NCERT ने हाल ही में 9वीं कक्षा के लिए सोशल साइंस की किताब जारी की है. 'अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी- इंडिया एंड बियॉन्ड (पार्ट 2)' नाम की इस किताब में उन शासकों का जिक्र किया गया है, जिन्होंने मुगलों से लोहा लिया था. इसमें मदुरै के राजा रंगकृष्ण मुथु वीरप्पा नायक का भी जिक्र है, जिन्होंने मुगलों को ऐसा जवाब दिया कि वो उन्हें हमेशा के लिए याद रह गया. दरअसल साम्राज्यों पर अपनी हुकूमत और ताकत दिखाने के लिए औरंगजेब जूती भेजता था, जिसके आगे राजाओं को सिर झुकाना पड़ता था. मुगल शासन के दूत ये जूती लाते और राजा को इसे अपनी गद्दी पर रखना होता था. हालांकि मदुरै के मुथु वीरप्पा नायक ने ऐसा करने से इनकार कर दिया.
जूती के सामने झुकने से किया इनकार
मदुरै के रंगकृष्ण मुथु वीरप्पा नायक ने मुगल दरबार से आई इस जूती के सामने झुकने से इनकार किया और इसे पहन लिया. इतना ही नहीं, इस जूती को लेकर आए दूतों को भी बुरी तरह से पिटवाकर वापस भेज दिया गया. ये वो दौर था, जब मुगल बादशाह औरंगजेब ने जूती भेजकर हुकूमत जताने की प्रथा शुरू की थी. वीरप्पा नायक ने इस प्रथा को चुनौती दी और मुगलों के खिलाफ खुलकर आवाज बुलंद की. भारत के कई हिस्सों में ये कहानी काफी मशहूर है.
सबक सिखाने के लिए बनाया प्लान
मदुरै के राजा काफी चालाक थे, जब मुगल सैनिकों का काफिला तिरुचिरापल्ली के उत्तरी छोर पर पहुंचा, तो राजा रंगकृष्ण मुथु वीरप्पा नायक पहले से ही जानते थे कि वो क्यों आए हैं. उन्होंने मुगल बादशाह को सबक सिखाने के लिए एक प्लान बनाया. अपने सेवकों से सैनिकों को मैसेज पहुंचाया कि राजा बीमार हैं और वो बाहर नहीं आ सकते हैं. ऐसे में सेना को बाहर छोड़कर कुछ दूत अंदर आए, उन्हें लगा कि राजा उनके पास सिर झुकाए आएंगे, लेकिन वीरप्पा नायक शान से अपने सिंहासन पर बैठे थे.
इसके बाद राजा को देखकर गुस्साए मुगलों ने जूती राजा के सामने की और कहा कि वो अपना फर्ज समझकर इसे सलाम करे, हालांकि राजा ने जोर से चिल्लाते हुए उस जूती को नीचे रखने का हुक्म दे दिया. इसके बाद उसे पहनते हुए उन्होंने दूतों से कहा कि इसकी दूसरी जोड़ी कहां है? दूत कुछ समझ पाते कि राजा ने उन्हें पीटने का आदेश दे दिया. इसके बाद बाहर खड़ी सेना को भी पूरी ताकत के साथ खदेड़ दिया और सैकड़ों मुगलों को मौत के घाट उतारा.
खुद करते थे रियासत का दौरा
मदुरै के राजा रंगकृष्ण मुथु वीरप्पा नायक उन राजाओं में से थे, जो सीधे जनता के साथ जुड़ना पसंद करते थे. वो आराम करने की बजाय लगातार हर इलाके में घूमते और काम में लापरवाही पर कड़ी फटकार लगाते, वहीं जो लोग मेहनत करते थे, वो उन्हें इनाम भी देते थे. यही वजह थी कि उनका नाम पूरे इलाके में सम्मान से लिया जाता था.
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