- मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के दो जजों ने भोजशाला मंदिर–कमाल मौला मस्जिद परिसर का करीब पचास मिनट तक निरीक्षण किया.
- निरीक्षण के दौरान धार कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिकारी भी मौजूद रहे.
- जजों ने परिसर के खंभे, शिलालेख और संरचना का अध्ययन कर इसके ऐतिहासिक और स्थापत्य पक्षों को समझा.
Bhojshala Temple Controversy: मध्य प्रदेश के धार की ऐतिहासिक भोजशाला मंदिर–कमाल मौला मस्जिद एक बार फिर चर्चा में है. इस लंबे समय से चल रहे विवाद में 2 अप्रैल यानी हनुमान जयंती के दिन होने वाली अहम सुनवाई से पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जजों ने खुद मौके पर पहुंचकर स्थल का निरीक्षण किया. यह दौरा ऐसे समय हुआ है, जब मामले पर अदालत में फैसला होने की प्रक्रिया आगे बढ़ने वाली है, इसलिए इस निरीक्षण को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
हाईकोर्ट जजों ने किया स्थल निरीक्षण
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ के न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी शनिवार दोपहर धार पहुंचे. दोनों जज करीब 1 बजकर 50 मिनट पर भोजशाला मंदिर–कमाल मौला मस्जिद परिसर में दाखिल हुए और लगभग 55 मिनट तक वहां मौजूद रहे. निरीक्षण के बाद वे 2 बजकर 45 मिनट के आसपास वहां से रवाना हो गए.
प्रशासन और ASI अधिकारियों की रही मौजूदगी
निरीक्षण के दौरान धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा, पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधिकारी भी जजों के साथ मौजूद रहे. ASI के अधिकार क्षेत्र में आने वाले इस परिसर के अलग‑अलग हिस्सों का जायजा लिया गया और इसके ऐतिहासिक व स्थापत्य पक्षों से जुड़ी जानकारी जजों को दी गई.
खंभों और शिलालेखों का अध्ययन
निरीक्षण के दौरान जजों ने भवन के खंभों, शिलालेखों और संरचना को बारीकी से देखा. उन्होंने परिसर के इतिहास और निर्माण शैली को समझने की कोशिश की, ताकि मामले से जुड़े तथ्यों को बेहतर तौर पर जाना जा सके. जजों के दौरे के दौरान पूरे परिसर में कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए थे. भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा और आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगाई गई. पहले ही निर्देश दिए गए थे कि निरीक्षण के दौरान कोई भी याचिकाकर्ता या पक्षकार मौके पर मौजूद नहीं रहेगा.
क्या है पूरा मामला?
हिंदू समुदाय इस स्थल को वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद के रूप में देखता है. यह विवाद 11वीं सदी से जुड़े ऐतिहासिक ढांचे को लेकर वर्षों से चला आ रहा है और फिलहाल मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है.
हनुमान जयंती पर होगी अहम सुनवाई
भोजशाला मंदिर–कमाल मौला मस्जिद विवाद को लेकर अगली अहम सुनवाई 2 अप्रैल को तय है, जो हनुमान जयंती के दिन होगी. माना जा रहा है कि जजों के इस स्थल निरीक्षण से अदालत को मामले के तथ्यों को समझने में मदद मिलेगी. निरीक्षण के बाद धार और आसपास के इलाकों में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. सभी की नजरें अब 2 अप्रैल की सुनवाई पर टिकी हैं.
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