Child Trafficking Case Sheopur: श्योपुर जिले में बच्चा तस्करी से जुड़ा एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक संगठित रैकेट का पर्दाफाश किया है. सवाई माधोपुर नेशनल हाईवे पर मिली दो साल की लावारिश मासूम बच्ची की गुत्थी सुलझाते हुए श्योपुर पुलिस ने न सिर्फ बच्ची को बेचने वाले आरोपियों को गिरफ्तार किया, बल्कि इस पूरे नेटवर्क की मास्टरमाइंड तक भी पहुंच बनाई. जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि इस रैकेट की मुख्य सूत्रधार सरकारी अस्पताल की स्टाफ नर्स है. 16 दिनों की कड़ी मेहनत के बाद पुलिस ने बच्ची के असली माता‑पिता को भी खोज निकाला है, जिससे मामले ने और गंभीर रूप ले लिया है.
हाईवे किनारे मिली मासूम से खुला तस्करी रैकेट
कुछ दिन पहले श्योपुर जिले में सवाई माधोपुर नेशनल हाईवे किनारे एक ढाबे के पास दो साल की बच्ची लावारिश हालत में मिली थी. ढाबा संचालक सोनू आर्य ने इंसानियत दिखाते हुए बच्ची को सुरक्षित मानपुर थाने पहुंचाया. इसी घटना से श्योपुर पुलिस को बच्चा तस्करी के एक बड़े नेटवर्क के सुराग मिले.

Child Trafficking Case: श्योपुर बच्चा तस्करी रैकेट
100 से ज्यादा CCTV खंगाले, भोपाल से पकड़ाया दंपती
श्योपुर एसपी सुधीर अग्रवाल के निर्देश पर तीन थानों की संयुक्त टीम बनाई गई. पुलिस ने 100 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों की जांच की और जांच की कड़ी भोपाल तक पहुंची. पुलिस ने बच्ची को हाईवे पर छोड़ने वाले दंपती आकाश मुंदरा और उसकी पत्नी को भोपाल से गिरफ्तार किया. पूछताछ में सामने आया कि बच्ची को उन्होंने खरीदा था और बाद में उसे लावारिश छोड़ दिया.
सरकारी अस्पताल की नर्स निकली मास्टरमाइंड
पूछताछ में खुलासा हुआ कि दो साल पहले छह दिन की इस बच्ची को एक गरीब परिवार से सौदा कर बेचा गया था. इस पूरे सौदे की मास्टरमाइंड सिमरोल थाना क्षेत्र के चोरल उप‑स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ हेड नर्स है. आरोप है कि नर्स ने गरीबी का फायदा उठाकर बच्ची की देखरेख के बहाने उसे इंदौर की ब्यूटी पार्लर संचालिका के माध्यम से भोपाल के व्यवसायी दंपती को 1 से 1.5 लाख रुपये में बेच दिया था.
16 दिनों की कार्रवाई में 7 आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने खरगोन, धार, इंदौर और भोपाल में दबिश देते हुए अब तक 5 महिलाओं और 2 पुरुषों समेत कुल 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. यह कार्रवाई बच्चा तस्करी के खिलाफ बड़ी सफलता मानी जा रही है.
असली माता‑पिता मिले, DNA टेस्ट होगा
श्योपुर पुलिस ने बताया कि 16 दिनों की सतत जांच के बाद बच्ची के असली माता‑पिता को भी खोज निकाला गया है. अब बच्ची और दावा करने वाले माता‑पिता का डीएनए टेस्ट कराया जाएगा. रिपोर्ट मैच होने पर कानूनी प्रक्रिया के तहत बच्ची को सौंपा जाएगा.
ढाबा संचालक को किया सम्मानित
पुलिस कप्तान सुधीर अग्रवाल ने बच्ची को सुरक्षित थाने पहुंचाने वाले ढाबा संचालक सोनू आर्य को सम्मानित किया. पुलिस का कहना है कि इस ऑपरेशन से एक मासूम को न सिर्फ न्याय और पहचान मिली, बल्कि बच्चा तस्करी के खतरनाक नेटवर्क का भी पर्दाफाश हुआ है.
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