कोलकाता:
उत्तरी कोलकाता में एक निर्माणाधीन फ्लाईओवर का एक हिस्सा गिर जाने से कम से कम 21 लोगों की मौत हो गई, जबकि 60 से ज्यादा लोग जख्मी हो गए। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से चंद दिनों पहले हुए इस हादसे की वजह से सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस को काफी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा है ।
अपुष्ट सूत्रों के मुताबिक, इस हादसे में गिरे एक बड़े से बीम की चपेट में लोगों और वाहनों के आने की वजह से मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। इस बीच, फ्लाईओवर बनाने वाली कंपनी ने इस हादसे को 'भगवान की करनी' करार दिया, जिसके लिए उसे आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।
पश्चिम बंगाल सरकार ने हादसे की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। हालांकि, सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है। विपक्ष ने ममता बनर्जी सरकार पर बेपरवाही का आरोप लगाया है।
पलटवार करते हुए सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि पिछली वाम मोर्चा सरकार के शासनकाल में इस फ्लाईओवर के निर्माण का काम शुरू हुआ और वही इसके लिए जिम्मेदार है ।
पुलिस ने कहा कि बड़ा बाजार इलाके में हुए इस हादसे में 21 लोग मारे गए, जबकि कई जख्मी हुए। इस इलाके में शहर का सबसे बड़ा थोक बाजार है। घायलों को पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया। दो पुलिसकर्मी और एक जोरबागान ट्रैफिक सार्जेंट संदीप हलदार गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

राज्य प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि 62 लोग घायल हुए हैं और उन्हें अस्पताल ले जाया गया है, जबकि अन्य कई लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका है।
चारों ओर से आलोचनाएं झेल रही फ्लाईओवर निर्माण कंपनी हैदराबाद की आईवीआरसीएल कंस्ट्रक्शन कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी पांडुरंग राव ने दावा किया, 'यह और कुछ नहीं बल्कि भगवान की करनी है।' पुलिस ने आईवीआरसीएल के स्थानीय दफ्तर को सील कर दिया है और कंपनी के खिलाफ आईपीसी की धारा 304, 308 और 407 के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
मुख्य सचिव वासुदेव बनर्जी ने कहा कि फ्लाईओवर गिरने के मामले की उच्च-स्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
कंक्रीट और इस्पात के मलबे के तले कई वाहन भी दबे हुए हैं। सीसीटीवी फुटेज में कारें, ऑटो रिक्शा और रेहड़ी-पटरी वाले मलबे में दबे दिख रहे हैं। कुछ लोग जो वहां से भागने का प्रयास कर रहे थे, वे भी मलबे में दब गए।
सीमेंट मिलाने वाली मशीन के नीचे से खून से सना एक हाथ बाहर निकाल कर कोई मदद की गुहार लगा रहा था। आसपास के लोग अंदर फंसे हुए लोगों के लिए पानी की बोतलें दे रहे हैं।
थलसेना कर्मियों की पांच टुकड़ियों (जिनमें जवानों की संख्या करीब 300 होगी), एनडीआरएफ, राज्य आपदा प्रबंधन, कोलकाता पुलिस के जवानों और दमकल की गाड़ियों ने बचाव अभियानों में हिस्सा लिया।
अपना चुनावी दौरा बीच में ही खत्म कर घटनास्थल का दौरा करने वाली मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, 'निर्माण कंपनी के अधिकारियों और इसमें शामिल अन्य लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।' घटनास्थल का दौरा करने वाले पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी ने इस मामले में राज्य सरकार से रिपोर्ट तलब की है।

ममता ने कहा, 'टेंडर 2009 में पूर्ववर्ती वाम मोर्चा सरकार द्वारा दिया गया था और यह हैदराबाद की आईवीआरसीएल कंस्ट्रक्शंस को दिया गया।' उन्होंने कहा कि बार-बार याद दिलाने के बावजूद कंपनी ने सरकार को कंस्ट्रक्शन योजना की जानकारी मुहैया नहीं कराई है ।
मुख्य सचिव वासुदेव बनर्जी ने मृतकों के निकटतम परिजन को पांच-पांच लाख रुपये, गंभीर रूप से घायलों को तीन-तीन लाख रुपये और अन्य घायलों को एक-एक लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की है।
उन्होंने कहा, 'सभी घायलों के इलाज का खर्च सरकार वहन करेगी।' इस 2.2 किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर का निर्माण कार्य 2009 में वाम मोर्चा के शासन काल में शुरू हुआ था।
मलबे को हटाने और घायलों को बचाने के लिए बड़ी-बड़ी क्रेनों और राहत वाहनों को काम पर लगाया गया है।
अपुष्ट सूत्रों के मुताबिक, इस हादसे में गिरे एक बड़े से बीम की चपेट में लोगों और वाहनों के आने की वजह से मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। इस बीच, फ्लाईओवर बनाने वाली कंपनी ने इस हादसे को 'भगवान की करनी' करार दिया, जिसके लिए उसे आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।
पश्चिम बंगाल सरकार ने हादसे की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। हालांकि, सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है। विपक्ष ने ममता बनर्जी सरकार पर बेपरवाही का आरोप लगाया है।
पलटवार करते हुए सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि पिछली वाम मोर्चा सरकार के शासनकाल में इस फ्लाईओवर के निर्माण का काम शुरू हुआ और वही इसके लिए जिम्मेदार है ।
पुलिस ने कहा कि बड़ा बाजार इलाके में हुए इस हादसे में 21 लोग मारे गए, जबकि कई जख्मी हुए। इस इलाके में शहर का सबसे बड़ा थोक बाजार है। घायलों को पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया। दो पुलिसकर्मी और एक जोरबागान ट्रैफिक सार्जेंट संदीप हलदार गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

राज्य प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि 62 लोग घायल हुए हैं और उन्हें अस्पताल ले जाया गया है, जबकि अन्य कई लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका है।
चारों ओर से आलोचनाएं झेल रही फ्लाईओवर निर्माण कंपनी हैदराबाद की आईवीआरसीएल कंस्ट्रक्शन कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी पांडुरंग राव ने दावा किया, 'यह और कुछ नहीं बल्कि भगवान की करनी है।' पुलिस ने आईवीआरसीएल के स्थानीय दफ्तर को सील कर दिया है और कंपनी के खिलाफ आईपीसी की धारा 304, 308 और 407 के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
मुख्य सचिव वासुदेव बनर्जी ने कहा कि फ्लाईओवर गिरने के मामले की उच्च-स्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
कंक्रीट और इस्पात के मलबे के तले कई वाहन भी दबे हुए हैं। सीसीटीवी फुटेज में कारें, ऑटो रिक्शा और रेहड़ी-पटरी वाले मलबे में दबे दिख रहे हैं। कुछ लोग जो वहां से भागने का प्रयास कर रहे थे, वे भी मलबे में दब गए।
सीमेंट मिलाने वाली मशीन के नीचे से खून से सना एक हाथ बाहर निकाल कर कोई मदद की गुहार लगा रहा था। आसपास के लोग अंदर फंसे हुए लोगों के लिए पानी की बोतलें दे रहे हैं।
थलसेना कर्मियों की पांच टुकड़ियों (जिनमें जवानों की संख्या करीब 300 होगी), एनडीआरएफ, राज्य आपदा प्रबंधन, कोलकाता पुलिस के जवानों और दमकल की गाड़ियों ने बचाव अभियानों में हिस्सा लिया।
अपना चुनावी दौरा बीच में ही खत्म कर घटनास्थल का दौरा करने वाली मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, 'निर्माण कंपनी के अधिकारियों और इसमें शामिल अन्य लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।' घटनास्थल का दौरा करने वाले पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी ने इस मामले में राज्य सरकार से रिपोर्ट तलब की है।

ममता ने कहा, 'टेंडर 2009 में पूर्ववर्ती वाम मोर्चा सरकार द्वारा दिया गया था और यह हैदराबाद की आईवीआरसीएल कंस्ट्रक्शंस को दिया गया।' उन्होंने कहा कि बार-बार याद दिलाने के बावजूद कंपनी ने सरकार को कंस्ट्रक्शन योजना की जानकारी मुहैया नहीं कराई है ।
मुख्य सचिव वासुदेव बनर्जी ने मृतकों के निकटतम परिजन को पांच-पांच लाख रुपये, गंभीर रूप से घायलों को तीन-तीन लाख रुपये और अन्य घायलों को एक-एक लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की है।
उन्होंने कहा, 'सभी घायलों के इलाज का खर्च सरकार वहन करेगी।' इस 2.2 किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर का निर्माण कार्य 2009 में वाम मोर्चा के शासन काल में शुरू हुआ था।
मलबे को हटाने और घायलों को बचाने के लिए बड़ी-बड़ी क्रेनों और राहत वाहनों को काम पर लगाया गया है।
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