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Digital Arrest: रिटायर्ड कर्मचारी को डिजिटल अरेस्ट कर ऐंठ लिए 22 लाख रुपये, ठगों ने ऐसे लगाया चूना

मध्य प्रदेश के मैहर जिले में साइबर अपराधियों ने एक सेवानिवृत्त टाइम कीपर को "डिजिटल अरेस्ट" और मनी लॉन्ड्रिंग केस का झांसा देकर 22 लाख रुपये की बड़ी ठगी को अंजाम दिया है.

Digital Arrest: रिटायर्ड कर्मचारी को डिजिटल अरेस्ट कर ऐंठ लिए 22 लाख रुपये, ठगों ने ऐसे लगाया चूना

Digital Arrest Case: मनी लांड्रिंग केस का झांसा देकर डिजिटल गिरोह ने रिटायर्ड टाइम कीपर से 22 लाख रुपये की ठगी कर ली. आरोपियों ने दिल्ली पुलिस और सीबीआई अधिकारी बनकर साइबर फ्रॉड को अंजाम दिया. इस मामले में पुलिस ने तीन नामजद आरोपी पर एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है.

मध्य प्रदेश के मैहर जिले के अमरपाटन थाना क्षेत्र में साइबर अपराधियों ने एक सेवानिवृत्त कर्मचारी को "डिजिटल अरेस्ट" का भय दिखाकर 22 लाख रुपये की ठगी की सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया है. पीड़ित की शिकायत पर अमरपाटन पुलिस ने तीन आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और आईटी एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

ठगों ने ऐसे झांसा देकर लगा दिया चूना

पुलिस के मुताबिक लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) से टाइम कीपर के पद से मई 2020 में सेवानिवृत्त हुए ग्राम इटमा कोठार निवासी 69 वर्षीय मानेन्द्र सिंह के पास 5 मई 2026 को एक अज्ञात महिला का फोन आया. महिला ने अपना नाम अदिति शर्मा बताते हुए स्वयं को दिल्ली के टेलीकॉम विभाग और एनसीआरबी से जुड़ी अधिकारी बताया. उसने मानेन्द्र सिंह को बताया कि उनके नाम पर दिल्ली में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज है और दो घंटे के भीतर दिल्ली नहीं पहुंचने पर गिरफ्तारी वारंट जारी हो जाएगा.

पीड़ित को डरा  कर घर में बंधक बनाकर रखा

शिकायत के मुताबिक इसके बाद कथित आईपीएस अधिकारी सुनील कुमार गौतम और सीबीआई टीम लीडर प्रदीप सिंह बनकर अन्य लोगों ने उनसे संपर्क किया. आरोपियों ने दावा किया कि उनके नाम से एक्सिस बैंक में एक खाता संचालित हो रहा है, जिसमें करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ है. खुद को जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर आरोपियों ने लगातार व्हाट्सएप कॉल और संदेशों के जरिए बुजुर्ग को मानसिक दबाव में रखा. उन्हें किसी अन्य व्यक्ति से बात न करने और घर से बाहर न निकलने तक की हिदायत दी गई.

जांच के नाम पर ट्रांसफर करवाया पैसा

आरोपियों ने जांच के नाम पर मानेन्द्र सिंह और उनकी पत्नी की फिक्स डिपॉजिट की जानकारी हासिल कर ली. फिर उन्हें बताया गया कि आरबीआई और सीबीआई की जांच के लिए सभी राशि एक खाते में जमा करनी होगी. इसके बाद 18 मई को मानेन्द्र सिंह ने अपनी और पत्नी की चार एफडी तुड़वाकर कुल 22.69 लाख रुपये अपने इंडियन बैंक खाते में ट्रांसफर कराए. अगले दिन 19 मई को आरोपियों की ओर से भेजे गए कथित आरबीआई पत्र और बैंक विवरण के आधार पर मानेन्द्र सिंह ने 22 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के एक चालू खाते में भेज दिए. आरोपियों ने भरोसा दिलाया था कि 24 घंटे के भीतर जांच पूरी होने के बाद पूरी राशि वापस कर दी जाएगी. हालांकि, यह पैसा  फिर कभी  वापस नहीं किया गया.

फिर मांगे 8 आठ लाख तब हुआ ठगी का अहसास

इसके बाद 23 मई को आरोपियों ने दोबारा संपर्क कर आठ लाख रुपये और जमा करने का दबाव बनाया. इस दौरान संपत्ति की जांच का डर दिखाते हुए जेवर गिरवी रखने तक की सलाह दी. तब पीड़ित को संदेह हुआ और परिवार को जानकारी देने के बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. अमरपाटन थाना पुलिस ने अदिति शर्मा, सुनील कुमार गौतम और प्रदीप सिंह नामक आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4), 319(2), 308(2), 61(2) और आईटी एक्ट की धारा 66-डी के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

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पुलिस का कहना है कि यह मामला साइबर फ्रॉड का प्रतीत होता है, जिसमें अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य केंद्रीय एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और जांच के नाम पर बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करा लेते हैं. पुलिस ने लोगों से ऐसे फोन कॉल और व्हाट्सएप संदेशों से सतर्क रहने तथा किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या निकटतम पुलिस थाने से संपर्क करने की अपील की है.

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