- बैठक का मुख्य विषय गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियां और तकनीकी प्रगति के प्रभाव पर केंद्रित होगा
- चर्चा में साइबर खतरों, सूचना सुरक्षा और डिजिटल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा जैसे मुद्दे प्रमुख होंगे
- आतंकवाद-रोधी सहयोग और इंटेलिजेंस शेयरिंग के माध्यम से सदस्य देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को और मजबूत किया जाएगा
भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने शनिवार को घोषणा की कि भारत 22-23 जून को ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक की मेजबानी करेगा. इस बैठक में सदस्य देशों के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी शामिल होंगे और वे दुनिया में बढ़ती सिक्योरिटी टेंशन पर चर्चा करेंगे. भारत की अध्यक्षता में होने वाली इस दो-दिवसीय बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल करेंगे. उम्मीद है कि यह बैठक ब्रिक्स देशों के बीच रणनीतिक चर्चा के लिए एक अहम मंच साबित होगी, खासकर ऐसे समय में जब दुनिया भर की सरकारें पारंपरिक सैन्य खतरों से परे, सुरक्षा की बढ़ती जटिल चुनौतियों का सामना कर रही हैं.
किन मुद्दों पर होगी चर्चा
विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह बैठक "आज दुनिया के सामने मौजूद गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियां" विषय पर केंद्रित होगी. ब्रिक्स (BRICS) सदस्य देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुख उन उभरते खतरों पर विचार-विमर्श करेंगे, जो वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य को बदल रहे हैं. इस चर्चा का मुख्य केंद्र राष्ट्रीय सुरक्षा खतरों का तेजी से बदलता स्वरूप होगा. उम्मीद है कि प्रतिभागी इस बात पर गौर करेंगे कि तकनीकी प्रगति किस तरह सुरक्षा की स्थितियों को प्रभावित कर रही है और देशों तथा समाजों के लिए नई कमजोरियां पैदा कर रही है. चर्चा में साइबर खतरों, सूचना सुरक्षा, डिजिटल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और तकनीक से जुड़े अन्य खतरों जैसे मुद्दों को शामिल किए जाने की संभावना है, जो हाल के वर्षों में अहम हो गए हैं.
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यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एडवांस्ड डिजिटल टूल्स जैसी नई तकनीकों के गलत इस्तेमाल को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ रही है; इन तकनीकों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के नए पहलू सामने रखे हैं. उम्मीद है कि अधिकारी इन चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग और जानकारी साझा करने के तरीकों पर चर्चा करेंगे.
सुरक्षा सलाहकार आतंकवाद-रोधी और सूचना व संचार तकनीकों के इस्तेमाल में सुरक्षा से जुड़े ब्रिक्स के संयुक्त कार्य समूहों की हालिया बैठकों के नतीजों की भी समीक्षा करेंगे. ये कार्य समूह सीमा-पार सुरक्षा चिंताओं से निपटने और आतंकवाद व साइबर खतरों का मुकाबला करने में सहयोग बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने के तरीके विकसित करने में जुटे हुए हैं.
आतंकवाद पर सहयोग बड़ा मुद्दा
आतंकवाद-रोधी सहयोग BRICS के सुरक्षा एजेंडे का एक अहम हिस्सा बना हुआ है. वर्किंग ग्रुप की सिफारिशों की समीक्षा से सदस्य देशों के बीच इंटेलिजेंस शेयरिंग, क्षमता निर्माण और डिजिटल क्षेत्र में उभरते आतंकवादी खतरों से निपटने जैसे मामलों में और गहरे सहयोग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक के नतीजों से शांति, स्थिरता और उभरती सुरक्षा चुनौतियों से सामूहिक रूप से निपटने के बारे में ब्रिक्स (BRICS) की व्यापक चर्चाओं में योगदान मिलने की उम्मीद है. इससे आपस में तेजी से जुड़ती दुनिया में बहुपक्षीय सहयोग पर इस समूह के जोर को और मजबूती मिलेगी.
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