- भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की संख्या पिछले कुछ वर्षों में 3 हजार से बढ़कर 11 हजार से अधिक हो गई है.
- राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में 2022 से अब तक 168 महिला कैडेट्स ने प्रशिक्षण प्राप्त किया है.
- हरियाणा से 35, उसके बाद उत्तर प्रदेश से 28 और राजस्थान से 13 महिला कैडेट एनडीए में शामिल हैं.
भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और नेतृत्व देश की रक्षा में उनके बढ़ते योगदान को दिखाती है. पिछले कुछ वर्षों में सेना, नौसेना और वायुसेना में महिलाओं की भूमिका लगातार बढ़ी है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2014 में महिला अधिकारियों की संख्या करीब 3,000 थी, जो अब बढ़कर 11,000 से अधिक हो गई है. प्रशिक्षण के नए अवसर और नीतियों में बदलाव से महिलाओं को सेना में आगे बढ़ने का ज्यादा मौका मिला है.
राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) में भी महिलाओं की एंट्री के बाद उनकी संख्या लगातार बढ़ रही है. मई 2025 में 17 महिला कैडेट और नवंबर 2025 में 15 महिला कैडेट एनडीए से पास आउट हुईं. साल 2022 में महिलाओं के प्रवेश के बाद से अब तक 158 महिला कैडेट अकादमी में शामिल हो चुकी हैं.
NDA में सबसे ज्यादा इन राज्यों से महिला कैडेट
राज्यों की बात करें तो हरियाणा से सबसे ज्यादा 35 महिला कैडेट, उसके बाद उत्तर प्रदेश से 28 और राजस्थान से 13 कैडेट एनडीए में हैं. सेना ने 2024 में महिला कैडेट की वार्षिक सीटें 80 से बढ़ाकर 144 कर दी हैं.
अब नेतृत्व और ऑपरेशन में भी महिलाएं आगे
आज महिलाएं सेना में सिर्फ सहायक भूमिकाओं तक सीमित नहीं हैं. वे फाइटर पायलट, यूनिट कमांडर और लेफ्टिनेंट जनरल जैसे वरिष्ठ पदों तक पहुंच चुकी हैं. इससे सेना में पेशेवर क्षमता और मजबूती दोनों बढ़ी है.
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तीनों सेनाओं की महिलाओं का खास अभियान
साल 2025 में सेना, नौसेना और वायुसेना की 11 महिला अधिकारियों ने मिलकर एक खास समुद्री अभियान पूरा किया. इन अधिकारियों ने स्वदेशी जहाज 'त्रिवेणी' से 1,800 नॉटिकल मील की यात्रा कर सेशेल्स तक का सफर तय किया.
इसके अलावा, गणतंत्र दिवस 2025 की परेड में भारतीय वायुसेना की 9 महिला अग्निवीर वायु ने एयरफोर्स बैंड में हिस्सा लिया. वहीं फ्लाइट लेफ्टिनेंट अक्षिता ढांकर ने राष्ट्रपति के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराया.
महिलाओं की भूमिका को लेकर बदल रही तस्वीर
आजादी के बाद शुरुआत में महिलाओं की भूमिका सेना में मुख्य रूप से मेडिकल और नर्सिंग सेवाओं तक सीमित थी, लेकिन समय के साथ नीतियों में बदलाव, अदालतों के फैसलों और संस्थागत प्रयासों से महिलाओं को सेना के कई नए क्षेत्रों में काम करने का मौका मिला.
आज भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को समान अवसर, पेशेवर क्षमता और मजबूत राष्ट्रीय सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
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