"मुस्कुराइए कि आप लखनऊ में हैं..." उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की बात चलते ही जेहन में कबाब, नवाब, और यहां की खास तहजीब की खुशबू तैरने लगती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस शहर को हम हिंदी और उर्दू में 'लखनाऊ' या 'लखनऊ' बोलते और लिखते हैं, अंग्रेजी में उसकी स्पेलिंग LUCK-NOW क्यों लिखी जाती है? कायदे से तो इसे 'Lakhnau' होना चाहिए था, फिर इसमें 'Luck' (किस्मत) और 'Now' (अब) का यह अजीब संयोग कैसे जुड़ गया?
Lucknow Name History: इसके साथ ही एक बड़ा सवाल यह भी उठता है कि 'लखनऊ' नाम असल में आया कहां से? क्या यह कोई उर्दू या नवाबी नाम है, या फिर इसका कनेक्शन प्राचीन संस्कृत भाषा से है? आइए, इतिहास के पन्नों को पलटते हैं और जानते हैं कि इस नाम के पीछे की बेहद रोचक कहानी क्या है.
संस्कृत, उर्दू या अवधी: कहां से आया 'लखनऊ' नाम?
कई लोगों का मानाना है कि लखनऊ क्योंकि नवाबों का शहर रहा है, इसलिए यह नाम उर्दू या फारसी से निकला होगा. लेकिन इतिहास और पौराणिक कथाएं कुछ और ही कहती हैं. चलिए एक सैर करते हैं लखनऊ के इतिहास की...
1. भगवान राम के भाई 'लक्ष्मण' से कनेक्शन (सस्कृत मूल):
Incredible India (भारतीय पर्यटन मंत्रालय) और यमुना अथॉरिटी की आधिकारिक ऐतिहासिक रिपोर्ट्स के मुताबिक, लखनऊ का इतिहास सीधे तौर पर रामायण काल से जुड़ा है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान श्रीराम लंका विजय के बाद अयोध्या लौटे, तो उन्होंने अपने छोटे भाई लक्ष्मण को उपहार स्वरूप यह क्षेत्र भेंट किया था.

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लक्ष्मण जी ने यहां एक नगर बसाया, जिसे 'लक्ष्मणपुरी' या 'लक्ष्मणवती' कहा जाता था. शहर के पुराने हिस्से में स्थित 'लक्ष्मण टीला' आज भी इस बात का गवाह माना जाता है. समय के साथ, प्राकृत और स्थानीय अवधी भाषा के प्रभाव के कारण 'लक्ष्मणपुरी' नाम बदलकर 'लखनपुर' हुआ, फिर 'लखनावती' और धीरे धीरे यह अपभ्रंश होकर 'लखनऊ' (Lakhnau) बन गया.
2. देवी लक्ष्मी और लखन पासी की थ्योरी:
इतिहासकारों का एक धड़ा यह भी मानता है कि इस शहर का नाम धन की देवी लक्ष्मी के नाम पर पहले 'लक्ष्मीनावती' था, जो बाद में लखनाऊ हुआ. वहीं, एक अन्य स्थानीय इतिहास के अनुसार, 11वीं 12वीं शताब्दी में यहां के प्रतापी राजा 'लखन पासी' थे, जिनके नाम पर इसे लखनपुर और बाद में लखनऊ कहा जाने लगा.
यानी, यह साफ है कि 'लखनऊ' शब्द का मूल आधार संस्कृत और प्राचीन भारतीय संस्कृति से जुड़ा है, न कि उर्दू से. नवाबों (जैसे नवाब आसफ उद दौला) ने 1775 में अवध की राजधानी को फैजाबाद से यहां शिफ्ट किया था, जिससे इस प्राचीन शहर को 'नवाबी पहचान' मिली.

Lucknow में ‘Luck' और ‘Now' – क्या ये सच में किस्मत से जुड़ा नाम है, या इसके पीछे छिपा है अंग्रेजों का इतिहास? जिस शहर को हम ‘लखनऊ' कहते हैं, उसकी spelling इतनी अलग क्यों है? जवाब आपको हैरान कर देगा...
फिर 'Lakhnau' की जगह 'Lucknow' कैसे हो गया?
अब आते हैं सबसे बड़े सवाल पर कि इसकी अंग्रेजी स्पेलिंग इतनी अलग क्यों है? इसका जवाब छिपा है भारत के औपनिवेशिक इतिहास और अंग्रेजों के बात करने के तरीके (Accent) में.
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारी और अंग्रेज जब 18वीं शताब्दी में अवध के क्षेत्र में आए, तो उन्हें स्थानीय भारतीय नामों को बोलने (Pronounce) और लिखने में बड़ी दिक्कत होती थी. उनकी जीभ भारतीय शब्दों के शुद्ध उच्चारण के अनुकूल नहीं थी.
अंग्रेजों का 'एंग्लिसाइजेशन' खेल:
अंग्रेजों की एक आदत थी कि वे भारतीय शहरों के नामों को अपने लहजे में ढाल लेते थे. जैसे उन्होंने 'कानपुर' को Cawnpore बना दिया, 'त्रिवेंद्रम' को Trivandrum कर दिया और 'उधगमंडलम' को Ooty. ठीक इसी तरह, जब उन्होंने 'लखनाऊ' सुना, तो उनके लिए 'Lakh nau' बोलना थोड़ा मुश्किल और अजीब था. उन्होंने इसे अपनी सहूलियत के हिसाब से अंग्रेजी रंग में ढाला और इसे 'Lucknow' लिखना शुरू कर दिया.
चूंकि उस दौर में सारे सरकारी दस्तावेज, नक्शे और रेलवे के रिकॉर्ड अंग्रेजों द्वारा ही तैयार किए जाते थे, इसलिए आधिकारिक तौर पर 'Lucknow' स्पेलिंग ही दर्ज हो गई और आज तक पूरी दुनिया में इसी स्पेलिंग का इस्तेमाल किया जा रहा है.
क्या 'Luck Now' के पीछे कोई छिपा हुआ मतलब है?
इंटरनेट और सोशल मीडिया पर एक मजेदार थ्योरी यह भी चलती है कि चूंकि अंग्रेजों के लिए यह शहर बेहद समृद्ध और भाग्य बदलने वाला साबित हुआ था, इसलिए उन्होंने इसे "Luck + Now" (यानी 'अभी किस्मत चमकी') नाम दे दिया. हालांकि, इतिहासकार इसे महज एक इत्तेफाक या भाषाई अपभ्रंश (Anglicised version) ही मानते हैं. इसका किसी जादुई 'किस्मत' से लेना देना नहीं था, बल्कि यह सिर्फ अंग्रेजों द्वारा नाम को बिगाड़कर बोलने का नतीजा था.
सीधा जवाब: ‘Lucknow' स्पेलिंग अंग्रेजों द्वारा किए गए उच्चारण के बदलाव (Anglicisation) का नतीजा है, असली नाम ‘लखनऊ' संस्कृत मूल से आया है.
नाम बदला, पर तहजीब वही रही
चाहे इसे प्राचीन काल की 'लक्ष्मणपुरी' कहें, नवाबों का 'लखनऊ' कहें या अंग्रेजों का दिया हुआ 'Lucknow' इस शहर की रूह आज भी वही है. संस्कृत की प्राचीनता से लेकर उर्दू की नफासत तक, लखनऊ के नाम और इसकी स्पेलिंग का यह सफर खुद में भारत के बहुरंगी इतिहास को समेटे हुए है. यही वजह है कि यह विषय आज भी भाषाविदों और आम लोगों के बीच कौतूहल का विषय बना रहता है.
स्रोत (Sources):
Incredible India (incredibleindia.gov.in) - लखनऊ के तोपोनॉमी (Toponymy) और 'लक्ष्मणवती' इतिहास पर आधारित.
Lucknow District Administration (lucknow.nic.in) - 'लक्ष्मणपुरी' से 'लखनपुरी' के ऐतिहासिक बदलावों के आधिकारिक गजेटियर डेटा के अनुसार.
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