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भिंड गेहूं घोटाले में बड़ा एक्शन, समिति प्रबंधक समेत 4 पर FIR दर्ज; फर्जी पंजीयन कर बेचा करोड़ों का अनाज

भिंड में गेहूं उपार्जन में 1.83 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा उजागर हुआ था. आरोपियों ने दूसरों की जमीन पर फर्जी पंजीयन कर गेहूं को सरकारी उपार्जन केंद्रों पर MSP पर बेच दिया गया.

भिंड गेहूं घोटाले में बड़ा एक्शन, समिति प्रबंधक समेत 4 पर FIR दर्ज; फर्जी पंजीयन कर बेचा करोड़ों का अनाज
भिंड गेहूं उपार्जन घोटाला: दूसरों की जमीन पर फर्जी पंजीयन कर बेचा करोड़ों का अनाज

Wheat procurement scam in Bhind: मध्य प्रदेश के भिंड जिले में गेहूं उपार्जन के दौरान हुए करोड़ों रुपये के MSP घोटाले में लगातार कार्रवाई की जा रही है. तीन महिलाओं सहित चार फर्जी किसानों पर एफआईआर दर्ज होने के बाद अब पुलिस ने दो सहकारी समिति प्रबंधकों और दो कंप्यूटर ऑपरेटरों के खिलाफ भी मामला दर्ज कर लिया है. इस कार्रवाई के बाद सहकारी समितियों में हड़कंप मच गया है. वहीं जांच का दायरा बढ़ने से कई अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है.

करोड़ों का गेहूं उपार्जन घोटाला

मिहोना थाना प्रभारी रोहित गुप्ता ने कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी सुनील कुमार मुद्गल की जांच रिपोर्ट के आधार पर सेवा सहकारी संस्था जैतपुरा के प्रभारी संजीव पाठक, कंप्यूटर ऑपरेटर राहुल कुमार, सेवा सहकारी संस्था मिहोना के प्रभारी सीताराम मानिक और कंप्यूटर ऑपरेटर सौरभ बरुआ के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू कर दी है. पुलिस अब पूरे प्रकरण से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है.
जांच में सामने आया कि वर्ष 2026-27 की पंजीयन नीति का उल्लंघन करते हुए 10 मार्च को रबी उपार्जन के दौरान किसानों के नाम पर गलत भूमि विवरण और रकबा दर्ज कर फर्जी पंजीयन किए गए. इन फर्जी पंजीयनों के जरिए बाजार से सस्ते दामों में गेहूं खरीदकर उसे सरकारी उपार्जन केंद्रों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर बेच दिया गया, जिससे करोड़ों रुपये का लाभ कमाया.

कलेक्टर के आदेश पर जांच

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब कलेक्टर किरोड़ी लाल मीना को गेहूं उपार्जन में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े की शिकायत मिली. इसके बाद उन्होंने लहार एसडीएम विजय यादव को जांच की जिम्मेदारी सौंपी. एसडीएम ने कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी सुनील कुमार मुद्गल को विस्तृत जांच के निर्देश दिए. खाद्य विभाग से प्राप्त पंजीयन सूची, किसानों के खसरे, राजस्व रिकॉर्ड और संबंधित पटवारियों के सत्यापन के आधार पर जांच की गई. जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि जिन सर्वे नंबरों और भूमि रिकॉर्ड के आधार पर उपार्जन पंजीयन कराया गया था. उनमें आरोपी भूमि स्वामी के रूप में दर्ज ही नहीं थे. इतना ही नहीं, वास्तविक जमीन मालिकों की कोई लिखित सहमति नहीं ली गई थी और न ही बटाई का कोई वैध अनुबंध प्रस्तुत किया गया था.

फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी खरीद केंद्रों पर बेचा गया गेहूं

इसके बावजूद फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पंजीयन कराकर सरकारी खरीद केंद्रों पर गेहूं बेच दिया गया. सूत्रों के अनुसार, लहार क्षेत्र की एक दर्जन से अधिक सहकारी समितियों के प्रबंधकों और कंप्यूटर ऑपरेटरों की भूमिका भी जांच के दायरे में है, जिसमें 9 समिति प्रबंधकों को सस्पेंड किया जा चुका है. एसडीएम विजय यादव के निर्देश पर कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी सुनील कुमार मुद्गल ने लहार थाने में एक दर्जन से अधिक सहकारी समिति प्रबंधक और ऑपरेटरों की जांच सौंपी गई हैं, जिनकी पुलिस जांच कर रही है. शुरुआती जांच में कई अन्य मामलों में भी गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं.

पुलिस का कहना है कि दस्तावेजों की जांच जारी है. यदि जांच के दौरान अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाएगी. प्रशासन का मानना है कि इस पूरे फर्जीवाड़े का उद्देश्य सरकारी उपार्जन केंद्रों पर अवैध रूप से गेहूं बेचकर करोड़ों रुपये का लाभ कमाना था. 

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