Twisha Sharma Death Case: भोपाल की चर्चित ट्विशा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में अब पुलिस ने पूर्व जज और ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह की अग्रिम ज़मानत रद्द कराने के लिये मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. राज्य सरकार की ओर से दायर आवेदन में कहा गया है कि निचली अदालत ने 15 मई को जिस दिन FIR दर्ज हुई, उसी दिन “यांत्रिक तरीके” से गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत दे दी, जबकि केस में व्हाट्सऐप चैट, मेडिकल एविडेंस, परिजनों के बयान, दहेज प्रताड़ना के आरोप और नवविवाहिता की संदिग्ध मौत जैसे गंभीर तथ्य मौजूद थे.
भोपाल पुलिस ने हाईकोर्ट में दी ये 9 दलीलें
- पुलिस ने हाईकोर्ट में कहा है कि सेशन कोर्ट ने ट्विशा और उसके माता-पिता के बीच हुई व्हाट्सऐप चैट को ठीक से देखे बिना ही जमानत दे दी. आवेदन में दावा किया गया है कि इन चैट्स में गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह के खिलाफ “स्पष्ट आरोप” हैं और इन्हीं से यह सामने आता है कि ट्विशा को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था. पुलिस का कहना है कि इतने गंभीर रिकॉर्ड के बावजूद अग्रिम जमानत देना कानून और तथ्यों दोनों की गंभीर अनदेखी है.
- राज्य ने एक बड़ा कानूनी आधार भी उठाया है. पुलिस ने कहा है कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 118 के तहत अगर किसी महिला की शादी के सात साल के भीतर अप्राकृतिक परिस्थितियों में मौत होती है, तो पति और ससुराल पक्ष के खिलाफ कानूनी अनुमान बनता है. ट्विशा की शादी 9 दिसंबर 2025 को हुई थी और उसकी मौत 12-13 मई 2026 की रात हुई यानी शादी के सिर्फ पांच-छह महीने बाद... पुलिस का आरोप है कि निचली अदालत ने इस अहम कानूनी पहलू को नजरअंदाज कर दिया.
- सबसे गंभीर आधार सबूतों से कथित छेड़छाड़ का है. पुलिस के मुताबिक, 13 मई को गिरिबाला सिंह के घर का CCTV फुटेज जांच एजेंसी ने जब्त कर लिया था, लेकिन गिरिबाला सिंह के पास पहले से CCTV फुटेज सुरक्षित था. पुलिस ने आरोप लगाया है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर CCTV के “चुने हुए छोटे-छोटे क्लिप” लीक किये, ताकि जांच को प्रभावित किया जा सके और सबूतों के साथ छेड़छाड़ की जा सके.
- पुलिस ने यह भी कहा है कि 18 मई को, जिस दिन उनके बेटे समर्थ सिंह की जमानत याचिका खारिज हुई, उसी दिन गिरिबाला सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. पुलिस के मुताबिक, यह कदम जांच को प्रभावित करने और जनमत को मोड़ने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. राज्य ने इसे भी जमानत रद्द करने का मजबूत आधार बताया है. हाईकोर्ट में दायर आवेदन में पुलिस ने गिरिबाला सिंह पर जांच में सहयोग न करने का आरोप भी लगाया है. पुलिस के अनुसार, 13 और 14 मई को उन्हें नोटिस जारी कर जांच में शामिल होने के लिये बुलाया गया, लेकिन वे नहीं आईं. अग्रिम जमानत मिलने के बाद भी 20 मई को व्हाट्सऐप पर नोटिस भेजा गया, लेकिन संदेश देखने के बावजूद उन्होंने जवाब नहीं दिया. 21 मई को जब कटारा हिल्स थाने के सब इंस्पेक्टर उनके घर पहुंचे, तो उनके नौकर पंकज झारिया ने बताया कि वे घर पर नहीं हैं और नोटिस लेने से भी मना कर दिया.
- पुलिस का कहना है कि यह अग्रिम जमानत की शर्तों का खुला उल्लंघन है. आवेदन में लिखा गया है कि गिरिबाला सिंह जानबूझकर पूछताछ से बच रही हैं, टालमटोल कर रही हैं और जांच एजेंसी के निर्देशों का पालन नहीं कर रही हैं. पुलिस ने हाईकोर्ट से कहा है कि ऐसे “ठोस और गंभीर हालात” मौजूद हैं, जिनके आधार पर उनकी अग्रिम जमानत रद्द की जानी चाहिए.
- पुलिस ने एक और चौंकाने वाला आधार रखा है. आवेदन में कहा गया है कि गिरिबाला सिंह खुद 35 साल से अधिक समय तक न्यायिक सेवा में रहीं, इसलिए उन्हें अच्छे से पता था कि ऐसी स्थिति में सबसे पहले पुलिस को सूचना दी जानी चाहिए थी. पुलिस ने कहा कि कटारा हिल्स थाने की लहारपुर पुलिस चौकी उनके घर से केवल करीब 100 मीटर दूर थी, फिर भी उन्होंने और उनके बेटों ने पुलिस को तुरंत सूचना नहीं दी और ट्विशा को सीधे AIIMS ले गए. पुलिस का आरोप है कि इससे क्राइम सीन और अन्य सबूत प्रभावित हुए.
- मेडिकल एविडेंस को भी पुलिस ने जमानत रद्द कराने का बड़ा आधार बनाया है. आवेदन के मुताबिक पोस्टमॉर्टम में ट्विशा की मौत का कारण ligature hanging बताया गया, लेकिन शरीर के अन्य हिस्सों पर blunt force से संभव कई ante-mortem injuries भी पाई गईं. पुलिस का कहना है कि यह मेडिकल तथ्य, दहेज प्रताड़ना और घरेलू क्रूरता के आरोपों के साथ मिलकर मामले को बेहद गंभीर बनाते हैं.
- पुलिस ने ट्विशा की मां रेखा रानी शर्मा, भाई हर्षित शर्मा और भाभी राशि अबरोल के बयानों का भी हवाला दिया है. इन बयानों में आरोप है कि शादी के बाद से ही समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह ट्विशा को दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित करते थे और उसके चरित्र पर भी सवाल उठाते थे. आवेदन में यह भी आरोप है कि अप्रैल 2026 में ट्विशा के गर्भवती होने के बाद उसे प्रताड़ित किया गया और मई के पहले सप्ताह में गर्भपात के लिये दबाव बनाया गया.
- पुलिस ने ट्विशा की आखिरी फोन कॉल को भी अहम तथ्य बताया है. आवेदन के अनुसार 12 मई की रात करीब 9:41 बजे ट्विशा ने अपनी मां को फोन किया था. परिजनों ने फोन पर समर्थ सिंह के चिल्लाने की आवाज सुनी, जिसके बाद फोन कट गया और मोबाइल स्विच ऑफ हो गया. इसके बाद परिजनों ने समर्थ और गिरिबाला सिंह को कई बार कॉल किया, लेकिन जवाब नहीं मिला. करीब 10:35 बजे गिरिबाला सिंह ने फोन उठाया और बताया कि ट्विशा अब नहीं रही.
'सास गिरिबाला सिंह की गिरफ्तारी की मांगट
इन सभी आधारों पर पुलिस ने हाईकोर्ट से मांग की है कि 15 मई को गिरिबाला सिंह को दी गई अग्रिम जमानत का आदेश रद्द किया जाए. राज्य ने अदालत से यह भी प्रार्थना की है कि गिरिबाला सिंह की गिरफ्तारी के निर्देश दिए जाएं और उन्हें हिरासत में भेजा जाए. पुलिस का तर्क है कि यह सिर्फ एक ज़मानत का मामला नहीं, बल्कि एक नवविवाहिता की संदिग्ध मौत, दहेज प्रताड़ना, मेडिकल चोटों, सबूतों से कथित छेड़छाड़ और जांच में असहयोग का गंभीर मामला है.
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