए संवाद के दरवाजे खोल चुकी है. आंदोलनकारी कर्मचारियों को मनाने की पहल वह करेगी.
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