- एमपी के चंदेरी में फर्जी आईएएस बनकर लाखों रुपये की ठगी करने वाली तृप्ति राजपूत और उसके भाई गिरफ्तार हुए.
- भोपाल में आरोपी के घर और ससुराल से आईएएस ट्रेनी के फर्जी मोमेंटो और दस्तावेजों की प्रतियां पुलिस ने जब्त की.
- आरोपियों के पास से भारत सरकार लिखी पट्टी लगी लग्जरी इनोवा कार बरामद हुई, जिसे ठगी में इस्तेमाल किया था.
एमपी के चंदेरी में फर्जी आईएएस बनकर लाखों रुपये की ठगी करने के मामले में पुलिस जांच के दौरान लगातार नए खुलासे हो रहे हैं. इस मामले की मुख्य आरोपी तृप्ति सिंह राजपूत और उसके भाई सुधांशु सिंह की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को कई अहम सुराग मिले हैं. भोपाल में आरोपी के घर और ससुराल पर की गई तलाशी में कथित आईएएस ट्रेनी अफसर के फर्जी मोमेंटो और मामले से जुड़े दस्तावेजों की प्रतियां बरामद हुई हैं.
वहीं, "भारत सरकार" की पट्टी लगाकर इस्तेमाल की जाने वाली लग्जरी इनोवा कार भी जब्त कर ली है. दरअसल, अशोकनगर जिले के चंदेरी थाना क्षेत्र में 23 अगस्त 2026 को जय कुमार कोली और उनके साथियों ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनसे फर्जी आईएएस अधिकारी बनकर 9 लाख 80 हजार रुपये की ठगी की है. शिकायत के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए भोपाल निवासी तृप्ति सिंह राजपूत और उसके भाई सुधांशु सिंह को गिरफ्तार किया.
रिमांड के दौरान भोपाल में हुई तलाशी
पुलिस रिमांड मिलने के बाद आरोपियों को भोपाल ले जाया गया. यहां बाग मुगलिया स्थित उनके घर की तलाशी ली. जांच के दौरान पुलिस को मामले से जुड़े कई दस्तावेजों की छायाप्रतियां मिलीं. पुलिस के अनुसार, ये वही दस्तावेज हैं जो फरियादी पक्ष से लिए गए थे. बरामद सामग्री को जब्त कर जांच में शामिल किया है.
ससुराल से मिले फर्जी IAS ट्रेनी के मोमेंटो
चंदेरी थाना प्रभारी प्रशांत यादव ने बताया कि जांच के दौरान पुलिस ने अलकापुरी स्थित आरोपी की ससुराल में भी तलाशी ली. यहां से कथित तौर पर आईएएस ट्रेनी अधिकारी से जुड़े कुछ मोमेंटो बरामद हुए. पुलिस को आशंका है कि इनका इस्तेमाल खुद को प्रशासनिक अधिकारी साबित करने और लोगों पर प्रभाव जमाने के लिए किया जाता था. बरामद मोमेंटो को भी साक्ष्य के तौर पर जब्त कर लिया.

पुलिस ने फर्जी मोमेंटो भी जब्त किए.
‘भारत सरकार' लिखी इनोवा कार बरामद
मामले में एक और बड़ा खुलासा तब हुआ जब पुलिस ने घटना में इस्तेमाल की गई इनोवा कार को बरामद कर लिया. पुलिस के मुताबिक, इस लग्जरी वाहन पर "भारत सरकार" लिखी पट्टी लगाई गई थी. आरोप है कि तृप्ति राजपूत और उसका भाई इसी गाड़ी का इस्तेमाल कर लोगों के बीच अपना रौब जमाते थे और खुद को प्रभावशाली अधिकारी के रूप में पेश करते थे.
कार चालक भी पुलिस हिरासत में
टीआई प्रशांत यादव के अनुसार, पुलिस ने इस मामले में इनोवा कार चलाने वाले ड्राइवर भूपेंद्र बैरागी को भी हिरासत में लिया है. भूपेंद्र बैरागी भोपाल के अयोध्या नगर का निवासी बताया गया है. पुलिस ने चालक से पूछताछ के बाद वाहन को जब्त कर लिया है. अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ से मामले से जुड़े और भी अहम तथ्य सामने आ सकते हैं.
हाई-फाई लाइफस्टाइल के मिले सुराग
विवेचना के दौरान पुलिस को ऐसे साक्ष्य भी मिले हैं, जिनसे आरोपियों की कथित आलीशान जीवनशैली की जानकारी सामने आई है. जांच में पता चला है कि आरोपी महंगे होटलों में ठहरते थे और हवाई यात्रा भी करते थे. पुलिस इन खर्चों और उनके स्रोतों की भी पड़ताल कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि ठगी की राशि का इस्तेमाल किस तरह किया गया.

आरोपियों को गिरफ्तार कर थाने ले जाती पुलिस.
सबूत मिटाने की आशंका, बढ़ी BNS की धारा
टीआई प्रशांत यादव का कहना है कि तलाशी के दौरान अधिकांश स्थानों से मूल दस्तावेज नहीं मिले, बल्कि उनकी केवल छायाप्रतियां बरामद हुईं. जांच एजेंसी को आशंका है कि मामले से जुड़े कुछ मूल दस्तावेज नष्ट किए गए हो सकते हैं. इसी आधार पर पुलिस ने साक्ष्य छिपाने या नष्ट करने से संबंधित भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 238 को भी प्रकरण में जोड़ दिया है.
फर्जीवाड़े के नेटवर्क की तलाश में पुलिस
फिलहाल चंदेरी पुलिस पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है. अधिकारियों का कहना है कि अभी तक अन्य स्थानों पर दर्ज मामलों को इस केस से नहीं जोड़ा है, लेकिन जांच जारी है. पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा कहीं इसके तार किसी बड़े नेटवर्क से तो नहीं जुड़े हैं.
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