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हरियाली के नाम पर शहरों में लगाए ये पेड़ स्वास्थ्य पर डाल रहे गहरा असर, मध्य प्रदेश ने दिए हटाने के निर्देश

मध्य प्रदेश सरकार ने कोनोकार्पस और सप्तपर्णी पेड़ों को हटाने का आदेश दिया है, क्योंकि ये पेड़ मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं. इन पेड़ों से एलर्जी और अस्थमा जैसी समस्याएं हो सकती हैं.

हरियाली के नाम पर शहरों में लगाए ये पेड़ स्वास्थ्य पर डाल रहे गहरा असर, मध्य प्रदेश ने दिए हटाने के निर्देश

मध्य प्रदेश में कोनोकार्पस (Conocarpus) और सप्तपर्णी (अल्स्टोनिया स्कॉलरिस, Alstonia scholaris) के पेड़ों के लगाने पर रोक लगा दी गई है. राज्य में यह अगर कहीं लगे भी हैं तो इन्हें हटाने का आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (Central Empowered Committee-CEC) ने कोनोकार्पस के पेड़ों पर अध्ययन किया था, जिसमें पता चला कि यह पेड़ मानव स्वास्थ्य के साथ जलवायु के लिए भी ठीक नहीं है. अब इनकी जगह स्थानीय प्रजाति के पेड़ लगाने के निर्देश दिए हैं.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट कोनोकार्पस के पेड़ों को लेकर पहले ही चेतावनी दे चुका है. इसके अलावा देश के 5 राज्य पहले ही कोनोकार्पस पर बैन लगा चुके हैं. अध्ययन में इन पेड़ों से लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभावों की पुष्टि हो चुकी है.

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एमपी में हजारों कोनोकार्पस के पेड़

मध्य प्रदेश के नगरीय प्रशासन विभाग ने 9 जनवरी को सर्कुलर जारी किया था. प्रदेश में से अब हजारों कोनोकार्पस और सप्तपर्णी या मिल्की पाइन (Milky Pine) के पेड़ हटाए जाएंगे. बता दें कि इन पेड़ों को ज्यादातर शहरों में हरियाली के नाम पर सड़कों और पार्कों में लगाया गया है. कई जगह पेड़ चार दशक से भी ज्यादा पुराने हैं. स्थानीय निकायों को सबी जगहों से पेड़ हटाने का आदेश दे दिया है. नगरीय प्रशासन की SOR सूची से भी कोनोकार्पस और सप्तपर्णी को हटाया जाएगा.

इन राज्यों ने हटाए कोनोकार्पस के पेड़

CEC ने बताया कि गुजरात और तमिलनाडु भी कोनोकार्पस के पेड़ों को हटाकर स्थानीय प्रजाति के वृक्षों को लगाने का आदेश दे चुके हैं. इनके अलावा  कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश एवं असम राज्य भी इन पेड़ों पर रोक लगा चुके हैं और उनकी जगह स्थानीय पेड़ लगा रहे हैं.

सप्तपर्णी वृक्ष के नुकसान (Side Effects of Alstonia scholaris)

यह पेड़ अस्थमा, सर्दी-खांसी और सांस की तकलीफ की परेशानी पैदा करता है.

कोनोकार्पस के नुकसान (Conocarpus Side Effects)

  • स्थानीय जैव-विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र में अवांछनीय परिवर्तन.
  • भू-जल का अत्यधिक दोहन.
  • एलर्जी उत्तेजक पराग (Pollen) और अन्य कारणों से जन स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव.

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