'सर, मैं एक लड़के से प्यार करती हूं, हम दोनों शादी करना चाहते थे. परिवार वालों से कहा, लेकिन वह तैयार नहीं हुए. काफी मिन्नतों के बाद उन्होंने शर्त रखी कि प्रेमी के खिलाफ दुष्कर्म का झूठा केस दर्ज करा दो, फिर उससे शादी करा देंगे. लेकिन, पुलिस ने प्रेमी को जेल भेज दिया और परिवार वालों ने अधेड़ उम्र के आदमी से मेरी शादी करा दी. वह मुझे मारता है, प्रताड़ित करता है, अब मैं उसके साथ नहीं रहना चाहती'.
जबरन बंधक बनाने का था आरोप
दरअसल, यह मामला ग्वालियर हाई कोर्ट में दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका से जुड़ा है. एक पति ने कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उसकी पत्नी को एक युवक ने जबरन बंधक बना लिया है. कोर्ट के निर्देश पर पुलिस ने महिला को हिरासत में लेकर पेश किया. महिला वकील द्वारा की गई काउंसिलिंग में एक हैरान कर देने वाली कहानी समाने आई.
परिजनों की शर्त- प्रेमी पर दुष्कर्म का केस दर्ज कराओ
सरकारी वकील के अनुसार, 19 साल की युवती मोनिका (बदला हुआ नाम) 21 साल के युवक रोहित (बदला हुआ नाम) से प्यार करती है. उसका प्रेमी पिछड़ी जाति से आता है. वे शादी करना चाहते थे, लेकिन परिजन इसके खिलाफ थे. युवती के कई बार प्रेमी से शादी करने की जिद करने पर उसके परिजनों ने एक अजीब शर्त रखी, उन्होने कहा कि पहले युवक के खिलाफ दुष्कर्म का केस दर्ज कराओ, फिर तुम्हारी शादी करा देंगे. परिजनों की बातों में आकर युवती ने प्रेमी के खिलाफ दुष्कर्म का झूठा केस दर्ज कर दिया. इसके बाद पुलिस ने उसे जेल भेज दिया.

परिजनों ने 40 साल के अधेड़ से कराई शादी
प्रेमी के साथ रहने लगी युवती
पति का घर छोड़ने के बाद युवती अपने प्रेमी के साथ रहने लगी. इसकी जानकारी जब पति को लगी तो उसने ग्वालियर हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की. पुलिस ने युवती को हिरासत लेकर पेश किया, जिसके बाद इस पूरे मामले का खुलासा हुआ.
कोर्ट ने अपने आदेश में क्या कहा ?
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान युवती ने साफ कहा कि वह अब पति के साथ नहीं रहना चाहती. कोर्ट में उसका प्रेमी भी मौजूद था. उसने कहा- 'वह प्रेमिका का ख्याल रखेगा और उसे कभी दुखी नहीं करेगा. सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने पत्नी को अपनी मर्जी से जाने की अनुमति प्रदान की. कोर्ट ने कहा कि माना कि शादीशुदा महिला यदि प्रताड़ना की शिकार है और पति के साथ नहीं रहना चाहती, तो वह अपनी मर्जी से रहने के लिए स्वतंत्र है. पति उसे जबरन अपने साथ नहीं रख सकता. हाई कोर्ट ने शासकीय अधिवक्ता अंजली ज्ञानानी और आरक्षक भावना को ‘शौर्या दीदी' नियुक्त किया है, जिससे महिला की मानसिक और भावनात्मक स्थिति को लेकर काउंसलिंग की जा सके.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं