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भारत में नक्सलियों के आतंक की वो बड़ी घटनाएं जिनसे हिल गया देश, क्या अगले 48 घंटों में खत्म होगा लाल आतंक?

नक्सलवाद की घटनाएं भारत के इतिहास का वो काला अध्याय हैं, जहां जंगलों में छिपे हमलों ने कई परिवारों को उजाड़ दिया. सुकमा से दरभा घाटी तक हुए हमलों ने देश को बार-बार झकझोरा और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े किए.

भारत में नक्सलियों के आतंक की वो बड़ी घटनाएं जिनसे हिल गया देश, क्या अगले 48 घंटों में खत्म होगा लाल आतंक?
29 जून 2008 को ओडिशा और आंध्र प्रदेश की सीमा पर नक्सलियों ने एक जलाशय (रिजर्वायर) में जा रही नाव को निशाना बनाया.

8 Major Naxal Attacks : देशभर से नक्सलवाद के खात्मे के लिए गृहमंत्री अमित शाह ने जो डेडलाइन तय की थी, उसमें अब महज 2 दिन बचे हैं. 31 मार्च 2026 तक भारत को 'नक्सल मुक्त' बनाने का लक्ष्य है. खबर है कि छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा के जंगलों में अब सिर्फ 100-150 नक्सली ही बचे हैं, जिनके खिलाफ 50 हजार जवानों ने 'आखिरी प्रहार' की तैयारी कर ली है. इस बीच आइए जानते हैं नक्सलियों के वो 8 बड़े हमले, जिन्होंने पूरे देश की रूह कंपा दी थी.

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सुकमा हमला (2010): देश का सबसे बड़ा नक्सली हमला

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के ताड़मेटला के जंगलों में 6 अप्रैल 2010 को नक्सलियों ने अब तक का सबसे भीषण हमला किया. CRPF की टीम रूटीन गश्त पर थी, तभी करीब 1000 नक्सलियों ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया. इस कायराना हमले में 75 जवान शहीद हो गए थे.

दरभा घाटी (2013): नेताओं का काफिला बना निशाना

25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ की दरभा घाटी में नक्सलियों ने कांग्रेस नेताओं की गाड़ियों के काफिले पर हमला बोल दिया. ये नेता चुनावी रैली से लौट रहे थे. इस हमले में 'सलवा जुडूम' के संस्थापक महेंद्र कर्मा और वीसी शुक्ला समेत 18 लोग मारे गए. इसने पूरी राज्य सरकार को हिलाकर रख दिया था.

चित्रकोंडा (2008): नाव पर घात लगाकर हमला

29 जून 2008 को ओडिशा और आंध्र प्रदेश की सीमा पर नक्सलियों ने एक जलाशय (रिजर्वायर) में जा रही नाव को निशाना बनाया. इस नाव पर आंध्र प्रदेश की स्पेशल एंटी-नक्सल फोर्स 'ग्रेहाउंड' के जवान सवार थे. इस हमले में 38 जांबाज जवान शहीद हुए थे.

सुकमा हमला (2017): सड़क बना रहे जवानों पर अटैक

24 अप्रैल 2017 को सुकमा में एक बार फिर खून-खराबा हुआ. सीआरपीएफ की 74वीं बटालियन के जवान वहां बन रही एक सड़क की सुरक्षा में तैनात थे. अचानक नक्सलियों ने उन पर हमला कर दिया, जिसमें 25 जवानों ने अपनी जान गंवाई. जवाबी कार्रवाई में 10 से 12 नक्सली भी मारे गए थे.

राजनांदगांव (2009): एक साल में मची तबाही

छत्तीसगढ़ के ही राजनांदगांव में 13 जुलाई 2009 को एक बड़ा हमला हुआ, जिसमें 30 पुलिसकर्मी शहीद हो गए. साल 2009 नक्सलियों के आतंक का चरम था, जब एक ही साल के भीतर अलग-अलग हमलों में कुल 200 से ज्यादा लोगों की जान गई थी.

नारायणपुर (2010): पेट्रोलिंग से लौटते समय हमला

29 जून 2010 को छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में नक्सलियों ने सीआरपीएफ की 39वीं बटालियन को निशाना बनाया. जवान अपनी पेट्रोलिंग पूरी करके लौट रहे थे, तभी घात लगाकर बैठे नक्सलियों ने उन पर गोलियां बरसानीं शुरू कर दीं. इस हमले में 26 जवान शहीद हुए थे.

सिल्दा (2010): कैंप के अंदर खूनी खेल

पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले के सिल्दा में 15 फरवरी 2010 को नक्सलियों ने एक खौफनाक वारदात को अंजाम दिया. उन्होंने सीआरपीएफ कैंप पर तब हमला किया जब कई जवान निहत्थे थे और रसोई में खाना बना रहे थे. इस हमले में 20 जवानों शहीद हो गए थे.

गढ़चिरौली (2009 और 2019): महाराष्ट्र बॉर्डर पर आतंक

महाराष्ट्र का गढ़चिरौली जिला भी नक्सलियों के निशाने पर रहा है. अक्टूबर 2009 में रूटीन एक्सरसाइज कर रहे 17 पुलिस जवानों की हत्या कर दी गई. 2019 में नक्सलियों ने एक लैंडमाइन ब्लास्ट किया, जिसमें 15 पुलिसकर्मी शहीद हुए.

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