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कोहली पर बढ़ता अध्यात्म का असर? शतक की तरह तूफान से वायरल हो रहे 'फिलॉस्फर' विराट के ये बोल

कोहली ने विंडीज के खिलाफ जीत के बाद जो बातचीत आधिकारिक ब्रॉडकास्टर के साथ की, वह कमेंट्री बॉक्स में तो चर्चा का विषय बना ही, तो वहीं करोड़ों फैंस भी उनके शब्दों से अभिभूत हैं

कोहली पर बढ़ता अध्यात्म का असर? शतक की तरह तूफान से वायरल हो रहे 'फिलॉस्फर' विराट के ये बोल
भारतीय पूर्व कप्तान विराट कोहली ने विंडीज के खिलाफ शानदार शतक जड़ा. शतक के साथ ही उनकी बातचीत भी फैंस के बीच चर्चा का विषय है
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रविवार को तिरुवनंतपुरम में विंडीज के खिलाफ कोहली का करियर का जड़ा 55वां वनडे शतक जहां कई पहलुओं से चर्चा का विषय बना हुआ है, तो कोहली के शब्द भी फैंस के बीच उतने ही चर्चा का विषय बने हुए हैं, जो उन्होंने मैच के बाद बोले.  यह तो सभी जानते ही हैं कि पिछले कुछ सालों में पूर्व कप्तान कितना ज्यादा रुझान अध्यात्म की तरफ बढ़ा है. कोहली पत्नी अनुष्का शर्मा के साथ नियमित अंतराल पर देश के अलग-अलग मंदिरों और खासकर वृंदावन स्थित प्रेमानंद महाराज के आश्रम जाते रहते हैं. विराट धर्मगुरु के बताए मार्ग पर अनुसरण भी सार्वजनिक जीवन में करते  दिखाई देते हैं. और अब यह असर साफ-साफ करोड़ों फैंस ने विंडीज के खिलाफ जीत के बाद उनकी आधिकारिक प्रसारक स्टार स्पोर्ट्स से बातचीत में भी महसूस किया. प्रसारक ने  कोहली ने किसी फिलॉस्फर (दार्शनिक) अंदाज में बात की, तो इसकी शक्ति को फैंस ने शिद्दत के साथ महसूस किया.  चलिए  जानिए कि कोहली के वो कौन से शब्द हैं, जो फैंस के बीच चर्चा बटोर रहे हैं. 

'मैं बहुत ही खुशनसीब हूं'

कोहली ने भारत की जीत के बाद कहा, 'बस मैं अपना सिर नीचे रखकर कड़ी मेहनत कर रहा हूं और उन सभी चीज़ों के लिए भगवान को धन्यवाद दे रहा हूं जिनसे मुझे नवाज़ा गया है. जीवन में मिले उन अवसरों के लिए भी, जिनकी बदौलत आज मैं इस मुक़ाम पर हूं. मेरा जीवन और यात्रा बेहद सौभाग्यशाली रही है, क्योंकि बहुत से लोग यहाँ आना चाहते हैं, लेकिन हम वे खुशनसीब लोग हैं जिन्हें यह मौक़ा मिला. इसलिए, बेहतर होगा कि हम अपना सिर झुकाकर अपने जीवन का हर दिन कड़ी मेहनत करें.'

मैदान की आक्रामकता के उलट अंदाज

विराट कोहली की यह शांत आत्म-प्रतिबिंब (सेल्फ-रिफ्लेक्शन) उस उथल-पुथल के बिल्कुल विपरीत थी जो वेस्टइंडीज के गेंदबाजों ने उनके हाथों झेली. उन्होंने अपने किसी भी वनडे मैच की पारी में कभी इतने छक्के नहीं लगाए थे (9 छक्के), जिनमें से पहला छक्का उनकी पारी की महज़ चौथी गेंद पर आया था। इसकी शुरुआत अल्ज़ारी जोसफ के साथ उनकी छोटी सी जंग से हुई, जिसके अंत तक उन्होंने 26 गेंदों में 53 रन कूट डाले थे, विराट की वनडे उपलब्धियां उन्हें एक ऐसे मुक़ाम पर रखती हैं जिसे बहुत कम लोग (अगर कोई हो तो) साझा कर सकते हैं, लेकिन उन्होंने विनम्रता का अपना वही पुराना सबक दोहराया- "ज़मीन से जुड़े रहना, कृतज्ञ रहना और अपनी जड़ों को न भूलना"

'यह भूलना आसान हो सकता है'

कोहली ने कहा 'यह एक ऐसी चीज़ है जिसे हम अक्सर दुनिया की आपाधापी और उन पदों में उलझकर भूल जाते हैं, जहां हमें बहुत अधिक ध्यान, शोहरत और प्रशंसकों से बेशुमार प्यार मिलता है. यह भूलना बहुत आसान हो सकता है कि आप कहां से आए थे. लेकिन मुझे लगता है कि जब आप एक बच्चे के रूप में अपनी शुरुआत से लेकर अब तक के सफर को पीछे मुड़कर देखते हैं, तो आपको बहुत आभार महसूस होता है.'

"एक-एक मिनट का आनंद ले रहा"

विराट आगे बोले, ' मैं भारत के लिए मैदान पर बिताए हर एक मिनट का आनंद लेता हूं क्योंकि मैं समझता हूं कि जैसा कि मैंने कहा कि ऐसी संभावना भी हो सकती थी कि मैं यहां खड़ा न होता. मैंने शायद भारत के लिए कभी खेला ही न होता. यह भी मेरी वास्तविकता हो सकती थी. लेकिन मैं अपने देश का प्रतिनिधित्व करते हुए इतने बड़े दर्शकों के सामने खेलते हुए और टीम के लिए अपना काम करते हुए इन सभी अद्भुत पलों को जी पा रहा हूं.' 

 F & Q: FREQUENTLY ASKED QUESTIONS

1. प्रश्न: विराट कोहली और अनुष्का शर्मा ने वृंदावन में प्रेमानंद महाराज से मुख्य रूप से क्या मार्गदर्शन प्राप्त किया है?

उत्तर: प्रेमानंद महाराज ने उन्हें अपने कार्यक्षेत्र (प्रोफेशनल लाइफ) को ही भगवान की सेवा मानने की सीख दी है। महाराज जी ने समझाया कि जैसे एक साधु के लिए साधना उसका भजन है, वैसे ही एक खिलाड़ी के लिए उसका खेल और कर्म ही उसकी साधना है. इसे पूरी ईमानदारी, गंभीरता और विनम्रता के साथ करना चाहिए.

2. प्रश्न: असफलता और मानसिक तनाव से उबरने को लेकर प्रेमानंद महाराज ने विराट कोहली को क्या मूल मंत्र दिया है?

उत्तर: जब विराट-अनुष्का ने असफलता और दबाव से पार पाने का मार्ग पूछा, तो महाराज जी ने निरंतर अभ्यास और वर्तमान में जीने का पाठ पढ़ाया. उन्होंने कहा कि परिणाम की चिंता किए बिना अपनी प्रक्रिया पर पूरा ध्यान देना चाहिए और भीतर से भगवान के नाम का स्मरण (नाम जप) जारी रखना चाहिए.

3. प्रश्न: विराट और अनुष्का अपनी व्यस्त जीवनशैली के बीच बार-बार वृंदावन क्यों जाते हैं?

उत्तर: अत्यधिक प्रसिद्धि, चकाचौंध और दुनिया की आपाधापी  के बीच मानसिक शांति और आंतरिक संतुलन बनाए रखने के लिए यह दंपत्ति प्रेमानंद महाराज के शरण में जाता है. वहां मिलने वाली आध्यात्मिक ऊर्जा और सत्संग उन्हें अपनी जड़ों से जुड़े रहने और अहंकार से दूर रहने की प्रेरणा देता है.

4. प्रश्न: प्रेमानंद महाराज ने मानसिक एकाग्रता और नाम जप को लेकर क्या विशेष तकनीक समझाई है?

उत्तर: महाराज जी ने उन्हें सिखाया कि नाम जप संख्या बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि तल्लीनता से होना चाहिए. जब मन, कर्म और दृष्टि एक साथ ईश्वर के नाम (जैसे 'राधा' नाम) में एकाकार हो जाते हैं, तो आंतरिक शांति और गजब की मानसिक स्पष्टता मिलती है, जो खेल या जीवन के हर क्षेत्र में मदद करती है.

5. प्रश्न: इन मुलाकातों से विराट कोहली के व्यक्तिगत जीवन और दृष्टिकोण में क्या मुख्य बदलाव देखा गया है?

उत्तर: इन आध्यात्मिक मुलाकातों के प्रभाव स्वरूप विराट कोहली के स्वभाव में और अधिक ठहराव, परिपक्वता और सादगी आई है. मैदान की आक्रामकता के इतर, वे पारिवारिक जीवन में पूरी तरह से जमीन से जुड़े नजर आते हैं और अपने हर बड़े पड़ाव या सफलता-असफलता के बाद भगवान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना कभी नहीं भूलते.

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