ईरान के सुप्रीम लीडर रहे अयातुल्ला अली खामेनेई को आखिरी विदाई दी जा रही है. ईरान में खामेनेई के जनाजे के लिए कई देशों के प्रतिनिधि भी आए हैं, जिसमें भारत का नाम भी शामिल है. 4 जुलाई से खामेनेई का अंतिम संस्कार कार्यक्रम शुरू होगा और चार दिन बाद 9 जुलाई को उन्हें ईरान के पवित्र शहर मशहद में दफनाया जाएगा. ईरान के सुप्रीम लीडर को दफनाने की इस पूरी प्रक्रिया के बीच ईरान के शहर 'मशहद' की खूब चर्चा है, जिसका धार्मिक महत्व इस्लाम में काफी ज्यादा है. इस पूरे कार्यक्रम के बीच मशहद शहर के महत्व और इसके मतलब को समझने के लिए हमने इस्लामिक मामलों के जानकार डॉ. मुख्ताज आलम रिज्वी से बातचीत की, जिन्होंने बताया कि खामेनेई को इसी शहर में क्यों दफनाया जा रहा है और इस्लाम धर्म को मानने वालों के लिए ये शहर कितना पवित्र है.
क्यों खास है ईरान का 'मशहद' शहर?
इस्लामिक एक्सपर्ट डॉ रिज्वी ने बताया, ईरान में 'मशहद' इसलिए मुकद्दस (पवित्र) माना जाता है, क्योंकि वहां 8वें इमाम इमाले अली रजा खरौजा हैं. यही वजह कि पूरी दुनिया के शिया मुस्लिम जियारत के लिए यहां भारी संख्या में आते हैं. अयातुल्ला अली खामेनेई भी खुद यहीं से आते हैं, यही वजह है कि उन्हें यहां दफनाया जा रहा है. मशहद को शहादत का शहर भी कहा जाता है. मशहद में मेहमान खाना भी बना हुआ है, जहां मेहमान होना लोग फक्र की बात समझते हैं. पूरा ईरान मानता है कि इन्हीं की वजह से आज हम दुनिया में पहचाने जाते हैं और हमारी रोजी-रोटी इन्हीं की देन है.
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क्या होता है 'मशहद' का मतलब?
'मशहद' अरबी भाषा का एक शब्द है, जिसका असली मतलब शहादत का स्थान है. यानी वो जगह, जहां किसी खास की शहादत हुई हो. 818 ईस्वी में इमाम रजा की शहादत यहां हुई थी, जिसके बाद दुनियाभर से शिया मुस्लिम यहां आने लगे. आज दुनिया इसे 'मशहद' का शहर भी कहती है. इस्लाम के कई बड़े विद्वान और शिया गुरु भी यहीं दफ्न होने की इच्छा जाहिर करते हैं.
खामेनेई को भी शहीद मानते हैं ईरान के लोग
अमेरिकी हमलों में मारे गए सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को भी ईरान में शहीद का दर्जा दिया जा रहा है. ऐसे में उन्हें शहादत के शहर मशहद में दफनाने का एक अलग ही मैसेज दिया जा रहा है. हालांकि खामेनेई खुद इसी शहर में पैदा हुए थे और उन्होंने शुरुआती पढ़ाई भी यहीं से की थी. अब खामेनेई को उनकी जन्मभूमि और इमाम रजा की शहादत वाली जगह पर दफ्न किया जा रहा है, जो उनके परिवार के लिए भी एक सम्मान की बात है.
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