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केन-बेतवा परियोजना MP: विकास की राह या आदिवासियों के अस्तित्व पर खतरा, बांध स्थल पर भड़का जनसंग्राम

Ken-Betwa Link Project MP: एमपी के बुंदेलखंड में केन-बेतवा परियोजना में विरोध तेज हो गया है. छतरपुर में आदिवासियों और किसानों ने बांध स्थल पर जनसंग्राम शुरू कर दिया है, जिससे 44,000 करोड़ की परियोजना का काम ठप है.

केन-बेतवा परियोजना MP: विकास की राह या आदिवासियों के अस्तित्व पर खतरा, बांध स्थल पर भड़का जनसंग्राम
  • मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में आदिवासी और ग्रामीणों का आंदोलन तेज हो गया है
  • छतरपुर जिले के पन्ना नेशनल पार्क के कोर एरिया में बांध निर्माण कार्य कई दिनों से आंदोलन के कारण ठप पड़ा हुआ है
  • आंदोलनकारियों का आरोप है कि उन्हें दिल्ली जाने से रोका गया. उनकी जमीन तथा जीवन पर गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है
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Ken-Betwa Link Project MP: मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में चल रही केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. छतरपुर जिले में इस परियोजना के विरोध में आंदोलन अब उग्र हो गया है. अपनी मांगों को लेकर दिल्ली जा रहे आदिवासी, किसान और ग्रामीणों को प्रशासन ने रास्ते में ही रोक दिया, जिसके बाद नाराज लोगों ने बांध स्थल पर ही जनसंग्राम शुरू कर दिया.

दूसरे दिन भी ठप रहा निर्माण कार्य

लगातार दूसरे दिन भी 44,000 करोड़ रुपये की इस परियोजना का काम ठप रहा. हजारों की संख्या में ग्रामीण, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हैं, धरने पर बैठे हैं. आंदोलन की अगुवाई कर रहे समाजसेवी अमित भटनागर का कहना है कि आंदोलनकारियों को जगह-जगह रोका गया, प्रताड़ित किया गया और यहां तक कि उनका राशन भी छीन लिया गया. इसी के विरोध में अब लोग सीधे बांध स्थल पर डटे हुए हैं. 

ken betwa link project protest chhatarpur tribal movement work stalled

ken betwa link project protest chhatarpur Madhya Pradesh tribal movement work stalled

पन्ना क्षेत्र में बांध स्थल पर डटे ग्रामीण

छतरपुर जिले के बिजावर अनुविभाग में चल रहे बांध निर्माण कार्य को ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर रुकवा दिया. पन्ना की सीमा से लगे क्षेत्र में पन्ना नेशनल पार्क के कोर एरिया में बन रहे इस बांध स्थल पर महिलाएं हाथों में तख्तियां लेकर धरने पर बैठी हैं. 5 अप्रैल 2026 से शुरू हुआ यह आंदोलन लगातार निर्माण कार्य को प्रभावित कर रहा है. कई स्थानों पर महिलाओं ने जेसीबी मशीनों के सामने खड़े होकर काम रुकवा दिया.

क्या कह रहे हैं आंदोलनकारी?

आंदोलनकारियों का कहना है कि उन्हें दिल्ली जाने से रोका गया और उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है. उनका आरोप है कि उनकी जमीन, जंगल और जीवन पर संकट खड़ा हो गया है. उनका साफ कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, आंदोलन जारी रहेगा. 

ken betwa link project protest chhatarpur Madhya Pradesh tribal movement work stalled

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प्रशासन का क्या है पक्ष?

दूसरी ओर प्रशासन लगातार स्थिति संभालने और बातचीत के प्रयास में जुटा है. सटई तहसील के तहसीलदार इंद्र कुमार गौतम प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और लोगों को समझाने की कोशिश की, लेकिन आंदोलनकारी नहीं माने. इसके बाद जिला प्रशासन की टीम, जिसमें जिला पंचायत सीईओ और अपर कलेक्टर नमः शिवाय अरजरिया शामिल थे, मौके पर पहुंची. टीम को कई घंटों तक इंतजार करना पड़ा, लेकिन माहौल तनावपूर्ण होने के कारण अधिकारियों को बिना किसी नतीजे के लौटना पड़ा.

प्रशासन का कहना है कि टीम ग्रामीणों, महिलाओं और बच्चों की समस्याएं सुनने और स्वास्थ्य संबंधी स्थिति जानने के लिए पहुंची थी. अधिकारियों के अनुसार, बड़ी संख्या में लोग वहां एकत्र हो गए और स्थिति बिगड़ने के कारण प्रशासनिक टीम को वापस लौटना पड़ा. प्रशासन ने यह भी कहा कि कुछ बाहरी लोग भी भीड़ में शामिल थे, जिससे हालात और तनावपूर्ण हुए. 

ken betwa link project protest chhatarpur Madhya Pradesh tribal movement work stalled

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बातचीत से समाधान की उम्मीद

छतरपुर कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने कहा है कि सभी पक्षों से लगातार बातचीत की जा रही है और जल्द समाधान निकलने की उम्मीद है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदर्शनकारियों की जो भी जायज मांगें होंगी, उन्हें पूरा किया जाएगा.

बड़ा सवाल: विकास या अस्तित्व?

फिलहाल स्थिति यह है कि एक ओर सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना का काम ठप पड़ा है, तो दूसरी ओर आदिवासी और ग्रामीण अपने अधिकारों को लेकर आंदोलन पर अड़े हुए हैं. ऐसे में यह सवाल और भी अहम हो गया है कि यह परियोजना बुंदेलखंड के विकास की राह बनेगी या फिर स्थानीय लोगों के अस्तित्व पर खतरा साबित होगी.

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