केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) ने पुलिस अधिकारियों के हित में एक अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि कैडर रिव्यू कोई औपचारिक या विवेकाधीन प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह केंद्र और राज्य सरकार का अनिवार्य दायित्व है. इस प्रक्रिया में की गई देरी को प्रशासनिक उदासीनता या निष्क्रियता के आधार पर उचित नहीं ठहराया जा सकता.
CAT की युगलपीठ, जिसमें सदस्य मालिनी अय्यर और सदस्य अखिल कुमार श्रीवास्तव शामिल हैं, ने मध्य प्रदेश पुलिस एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और राज्य सरकार को अतिरिक्त कैडर रिव्यू की प्रक्रिया 120 दिनों के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए हैं.
अधिवक्ताओं ने बताया कि इस देरी के कारण राज्य पुलिस सेवा के कई पात्र अधिकारी पदोन्नति और आईपीएस कैडर में इंडक्शन के संवैधानिक अधिकार से वंचित हो रहे हैं. याचिका में यह भी कहा गया कि यदि यही स्थिति बनी रही तो कई अधिकारी 56 वर्ष की आयु सीमा पार कर जाएंगे, जिससे उनके लिए आईपीएस कैडर में शामिल होने का अवसर हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा.
याचिका में यह भी रेखांकित किया गया कि अन्य राज्यों की तुलना में मध्य प्रदेश के अधिकारी काफी पिछड़ चुके हैं, जिससे असमानता की स्थिति उत्पन्न हो गई है. CAT ने अपने आदेश में कहा कि कैडर रिव्यू में इस तरह की अनावश्यक देरी से संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत अधिकारियों को प्राप्त समानता और पदोन्नति से जुड़े मौलिक अधिकार प्रभावित होते हैं.
ट्रिब्यूनल ने सरकारों की निष्क्रियता को अधिकारियों के भविष्य से खिलवाड़ बताते हुए राज्य पुलिस सेवा अधिकारियों के पक्ष में राहतकारी आदेश पारित किया.
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