विज्ञापन

वक्फ बोर्ड के 'DJ बैन' वाले फरमान पर हाईकोर्ट का ब्रेक, निर्देशों के अमल पर लगी अंतरिम रोक

छत्तीसगढ़ में दरगाहों और उर्स जैसे धार्मिक आयोजनों में डीजे, धूमाल और नाच-गाने पर बैन लगाने के वक्फ बोर्ड के फैसले को बड़ा झटका लगा है. दरअसल, बिलासपुर हाईकोर्ट ने बोर्ड के इस आदेश के साथ ही  ₹50,000 के जुर्माने वाले प्रावधान पर अंतरिम रोक लगा दी है.

वक्फ बोर्ड के 'DJ बैन' वाले फरमान पर हाईकोर्ट का ब्रेक, निर्देशों के अमल पर लगी अंतरिम रोक
बिलासपुर हाईकोर्ट.
NDTV

छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के एक बेहद चर्चित और विवादित फैसले पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने फिलहाल अंतरिम रोक लगा दी है. वक्फ बोर्ड ने हाल ही में एक आदेश जारी कर सूबे की तमाम दरगाहों, उर्स और दूसरे मुस्लिम धार्मिक आयोजनों में डीजे (DJ), धूमाल, बैंड-बाजा और नाच-गाने जैसी गतिविधियों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था. अदालत के इस ताजा रुख के बाद अब बोर्ड का यह विवादित निर्देश फिलहाल राज्य में प्रभावी नहीं रहेगा.

इस पूरे मामले की सुनवाई छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस एके प्रसाद की एकलपीठ के समक्ष हुई. वक्फ बोर्ड के इस कड़े फैसले को सुफी इस्लामिक बोर्ड के संचालक मंडल के सदस्य फिरोज शाह अहमद ने अदालत में चुनौती दी थी. याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता देवेंद्र प्रताप सिंह ने बोर्ड के इस आदेश को असंवैधानिक और अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया.

क्या था वक्फ बोर्ड का मूल आदेश?

दरअसल, यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ था, जब छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड ने बीते 11 जून 2026 को एक आधिकारिक आदेश जारी किया था. इस आदेश में साफ कहा गया था कि दरगाहों और उर्स के मौकों पर डीजे बजाना, धूमाल लाना और नृत्य-संगीत जैसे कार्यक्रम करना मजहबी रीतियों के खिलाफ है, इसलिए इन पर तुरंत रोक लगाई जाए. इतना ही नहीं, वक्फ बोर्ड ने अपने इस फरमान को सख्ती से लागू करवाने के लिए डंडे का भी इंतजाम किया था. आदेश में प्रावधान था कि जो भी इस नियम का उल्लंघन करेगा या दरगाह परिसरों में डीजे-धूमाल बजाएगा, उस पर ₹50,000 तक का भारी-भरकम जुर्माना ठोका जाएगा. बोर्ड के इस आदेश के बाद से ही राज्य के मुस्लिम समाज और विभिन्न कमेटियों के बीच इस पर बहस छिड़ गई थी.

वक्फ बोर्ड के अधिकार क्षेत्र पर छिड़ी कानूनी जंग

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के बीच जोरदार कानूनी बहस देखने को मिली. वक्फ बोर्ड के वकीलों ने दलील दी कि जितने भी ऐसे धार्मिक और कव्वाली जैसे आयोजन होते हैं, वे अधिकांशतः वक्फ संपत्तियों की सीमाओं के भीतर ही आयोजित किए जाते हैं. ऐसे में बोर्ड के पास अपनी संपत्तियों की गरिमा और धार्मिक शुचिता बनाए रखने के लिए इस तरह के दिशा-निर्देश या नियम जारी करने का पूरा कानूनी अधिकार है. दूसरी तरफ, याचिकाकर्ता के वकील देवेंद्र प्रताप सिंह ने इस दलील का पुरजोर विरोध किया. उन्होंने अदालत के सामने वक्फ बोर्ड के इस आदेश की वैधता पर ही गंभीर सवाल खड़े कर दिए. उन्होंने तर्क दिया कि बोर्ड को इस तरह से लोगों की धार्मिक आस्था, जश्न के तरीकों और परंपराओं पर मनमाना प्रतिबंध लगाने और भारी जुर्माना वसूलने का कोई कानूनी अधिकार क्षेत्र प्राप्त नहीं है.

अगली सुनवाई में होगा पूरा फैसला

जस्टिस एके प्रसाद की एकलपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलों को बेहद बारीकी से सुनने के बाद प्रथम दृष्टया मामले को विचारणीय माना. अदालत ने स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए वक्फ बोर्ड की ओर से 11 जून 2026 को जारी किए गए मूल आदेश के प्रभाव और उसके क्रियान्वयन पर तत्काल प्रभाव से 'अंतरिम स्थगन' लगा दिया.

 यह भी पढ़ें- Psycho Killer: छोटी-छोटी बातों से नाराज 'सीरियल किलर ने एक-एक कर 8 लोगों को उतार दिया मौत के घाट, 'दरिंदा, ऐसे बनाता था शिकार

आने वाली अगली सुनवाइयों में अदालत इस बात की गहराई से समीक्षा करेगी कि क्या वाकई वक्फ बोर्ड के पास ऐसे प्रतिबंध लगाने के कानूनी अधिकार हैं? क्या धार्मिक आयोजनों में डीजे-धूमाल पर प्रतिबंध लगाना कानूनन सही है? जब तक हाईकोर्ट इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं सुना देता, तब तक छत्तीसगढ़ में उर्स और दरगाहों पर पहले की तरह ही कार्यक्रम आयोजित किए जा सकेंगे.

 यह भी पढ़ें-  एमपी UCC ड्राफ्टिंग कमेटी की बैठक में मुसलमानों की दो टूक, पर्सनल लॉ में दखल बर्दाश्त नहीं

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Chhattisgarh Waqf Board, Chhattisgarh Waqf Board Advisory, Chhattisgarh Waqf Board Controversy, Chhattisgarh News, Raipur News
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com