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नाबालिग बेटा एक्सीडेंट करे तो पिता को क्यों होती है जेल? जानें क्या कहता है कानून

Minor Driving Rules: 23 साल का साहिल अपनी बाइक से ऑफिस जा रहा था, तभी तेज रफ्तार कार ने उसे टक्कर मार दी और इस हादसे में उसकी मौत हो गई. कार को नाबालिग युवक चला रहा था.

नाबालिग बेटा एक्सीडेंट करे तो पिता को क्यों होती है जेल? जानें क्या कहता है कानून
नाबालिग एक्सीडेंट कर दे को क्या होता है

Underage Driving Law: दिल्ली के द्वारका इलाके में एक युवक ने तेज रफ्तार कार से कहर मचा दिया. नाबालिग युवक की स्कॉर्पियो की स्पीड इतनी थी कि इसने बाइक पर चल रहे 23 साल के साहिल धनेशरा को जोरदार टक्कर मार दी. इस हादसे में साहिल की मौत हो गई. बताया गया है कि नाबालिग युवक अपनी कार में अपनी बहन के साथ स्पीड रिकॉर्ड वाली रील बना रहा था, तभी ओवर स्पीडिंग के चलते ये हादसा हो गया. पुलिस ने बताया है कि इस मामले में आरोपी के पिता के खिलाफ भी चार्जशीट की जा रही है. अब ऐसे में सवाल है कि जब भी नाबालिग कोई एक्सीडेंट करता है तो उसके पिता को जेल जाने का खतरा क्यों रहता है. आइए जानते हैं कि इसे लेकर क्या कानून है और पिता को कितनी सजा मिल सकती है. 

इस एक्ट के तहत होता है मामला दर्ज

जब भी कोई नाबालिग गाड़ी चलाता हुआ पाया जाता है या फिर कोई एक्सीडेंट करता है तो ऐसे मामले में मोटर व्हीकल एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जाता है.  मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 199(A) में कहा गया है कि अगर कोई नाबालिग सड़क पर कार या बाइक चलाते हुए एक्सीडेंट करता है तो इसकी जिम्मेदारी उसके अभिभावकों की होती है. ऐसे में गाड़ी के मालिक या पिता के खिलाफ मामला दर्ज होता है और फिर गिरफ्तारी भी हो सकती है. 

मोटर व्हीकल एक्ट के तहत ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर गाड़ी की चाबी देने वाले परिजनों को तीन साल तक की जेल हो सकती है. साथ ही इसमें 25 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया जाता है. नाबालिग अगर कार चलाते हुए पकड़ा जाता है तो 25 हजार का चालान होता है. 

ज्यादातर मामलों में क्यों नहीं होती गिरफ्तारी?

अब भले ही कानून में तीन साल तक की सजा का प्रावधान हो, लेकिन ऐसे ज्यादातर मामलों में गिरफ्तारी काफी कम देखी जाती है. इसकी वजह कानून में छोटे लूपहोल हैं. ऐसे मामलों में परिजन अपने वकील के जरिए ये साबित कर देते हैं कि उनकी जानकारी के बिना नाबालिग गाड़ी लेकर चला गया था, ऐसे में वो सजा से बच सकते हैं. इसीलिए इनमें जुर्माना लगाया जाता है और परिजनों को पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है. 

क्या है दिल्ली का मामला?

मामला 3 फरवरी का है, जब 23 साल का साहिल अपनी बाइक से ऑफिस जा रहा था. तभी सामने से आ रही तेज रफ्तार स्कॉर्पियो कार ने उसे जोरदार टक्कर मार दी और बिना ब्रेक लगाए वहां से फरार हो गया. टक्कर इतनी जोरदार थी कि साहिल बुरी तरह से घायल हो गया और कुछ ही देर में उसने दम तोड़ दिया. इस दौरान एक कैब ड्राइवर भी चपेट में आ गया. मृतक साहिल को उसकी मां ने अकेले पाला था और वो उनका इकलौता सहारा था. फिलहाल आरोपी नाबालिग को जुवानाइल जस्टिस बोर्ड से अंतरिम जमानत मिल गई है. 

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