दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने 25 साल पुराने एक मामले में CBI के एक मौजूदा जॉइंट डायरेक्टर और दिल्ली पुलिस के एक रिटायर्ड अधिकारी को दोषी करार दिया. कोर्ट ने दोनों अधिकारियों जॉइंट डायरेक्टर रमनीश और रिटायर्ड असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस वीके पांडे को तीन महीने की जेल की सजा सुनाई. हालांकि, बाद में अदालत ने 50,000 रुपये के निजी मुचलके पर उन्हें जमानत दे दी. कोर्ट के इस फैसले के बाद डायरेक्टर रमनीश गीर चर्चा में आ गए. जानिए, कौन हैं रमनीश गीर?
जानिए क्या है मामला?
यह मामला 1985 बैच के आईआरएस अधिकारी अशोक कुमार अग्रवाल की शिकायत से जुड़ा है, जो उस समय दिल्ली में डिप्टी डायरेक्टर ऑफ एनफोर्समेंट के पद पर कार्यरत थे. अग्रवाल का आरोप था कि 19 अक्टूबर 2000 को उनके घर पर छापा मारा गया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. इसके बाद 38 दिन तक अशोक कुमार अग्रवाल को जेल में रहना पड़ा.
कोर्ट ने अपने आदेश में क्या कहा?
इस मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपने फैसले में कहा- 'यह रेड सिर्फ केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (सीएटी) के 28 सितंबर 2000 के आदेश को नाकाम करने के उद्देश्य से की गई थी. सीएटी ने अपने आदेश में अग्रवाल के निलंबन की चार सप्ताह के भीतर समीक्षा करने के निर्देश दिए थे. इस आदेश का पालन करने की जगह सीबीआई अधिकारियों ने 18 अक्टूबर 2000 की शाम को एक गुप्त बैठक की और अगले दिन सुबह अग्रवाल के घर पर छापा मारकर उन्हें गिरफ्तार करने की योजना बनाई. अदालत ने इस कार्रवाई को एक सोची-समझी साजिश करार दिया. अदालत ने कहा- यह कार्रवाई न केवल अवैध थी, बल्कि अधिकारियों ने अपने पद का इस्तेमाल करते हुए एक निर्दोष अधिकारी को परेशान करने की कोशिश की.
कोर्ट ने सुनाई तीन महीने की सजा
29 अप्रैल को तीस हजारी कोर्ट के जज शशांक नंदन भट्ट ने सीबीआई के जॉइंट डायरेक्टर रमनीश और रिटायर्ड असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस वीके पांडे को तीन महीने की सजा सुनाई. इसके बाद 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर उन्हें जमानत दे दी.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं