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छात्रों से वसूले गए 75 लाख रुपये की फीस डकार गए भ्रष्ट, एमपी के दादाजी मेडिकल कॉलेज में बड़ा घोटाला आया सामने

Corruption in Madhya Pradesh: पूरा मामला 1 जनवरी 2020 से 30 जून 2024 के बीच का है. इस दौरान आरोपियों ने कई छात्रों से कॉलेज फीस के नाम पर पैसे लिए. कुल मिलाकर 74 लाख 87 हजार 998 रुपये की राशि तीनों आरोपियों द्वारा मिलकर हड़प ली गई.

छात्रों से वसूले गए 75 लाख रुपये की फीस डकार गए भ्रष्ट, एमपी के दादाजी मेडिकल कॉलेज में बड़ा घोटाला आया सामने

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में मेडिकल छात्रों से फीस वसूली के नाम पर लाखों रुपये के गबन का बड़ा मामला सामने आया है. छात्रों की शिकायत के आधार पर मोघट थाना पुलिस ने एक महिला सहित तीन लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और विश्वासघात जैसी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है.

पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने करीब साढ़े चार साल तक छात्रों से फीस वसूल कर फर्जी रसीदें दीं और लगभग 75 लाख रुपये की राशि हड़प ली.

फर्जी हस्ताक्षर कर दी जाती थीं रसीदें

जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने कॉलेज संचालक के फर्जी हस्ताक्षर कर छात्रों को फीस की रसीदें जारी कीं. छात्रों को यह विश्वास दिलाया गया कि उनकी फीस कॉलेज में जमा हो रही है, जबकि वास्तव में पूरी राशि आरोपियों द्वारा गबन की जा रही थी.

2020 से 2024 तक चलता रहा गोरखधंधा

पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, यह पूरा मामला 1 जनवरी 2020 से 30 जून 2024 के बीच का है. इस दौरान आरोपियों ने कई छात्रों से कॉलेज फीस के नाम पर पैसे लिए. कुल मिलाकर 74 लाख 87 हजार 998 रुपये की राशि तीनों आरोपियों द्वारा मिलकर हड़प ली गई.

इन आरोपियों पर दर्ज हुआ मामला

खंडवा के नाकोड़ा नगर निवासी अनिल धारवाल समेत अन्य छात्रों की शिकायत पर पुलिस ने ग्राम सुरगांव नेपानी निवासी कृष्णराज सिंह मौर्य, उनकी पत्नी रीना और प्रभु प्रेम पुरम कॉलोनी निवासी सचिन खेडेकर के खिलाफ मामला दर्ज किया है. इन पर धोखाधड़ी, विश्वासघात और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने जैसी धाराएं लगाई गई है.

पुलिस का बयान: जांच जारी, गिरफ्तारी बाकी

खंडवा के एडिशनल एसपी महेंद्र तारणेकर के अनुसार, आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर कॉलेज और छात्रों के साथ धोखाधड़ी की है. फिलहाल, मामले की जांच जारी है और अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है.

सवालों के घेरे में कॉलेज प्रशासन

इतने लंबे समय तक इतनी बड़ी रकम का गबन होते रहने पर कॉलेज प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है. यह जांच का विषय है कि आखिर इतने वर्षों तक इस गड़बड़ी की जानकारी प्रशासन को क्यों नहीं मिली.

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मामले के सामने आने के बाद भी कॉलेज प्रशासन और पीड़ित छात्र खुलकर प्रतिक्रिया देने से बच रहे हैं. हालांकि, पुलिस इस मामले की गहराई से जांच कर रही है और आने वाले समय में और खुलासे होने की संभावना है.

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