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बिना कोचिंग के UPSC में सफलता, सागर की सोफिया सिद्दीकी ने हासिल की 253वीं रैंक, रोजाना 8-10 घंटे करती थी पढ़ाई

UPSC Result 2025: पढ़ाई के साथ-साथ सोफिया ने पारिवारिक जिम्मेदारियों को भी बखूबी निभाया. वे नियमित रूप से घर के कामों में भी परिवार की मदद करती थीं. उनका मानना है कि सही समय प्रबंधन से पढ़ाई और घर की जिम्मेदारियों दोनों को संतुलित किया जा सकता है.

बिना कोचिंग के UPSC में सफलता, सागर की सोफिया सिद्दीकी ने हासिल की 253वीं रैंक, रोजाना 8-10 घंटे करती थी पढ़ाई

Sophia Siddiqui Success Story: सागर शहर की होनहार बेटी सोफिया सिद्दीकी ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) 2025 की परीक्षा में 253वीं रैंक हासिल कर सागर जिले का नाम रोशन किया है. खास बात यह है कि सोफिया ने यह सफलता बिना किसी कोचिंग के केवल  स्वअध्ययन और कड़ी मेहनत के दम पर प्राप्त की है. उनकी इस उपलब्धि ने न केवल परिवार बल्कि पूरे शहर को गौरवान्वित किया है.

सागर की सोफिया सिद्दीकी ने UPSC में हासिल की सफलता

सागर के शुक्रवारी वार्ड निवासी सोफिया सिद्दीकी चार भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं. उनके पिता एक रिटायर्ड प्रिंसिपल हैं, जिन्होंने हमेशा अपने बच्चों को शिक्षा और अनुशासन का महत्व सिखाया. साधारण परिवार से आने वाली सोफिया ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने लक्ष्य को पाने के लिए लगातार मेहनत की और आखिरकार देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक UPSC में सफलता हासिल कर ली.

रोजाना 8 से 10 घंटे करती थी पढ़ाई

सोफिया का यह दूसरा प्रयास था. पहले प्रयास से मिले अनुभव को उन्होंने अपनी ताकत बनाया और दूसरे प्रयास में बेहतर रणनीति के साथ तैयारी की. उन्होंने अपनी पूरी पढ़ाई घर से ही की और किसी भी कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया. रोजाना 8 से 10 घंटे की नियमित पढ़ाई, समय का सही प्रबंधन और निरंतर अभ्यास उनकी सफलता की सबसे बड़ी कुंजी रही.

सोशल मीडिया से रही दूर

आज के दौर में जहां अधिकांश छात्र पढ़ाई के लिए कोचिंग और मोबाइल पर निर्भर रहते हैं, वहीं सोफिया ने अपनी मेहनत और अनुशासन से यह साबित कर दिया कि अगर कुछ करने का जुनून हो तो सीमित संसाधनों में भी सफलता हासिल की जा सकती है. सोफिया सोशल मीडिया से भी हमेशा दूर रहीं. इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने आज तक किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपना अकाउंट तक नहीं बनाया.

पढ़ाई के साथ-साथ सोफिया ने पारिवारिक जिम्मेदारियों को भी बखूबी निभाया. वे नियमित रूप से घर के कामों में भी परिवार की मदद करती थीं. उनका मानना है कि सही समय प्रबंधन से पढ़ाई और घर की जिम्मेदारियों दोनों को संतुलित किया जा सकता है.

सोफिया की यह सफलता उन हजारों छात्रों के लिए प्रेरणा है जो अक्सर कोचिंग और संसाधनों की कमी को अपनी असफलता का कारण मानते हैं. सोफिया का उदाहरण बताता है कि दृढ़ संकल्प, अनुशासन और निरंतर मेहनत के बल पर किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है. उनकी इस उपलब्धि से सागर शहर में खुशी का माहौल है. परिवार, रिश्तेदार और परिचित उन्हें लगातार बधाई दे रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि सोफिया ने न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे शहर का नाम रोशन किया है.

सोफिया की सफलता यह संदेश देती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो किसी भी मुश्किल परीक्षा को पार किया जा सकता है. उनकी कहानी आज के युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा बनकर सामने आई है.

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