Padma Awards 2026: भारत सरकार ने 2026 के पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी है, जिनमें 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्मश्री शामिल हैं. इस साल की लिस्ट में झामुमो के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित करने का फैसला लिया गया है. यह सम्मान न केवल एक व्यक्ति का बल्कि पूरे आदिवासी समाज और झारखंड के दशकों लंबे जन-संघर्ष का सम्मान माना जा रहा है.
जीवन की बदली दिशा
शिबू सोरेन का जन्म 1944 में रामगढ़ के नेमरा गांव में हुआ था. उनके जीवन में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब महज 12 साल की उम्र में सूदखोरों ने उनके पिता सोबरन मांझी की हत्या कर दी. इस घटना के बाद शिबू ने संकल्प लिया कि वे आदिवासियों को महाजनी प्रथा के शोषण से मुक्त कराएंगे.
हम सबके प्रिय, सम्माननीय और आदरणीय बाबा स्व दिशाेम गुरुजी शिबू सोरेन जी को पद्म भूषण सम्मान से घोषणा के लिए, झारखंड की समस्त जनता की ओर से मै केंद्र सरकार को हार्दिक आभार और धन्यवाद देता हूं।
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) January 25, 2026
स्व दिशोम गुरुजी का जीवन राजनीतिक सीमाओं से कहीं परे, अनंत तक जाता है। उनका संपूर्ण…
'धान काटो आंदोलन'
पिता की हत्या के बाद उन्होंने वर्षों तक कानूनी लड़ाई लड़ी. इस दौरान परिवार को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन यही संघर्ष उन्हें जनआंदोलन की राह पर ले गया. शिबू सोरेन ने गांव-गांव जाकर आदिवासियों को संगठित किया. उनके नेतृत्व में चला 'धान काटो आंदोलन' आज भी इतिहास के पन्नों में दर्ज है, जिसमें आदिवासी महिलाएं खेतों में उतरतीं और पुरुष पहरा देते थे. कई मामलों में उन्हें जेल जाना पड़ा और कई बार अंडरग्राउंड भी रहना पड़ा.
साल 2000 में लंबे संघर्ष के बाद बिहार से अलग होकर 'झारखंड' राज्य का सपना पूरा हुआ. वे तीन बार 2005, 2008 और 2009 में झारखंड के मुख्यमंत्री और दो बार केंद्र में मंत्री रहे.
एक युग का अंत और सम्मान
4 अगस्त 2025 को दिल्ली में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया था. झारखंड विधानसभा ने सर्वसम्मति से उन्हें भारत रत्न देने का प्रस्ताव भी पारित किया था, जिसके बाद आदिवासियों को हक और अपनी अलग पहचान बनाने के लिए केंद्र सरकार उन्हें पद्म भूषण सम्मान दे रही है.
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