राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को चिट्ठी सौंपते बाबूलाल मरांडी
रांची:
झारखंड विकास मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को एक चिट्ठी सौंपी है. झारखंड विकास मोर्चा का कहना है कि यह चिट्ठी भाजपा के तत्कालीन झारखंड प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र राय ने राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को लिखी है. चिट्ठी तत्कालीन झारखंड प्रदेश के प्रभारी त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा राष्ट्रीय अध्यक्ष को भेजी गयी. इस चिट्ठी में लिखा है कि झारखंड विकास मोर्चा के सभी छह विधायक, जो झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए, उन्होंने पैसे लेकर बीजेपी का दामन थामा. इतना ही नहीं, इस चिट्ठी में यह भी लिखा है कि किस विधायक को किस नेता ने किसके संरक्षण में कितने पैसे दिये.
बताते दें कि इस चिट्ठी में बकाया राशि का भुगतान करने का जिम्मा राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने लिया था. इस चिट्ठी को राज्यपाल को सौंपने के बाद बाबूलाल मरांडी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मीडिया को इसकी प्रति उपलब्ध करायी. बता दें कि 2014 के विधानसभा चुनाव में झारखंड विकास मोर्चा ने आठ सीटों पर जीत हासिल की थी. आठ में से छह विधायक सरकार बनते वक्त बीजेपी में शामिल हो गये. उस वक्त से इस मामले की सुनवाई विधानसभा अध्यक्ष कर रहे हैं.
चिट्ठी के मुताबिक- गणेश गंझू, जो सिमरिया के विधायक हैं, उन्होंने बीजेपी में शामिल होने के लिए दो करोड़ रुपये चतरा के सांसद सुनील कुमार सिंह से लिये. मामले की निगरानी राकेश प्रासद कर रहे थे. रणधीर कुमार सिंह, जो सारठ से विधायक हैं, उन्होंने बीजेपी में शामिल होने के लिए दो करोड़ रुपये महेश पोद्दार (जो अभी झारखंड से राज्यसभा सांसद हैं) से लिये. मामले की निगरानी दीपक प्रकाश कर रहे थे.
नवीन जायसवाल, जो हटिया से विधायक हैं, उन्होंने बीजेपी में शामिल होने के लिए दो करोड़ रुपये नगर विकास मंत्री सीपी सिंह से लिये. मामले की निगरानी प्रदीप कुमार वर्मा कर रहे थे. अमर कुमार बाउरी, जो चंदनकियारी से विधायक हैं, उन्होंने बीजेपी में शामिल होने के लिए एक करोड़ रुपये विधायक विरंची नारायण से लिये. मामले की निगरानी संजय सेठ कर रहे थे. आलोक कुमार चौरसिया, जो डाल्टनगंज से विधायक हैं, उन्होंने बीजेपी में शामिल होने के लिए दो करोड़ रुपये अनंत ओझा से लिये. मामले की निगरानी उषा पांडे कर रही थीं. जानकी कुमार यादव, जो बरकट्ठा से विधायक हैं, उन्होंने बीजेपी में शामिल होने के लिए दो करोड़ रुपये मुख्यमंत्री रघुवर दास से लिये. मामले की निगरानी राजेंद्र सिंह कर रहे थे.
बताते दें कि इस चिट्ठी में बकाया राशि का भुगतान करने का जिम्मा राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने लिया था. इस चिट्ठी को राज्यपाल को सौंपने के बाद बाबूलाल मरांडी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मीडिया को इसकी प्रति उपलब्ध करायी. बता दें कि 2014 के विधानसभा चुनाव में झारखंड विकास मोर्चा ने आठ सीटों पर जीत हासिल की थी. आठ में से छह विधायक सरकार बनते वक्त बीजेपी में शामिल हो गये. उस वक्त से इस मामले की सुनवाई विधानसभा अध्यक्ष कर रहे हैं.
चिट्ठी के मुताबिक- गणेश गंझू, जो सिमरिया के विधायक हैं, उन्होंने बीजेपी में शामिल होने के लिए दो करोड़ रुपये चतरा के सांसद सुनील कुमार सिंह से लिये. मामले की निगरानी राकेश प्रासद कर रहे थे. रणधीर कुमार सिंह, जो सारठ से विधायक हैं, उन्होंने बीजेपी में शामिल होने के लिए दो करोड़ रुपये महेश पोद्दार (जो अभी झारखंड से राज्यसभा सांसद हैं) से लिये. मामले की निगरानी दीपक प्रकाश कर रहे थे.
नवीन जायसवाल, जो हटिया से विधायक हैं, उन्होंने बीजेपी में शामिल होने के लिए दो करोड़ रुपये नगर विकास मंत्री सीपी सिंह से लिये. मामले की निगरानी प्रदीप कुमार वर्मा कर रहे थे. अमर कुमार बाउरी, जो चंदनकियारी से विधायक हैं, उन्होंने बीजेपी में शामिल होने के लिए एक करोड़ रुपये विधायक विरंची नारायण से लिये. मामले की निगरानी संजय सेठ कर रहे थे. आलोक कुमार चौरसिया, जो डाल्टनगंज से विधायक हैं, उन्होंने बीजेपी में शामिल होने के लिए दो करोड़ रुपये अनंत ओझा से लिये. मामले की निगरानी उषा पांडे कर रही थीं. जानकी कुमार यादव, जो बरकट्ठा से विधायक हैं, उन्होंने बीजेपी में शामिल होने के लिए दो करोड़ रुपये मुख्यमंत्री रघुवर दास से लिये. मामले की निगरानी राजेंद्र सिंह कर रहे थे.
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Babulal Marandi, Jharkhand Assembly Elections 2014