शराब के नशे में इंसान को झूमते हुए कई बार देखा होगा. हिसाब से ज्यादा शराब पीने के बाद इंसान अपने होशो-हवास खो बैठता हैं. इंसान पर शराब का नशा इतना हावी हो जाता है कि उनके सामने शेर जैसा जानवर भी आ जाए तो भी वो खुद को शेर समझते हैं. यहां तक कि कुछ लोग तो शराब पीने के बाद ढेर ही हो जाते हैं. कोई सड़क किनारे पड़ा मिलता है, तो कोई शराब के ठेके के बाहर ही चित हो जाता है. लेकिन आपने कभी सोचा है कि क्या शराब का असर सिर्फ इंसानों पर ही होता है, या फिर जानवरों पर भी? आपने देखा होगा कि बंदर और कुत्ते समेत कई जानवर अनजाने में शराब पी लेते हैं, लेकिन क्या शराब पीने के बाद उनको भी इंसान की तरह नशा होता है या नहीं, आइए जानते हैं.
जानवरों पर शराब का असर
रिपोर्ट्स की मानें तो, जानवरों के लिए शराब का सेवन कोई नई बात नहीं है. आप इस बात से हैरान होंगे कि इंसान जिस शराब का सेवन करते हैं, वो प्रकृति में इथेनॉल के रूप में मौजूद है. मगर प्रकृति में इसके बनने का प्रोसेस अलग है. यह तब बनती है, जब फलों में मौजूद शक्कर, खमीर से होकर फर्मेंटेशन की प्रक्रिया से गुजरती है. रिपोर्ट्स की मानें तो, बीते एक दशक से खमीर से एथेनॉल बन रहा है. रिसर्च के मुताबिक, कई जानवरों में शराब को पचाने के खास एंजाइम पाए जाते हैं और इसी कारण जानवर शराब पीने के बाद खुद को संभालने में मजबूत होते हैं. बंदर, गोरिल्ला और चिंपैंजी में तो इंसान जैसे जीन पाए जाते हैं और इसी कारण उनमें शराब को पचाने का खास एंजाइम होता है.
शराब से क्यों आकर्षित होते हैं जानवर?
अब सवाल यह है कि जानवर शराब के प्रति इतने संवेदनशील क्यों हैं. वैज्ञानिकों की मानें तो जानवर के मस्तिष्क में न्यूरोट्रांसमीटर डोपामाइन है, जो उन्हें सुख में खुशी का एहसास कराता है. जब जानवर गलती से अल्कोहल का सेवन कर लेते हैं, तो उनके दिमाग में डोपामाइन की मात्रा बढ़ने लगती है और इसी वजह से जानवरों को खुशी का एहसास होता है.
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