महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का फाइल फोटो...
- राज्य कैबिनेट की मुंबई में मंगलवार को हुई बैठक में इसे मंजूरी दी गई.
- ऐसा करने वाला महाराष्ट्र पहला राज्य होगा.
- बीजेपी सरकार के इस फैसले से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं उभर रही हैं.
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मुंबई:
महाराष्ट्र कैबिनेट ने राज्य के ओबीसी समाज के लिए अलग विभाग का ऐलान किया है. राज्य कैबिनेट की मुंबई में मंगलवार को हुई बैठक में इसे मंजूरी दी गई. ऐसा करने वाला महाराष्ट्र पहला राज्य होगा. बीजेपी सरकार के इस फैसले से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं उभर रही हैं.
महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले के तहत ओबीसी समाज से जुड़े सभी फैसले इस नए विभाग के तहत होंगे. इसे प्रभावशाली बनाने के लिए अलग सेक्रेटरी और मंत्री होगा. विभाग स्थापना के लिए 5 करोड़ रुपये की शुरूआती राशि रखी गई है. साथ ही 51 नए पदों का निर्माण किया गया है.
2011 की जनगणना के अनुसार, महाराष्ट्र में करीब 3 करोड़ 69 लाख ओबीसी समाज की आबादी है. नया विभाग ओबीसी कल्याण की सभी योजनाओं के प्रभावी अमल के साथ समाज में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की संभावना बढ़ाने के लिए प्रयास करेगा. सरकारी प्रेस नोट में यह सूचना दी गई है.
ओबीसी समाज में बीजेपी की पैठ बनी हुई है. लेकिन, हाल ही में मराठा आरक्षण को लेकर छिड़ा आंदोलन देख ओबीसी समाज में असहज वातावरण बना हुआ था. बीजेपी सरकार ने उस पर तोड़ निकालने की कोशिश की है.
विपक्ष से इस फैसले पर अलग-अलग प्रतिक्रिया आ रही है. एनसीपी के महाराष्ट्र अध्यक्ष सुनील तटकरे ने फैसले का समर्थन किया है तो महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता बालासाहब विखे- पाटिल ने इस फैसले से समाज में जातीय दूरियां और बढ़ेंगी, ऐसी प्रतिक्रिया दी है.
महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले के तहत ओबीसी समाज से जुड़े सभी फैसले इस नए विभाग के तहत होंगे. इसे प्रभावशाली बनाने के लिए अलग सेक्रेटरी और मंत्री होगा. विभाग स्थापना के लिए 5 करोड़ रुपये की शुरूआती राशि रखी गई है. साथ ही 51 नए पदों का निर्माण किया गया है.
2011 की जनगणना के अनुसार, महाराष्ट्र में करीब 3 करोड़ 69 लाख ओबीसी समाज की आबादी है. नया विभाग ओबीसी कल्याण की सभी योजनाओं के प्रभावी अमल के साथ समाज में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की संभावना बढ़ाने के लिए प्रयास करेगा. सरकारी प्रेस नोट में यह सूचना दी गई है.
ओबीसी समाज में बीजेपी की पैठ बनी हुई है. लेकिन, हाल ही में मराठा आरक्षण को लेकर छिड़ा आंदोलन देख ओबीसी समाज में असहज वातावरण बना हुआ था. बीजेपी सरकार ने उस पर तोड़ निकालने की कोशिश की है.
विपक्ष से इस फैसले पर अलग-अलग प्रतिक्रिया आ रही है. एनसीपी के महाराष्ट्र अध्यक्ष सुनील तटकरे ने फैसले का समर्थन किया है तो महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता बालासाहब विखे- पाटिल ने इस फैसले से समाज में जातीय दूरियां और बढ़ेंगी, ऐसी प्रतिक्रिया दी है.
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