- जयपुर के हाथी चंचल को होली के गुलाल से रंगा गया था और फोटोशूट के बाद रंग तुरंत साफ कर दिया गया था
- चंचल हाथी की उम्र लगभग 67 वर्ष थी और उसकी मौत प्राकृतिक कारणों से हुई थी, हार्ट अटैक प्रमुख कारण था
- हाथी की मौत का कारण वृद्धावस्था और हृदय गति रुकनाबताया गया, फोटोशूट से कोई संबंध नहीं था
जयपुर का गुलाबी हाथी पिछले दिनों सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था. दरअसल एक विदेशी फोटोग्राफर ने चंचल नाम के हाथी को गुलाबी रंग में रंगकर उसका फोटोशूट किया था. सोशल मीडिया पर 18 फरवरी को तस्वीरें और वीडियो वायरल हुए. हालांकि इससे पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी. लोगों को जैसे ही हाथी की मौत की बात पता चली उनका गुस्सा और बढ़ गया. लोग इसे पशु क्रूरता से जोड़ने लगे और हाथी की सवारी को प्रतिबंधित करने की मांग उठाने लगे. पशु प्रेमी हाथी चंचल की मौत के लिए सीधेतौर पर फोटोशूट को जिम्मेदार ठहरा रहे थे. हाथी की मौत कैसे हुई एनडीटीवी की पड़ताल में ये साफ हो गया है.

पिंक हाथी की मौत की वजह क्या?
एनडीटीवी की जांच से खुलासा हुआ कि हाथी की मौत की वजह वह फोटोशूट नहीं बल्कि एज फेक्टर था. हाथी ग्राम समिति के अध्यक्ष बल्लू खान ने भी इन दावों को निराधार बताया. उन्होंने साफ किया चंचल को होली में इस्तेमाल होने वाले गुलाल से रंगा गया था. करीब आधे घंटे बाद ही उसे साफ कर दिया गया था. उन्होंने बताया कि चंचल हाथी की उम्र लगभग 65-70 साल थी. हाथी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी सामने आई है. जिसमें कहा गया है कि उसकी मौत 4 फरवरी, 2026 को दोपहर 3:30 बजे 67 वर्ष की उम्र में हुई. उसकी मौत नेचुरल थी. वृद्धावस्था की वजह से हृदय गति रुकना उसकी मौत की वजह थी.

67 साल के चंचल हाथी को आया हार्ट अटैक
पोस्टमार्टम पैनल के सदस्य डॉ. अरविंद माथुर ने इस बात की पुष्टि की कि हाथी चंचल 67 साल का था. उसकी मौत हार्ट और सांस संबंधी परेशानियों की वजह से हुई. उन्होंने एनडीटीवी को बताया, "उसकी मृत्यु पूरी तरह से प्राकृतिक थी और गुलाल लगाने की घटना से इसका कोई संबंध नहीं था." बता दें कि हाथी का फोटोशूट वायरल होने के बाद इस पर लोगों ने जमकर गुस्सा किया. उन्होंने कहा कि ये पशु क्रूरता है.

हाथी को होली से गुलाल से रंगा गया था
विवाद बढ़ता देख जूलिया बुरुलेवा ने इंस्टाग्राम पर सफाई देते हुए लिखा, "हमने जयपुर में हाथी को कैसे रंगा, पर्दे के पीछे की झलक देखें. उन्होंने इस फोटोशूट के पीछे की वजह के बारे में बताया और ये भी ताया कि फोटोशूट के लिए सही जगह और मॉडल ढूंढने में कितनी मशक्कत करनी पड़ी.हाथी को लेकर चिंता करने वालों को उन्होंने बताया कि उसे रंगने के लिए ऑर्गेनिक, स्थानीय रूप से बना रंग इस्तेमाल किया गया था, ठीक वैसा ही रंग जैसा लोग त्योहारों में इस्तेमाल करते हैं. इसलिए ये रंग जानवर के लिए पूरी तरह सुरक्षित था.
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