- नोएडा एयरपोर्ट को दिल्ली के निकट एक आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल डिजाइन के साथ राष्ट्र को समर्पित किया गया
- एयरपोर्ट का डिजाइन यूपी की सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय लाल ग्रेनाइट पत्थर से प्रभावित है
- सुविधा के लिए एयरपोर्ट में सेल्फ बैग ड्रॉप, सेल्फ बोर्डिंग और चेहरे की पहचान आधारित डिजी यात्रा तकनीक
उत्तर प्रदेश की विकास गाथा में आज एक नया अध्याय जुड़ा. देश की राजधानी दिल्ली से सटे नोएडा में अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे को राष्ट्र को समर्पित किया गया. इस एयरपोर्ट का लंबे समय से इंतजार किया जा रहा है, जो आज जाकर खत्म हुआ. यह एयरपोर्ट कई मायनों में खास है. लेकिन क्यों और इसकी क्या है वजह, आइए आपको बताते हैं.
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का आईएटीए कोड 'डीएक्सएन' (DXN) यानी अगर आप यहां से यात्रा करेंगे या कहीं से आएंगे तो आपके टिकट पर यही कोड लिखा दिखेगा. अब बात एयरपोर्ट के खासियत की. एयरपोर्ट की विशेषता यह है कि इसे आधुनिक तकनीक, भारतीय संस्कृति और पर्यावरण-अनुकूल डिजाइन के साथ तैयार किया जा रहा है.

हाईटेक एयरपोर्ट के डिजाइन में यूपी की झलक
नोएडा एयरपोर्ट का डिजाइन उत्तर प्रदेश की परंपरा और भारतीय संस्कृतिक विरासत से प्रेरित है. टर्मिनल में स्थानीय लाल ग्रेनाइट पत्थर का इस्तेमाल हुआ है. इसकी संरचना हरिद्वार और वाराणसी के घाटों जैसी बनाई गई है. एंट्री का एरिया उत्तर प्रदेश की पारंपरिक हवेलियों से प्रेरित नजर आता है. वहीं, हवाईअड्डे के अंदर यूपी की कला, हस्तशिल्प और कपड़ों की सजावट होगी. ऊंची छत और खुला माहौल यात्रियों को आरामदायक अनुभव प्रदान करेगा. सुरक्षा जांच के बाद ओपन-एयर एरिया है, जहां यात्री ताजी हवा में बैठ सकेंगे.

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आधुनिक तकनीक से लैस एयरपोर्ट
नोएडा एयरपोर्ट को पूरी तरह से आधुनिक तकनीक से लैस किया गया है, ताकि यात्रियों को ज्यादा सुविधा और कम समय में काम पूरा करने में मदद मिले. यहां सेल्फ बैग ड्रॉप की सुविधा होगी, यानी बिना लंबी लाइन में लगे यात्री खुद ही अपना सामान जमा कर सकेंगे. सेल्फ बोर्डिंग गेट भी होंगे, जहां यात्री खुद स्कैन करके आसानी से अंदर जा सकेंगे. सभी गेट डिजी यात्रा (DigiYatra) से जुड़े होंगे, जिससे चेहरे की पहचान के जरिए एंट्री जल्दी और आसान हो जाएगी. अमेडियस का आधुनिक चेक-इन और बैगेज सिस्टम लगाया गया है, जिससे चेक-इन प्रक्रिया तेज होगी. एसआईटीए (SITA) का सिस्टम एयरपोर्ट के पूरे संचालन को बेहतर तरीके से संभालेगा. सामान के लिए तेज और स्मार्ट बैगेज हैंडलिंग सिस्टम होगा, ताकि बैग जल्दी मिल सकें और इंतजार कम करना पड़े. साथ ही, काइंड्रिल द्वारा 24×7 आईटी सपोर्ट मिलेगा, जिससे सिस्टम हमेशा सही तरीके से काम करता रहेगा.

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खानें-पीने से लेकर शॉपिंग तक की सुविधा
हवाईअड्डे के भीतर अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय ब्रांड्स की रिटेल और ड्यूटी-फ्री दुकानें भी है ताकि लोगों को शॉपिंग का भी विकल्प मिल सके. खाने-पीने की कोई असुविधा न हो सके इसके लिए कई मल्टी-क्यूजीन रेस्टोरेंट है. इसके अलावा “ब्रज की गलियां” नाम से खास शाकाहारी रेस्टोरेंट है, जहां स्वाटिष्ट और ताजा व्यंजन यात्रियों को खाने को मिलेगा. इतना ही नहीं, कोस्टा कॉफी, चायोस और केएफसी जैसे ब्रांड भी एयरपोर्ट के भीतर उपलब्ध है. यात्रियों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो इसके लिए प्रीमियम लाउंज में बुफे, लाइव फूड स्टेशन, कॉकटेल बार और स्पा की भी व्यवस्था की गई है. इसके अलावा वेटिंग एरिया में लग्जरी कुर्सी के अलावा डिजाइनिंग सिटिंग इंतजाम है.
एयरपोर्ट में प्रार्थना कक्ष से लेकर फीडिंग रूम तक का की व्यवस्था है. यात्रियों को बहुत दूर तक पैदल न चलना पड़े है इसके लिए गोल्फ कार्ट भी हवाईअड्डे पर उपलब्ध रहेगा. कुल मिलाकर, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को आधुनिक तकनीक, सांस्कृतिक पहचान और पर्यावरण-अनुकूल सोच के साथ एक विश्वस्तरीय एयरपोर्ट के रूप में विकसित किया जा रहा है. यह एयरपोर्ट आने वाले समय में भारत को एविएशन क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर और मजबूत करने की दिशा एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा.
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