Simhastha 2028 Ujjain: उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ‑2028 को लेकर राज्य सरकार ने तैयारियों को तेज कर दिया है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साफ शब्दों में कहा है कि सिंहस्थ से जुड़े सभी प्रस्तावित विकास कार्य वर्ष 2027 की दीपावली तक हर हाल में पूरे कर लिए जाएं. मंगलवार को मंत्रालय में हुई मंत्रिमंडलीय समिति की पांचवीं बैठक में सिंहस्थ की व्यवस्थाओं, अधोसंरचना और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर अहम फैसले लिए गए. बैठक में 2 हजार 923 करोड़ 84 लाख रुपये की लागत से 22 विकास कार्यों को मंजूरी दी गई. सरकार का फोकस आयोजन को सुचारु, सुरक्षित और आधुनिक सुविधाओं से लैस बनाने पर है.
आज सिंहस्थ 2028 की तैयारियों हेतु गठित मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में ₹2985 करोड़ के निर्माण कार्यों को स्वीकृति दी। साथ ही अधिकारियों को सभी कार्य दीपावली 2027 तक पूर्ण करने के निर्देश दिए।
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) April 7, 2026
सभी संबंधित विभाग सफल आयोजन हेतु प्रबंधन, विकास कार्यों की निगरानी एवं समीक्षा तथा… pic.twitter.com/3ol773VURL
पर्याप्त स्टाफ और सघन प्रशिक्षण पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंहस्थ के सफल संचालन के लिए जितने अधिकारियों और कर्मचारियों की जरूरत है, उनकी संबंधित विभागों में तत्काल पूर्ति की जाए. आयोजन से जुड़े अलग‑अलग दायित्वों के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों का सघन प्रशिक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं. सीएम ने साफ किया कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी काम तय समय सीमा में पूरे होने चाहिए.

Simhastha 2028 Ujjain: सिंहस्थ 2028 तैयारी बैठक
गुणवत्ता पर समझौता नहीं, थर्ड पार्टी ऑडिट अनिवार्य
बैठक में मुख्यमंत्री ने सिंहस्थ से जुड़े सभी कार्यों का थर्ड पार्टी ऑडिट कराए जाने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि इससे न केवल निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित होगी, बल्कि बेहतर वित्तीय प्रबंधन भी हो सकेगा. सीएम ने यह भी कहा कि उज्जैन में बनने वाली इमारतों को इस तरह डिजाइन किया जाए, ताकि सिंहस्थ के बाद होने वाले वार्षिक आयोजनों और कार्यक्रमों में भी उनका उपयोग किया जा सके.
उज्जैन के 100 KM दायरे में श्रद्धालु सुविधाओं पर फोकस
दूर‑दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उज्जैन के 100 किलोमीटर के दायरे में होम‑स्टे, पार्किंग और जन सुविधाएं विकसित करने को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए. मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंहस्थ के प्रबंधन में स्थानीय संस्थाओं और जनभागीदारी को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है.
क्षिप्रा पर अलग पैदल ब्रिज का निर्देश
सीएम डॉ. मोहन यादव ने क्षिप्रा नदी पर पैदल तीर्थ यात्रियों के लिए अलग से ब्रिज बनाए जाने के निर्देश भी दिए. उनका कहना है कि इससे भीड़ प्रबंधन आसान होगा और श्रद्धालुओं की सुरक्षा व सुविधा दोनों सुनिश्चित होंगी.
इन प्रमुख सड़कों और पुलों को मिली मंजूरी
बैठक में शहर और आसपास के क्षेत्रों में कई अहम सड़क और पुल परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई. इनमें गुदरी चौराहे से हरसिद्धि पाल तक मार्ग चौड़ीकरण, देवास रोड‑नानाखेड़ा एमआर‑2 मार्ग का उन्नयन, महाकाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक सड़क चौड़ीकरण, क्षिप्रा नदी के पूर्वी हिस्से में सड़क निर्माण और शनि मंदिर से मेठिया मार्ग पर नया पुल निर्माण जैसे कार्य शामिल हैं.
हाई‑टेक इंफ्रास्ट्रक्चर पर 139 करोड़ रुपए मंजूर
मंत्रिमंडलीय समिति ने 139.14 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को भी मंजूरी दी. इस सेंटर से सीसीटीवी, ड्रोन और डेटा एनालिटिक्स के जरिए मेले की गतिविधियों की रियल‑टाइम मॉनिटरिंग होगी. एआई आधारित भीड़ प्रबंधन, मोबाइल एप के जरिए रूट, पार्किंग और सुविधाओं की जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी.
मेला क्षेत्र में स्थायी सुविधाएं होंगी विकसित
इसके अलावा करीब 30 करोड़ रुपये की लागत से मेला कंट्रोल रूम, मल्टी‑मॉडल ट्रांजिट हब, स्काईवॉक, सर्किट हाउस और मेला क्षेत्र में स्थायी अधोसंरचना के निर्माण को भी हरी झंडी दी गई है. मेला क्षेत्र में पक्की सड़कें, फुटपाथ, स्ट्रीट लाइट, जल प्रदाय और सीवरेज व्यवस्था विकसित की जाएगी, ताकि भविष्य में भी इसका उपयोग हो सके.
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