पैसेंजर प्लेन या एयरपोर्ट में कई बार बम रखे जाने या फिर बम होने की सूचना मिलती है, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो जाती हैं और एयरपोर्ट पर तलाशी शुरू होती है. अक्सर ऐसी खबरें अफवाह या फिर जानबूझकर दी गई गलत सूचना होती है. हालांकि इस तरह की किसी भी खबर या धमकी को हल्के में नहीं लिया जाता है. जब भी प्लेन में बम होने की सूचना मिलती है तो पायलट को तुरंत कुछ चीजें करनी होती हैं. करीब 30 साल तक पायलट रहे कैप्टन वीके भल्ला ने एनडीटीवी से बातचीत में समझाया था कि जब किसी उड़ते हुए विमान (फ्लाइट) में बम होने की धमकी मिलती है, तो पायलट और एटीसी (ATC) क्या कदम उठाते हैं.
पायलट को कैसे मिलती है सूचना?
कैप्टन भल्ला ने बताया कि हवा में प्लेन उड़ा रहे पायलट को बम होने की सूचना कई तरह से मिल सकती है. कभी-कभी एयरलाइंस कंपनी को सीधे मैसेज मिल जाता है, कभी एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को जानकारी दी जाती है, तो कभी कंपनी के दफ्तर में कोई चिट्ठी या स्लिप भेज दी जाती है. इसके बाद प्लेन के पायलट को तुरंत ये सूचना दी जाती है.
धमकी मिलने के बाद पायलट क्या करते हैं?
कैप्टन भल्ला के मुताबिक बम होने की सूचना या धमकी मिलने पर कभी भी ये बात पैसेंजर तक लीक नहीं होती है. विमान में किसी तरह का पैनिक न फैले, इसलिए आम तौर पर यात्रियों को इस बात की जानकारी तुरंत नहीं दी जाती है. पायलट-इन-कमांड सबसे पहले अपने केबिन क्रू (एयर होस्टेस और अन्य स्टाफ) को भरोसे में लेता है और उन्हें केबिन पर नजर रखने और तैयार रहने को कहता है.
लैंडिंग के बाद क्या होता है?
जैसे ही प्लेन लैंड होता है, इसे एयरपोर्ट के सामान्य हिस्से में नहीं ले जाया जाता. उसे सबसे दूर 'रिमोट बे' पर खड़ा किया जाता है, जिससे अगर कोई ब्लास्ट हो भी, तो जान-माल का ज्यादा नुकसान न हो. इसके बाद सुरक्षा एजेंसियां तुरंत विमान को घेर लेती हैं. सबसे पहले सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला जाता है और उसके बाद बम निरोधक दस्ता बम की तलाश शुरू कर देता है. विमान को पूरी तरह सैनिटाइज किया जाता है और बम मिलते ही उसे डिफ्यूज करने का प्रोसेस शुरू होता है.
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